फसल बर्बादी से नाराज किसानों ने 150 गायों को सीएम योगी की पाठशाला में किया बंद

फसलों की बर्बादी से अज़ीज़ ग्रामीणों ने उठाया कदम

By: Ashish Shukla

Published: 18 Dec 2018, 05:12 PM IST

जौनपुर. अभिनव प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय सुरूवारपट्टी और धर्मापुर ब्लॉक का धनेजा प्राथमिक स्कूल छुट्टा पशुओं के लिए कारागार बन गया है। दो दिन से करीब 150 छुट्टा जानवर इन विद्यालयों में बंद हैं। सोमवार को विद्यालय का ताला न खुलने से कड़ाके की ठंड में नन्हे- मुन्ने बच्चों की पाठशाला खेत और सड़क पर चली। दो घण्टे तक सड़क पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने के बाद मौके पर पहुंचे बीइओ ने बच्चों को वापस घर भेज दिया।

यह सुनने में भले ही अटपटा लग रहा हो लेकिन चौबीस आने सच है। ऐसा हो रहा तालीम की नगरी जौनपुर में। दरअसल छुट्टा पशुओं से बर्बाद हो रहे फसलों से अन्नदाताओं के सब्र का बांध टूट गया। आक्रोशित ग्रामीण इन पशुओं को पकड़कर परिषदीय स्कूलों के परिसर में बंद कर दे रहे हैं। विद्यालयों में पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। सोमवार की सुबह शिक्षक व छात्र जब विद्यालय पहुंचे तो देखा कि भारी संख्या में ग्रामीण विद्यालयों के द्वार पर तालाबंदी करके मुख्यद्वार पर बैठे हैं।

लाख प्रयास करने के बाद भी जब ताला नहीं खुला तो शिक्षकों ने खेत और बाहर सड़क पर ही बच्चों को बैठा कर पढ़ाना शुरू कर दिया। लगभग दो घंटे बाद मौके पर पहुंचे बीइओ राजीव यादव ने ग्रामीणों को समझा- बुझाकर ताला खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन वे भी असफल रहे। उन्होंने अधिकारियों को सूचना देकर लगभग 11 बजे बच्चों को वापस घर भेज दिया। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी भारी संख्या में एकत्रित छुट्टा जानवरों को प्रशासन वाहन में भरकर ऐसे स्थान पर छोड़े जहां वो फसलों का नुकसान न कर सकें। बीईओ ने फोन से सूचना उपजिलाधिकारी सदर को दिया उन्होंने ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया।

असल में छुट्टा जानवरों से जान व फसलों को बचाने के लिए उक्त गांव के लोगों ने रविवार को दिन में ही घूम- घूमकर पशुओं को घेरना शुरू कर दिया। दो दिनों में एक-एक कर विचरण कर रहेकरीब 150 मवेशियों को गांव के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में बंद कर दिया। मुक्त कराने पहुंची पुलिस ने भी प्रबल विरोध देख वहां से खिसक लेने में ही अपनी भलाई समझी। ग्रामीणों की मांग थी कि प्रशासन इन जानवरों को गाड़ी पर लादकर गांव से दूर ले जाकर ऐसी जगह पर छोड़े जहां किसानों की फसल बर्बाद न हो। इस गांव में छुट्टा जानवरों के हमले से तीन माह पहले एक किसान की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही आधा दर्जन लोग घायल हो चुके हैं। जानकारी के बाद भी समस्या का हल नहीं निकला। पशुओं के विद्यालय परिसर में कैद होने के कारण शिक्षक मजबूरी में बाहर जमीन पर बैठाकर बच्चों को पढ़ाना पड़ा। तालाबंदी के कारण मध्यान्ह भोजन भी नही बना।

Ashish Shukla
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