खास है जौनपुर के शाहपंजा का मोहर्रम, मुगलकाल से चली आ रही है विशेष परंपरा

नौचंदी जुमेरात को शाहपंजा पर उमड़े अजादार, शबीह-ए-ताबूत और अलम के साथ किया अंगारे का मातम।

जौनपुर. यूपी में लखनऊ के बाद अजादारी का दूसरा खास मरकज जौनपुर को कहा जाता है। जौनपुर का मोहर्रम होता भी ऐसा है कि उसकी शोहरत पूरे देश में है। जौनपुर में यूं तो जौनपुर में पहली से लेकर दसवीं मोहर्रम यानि यौम-ए-आशूरा तक रोजाना ऐसे जुलूस हैं जो कदीमी और ऐतिहासिक हैं। यहां का नौहाख्वानी हो या सीना जनी, अंगारे का मातम हो या फिर बड़ी-बड़ी मजलिसें सब अपने अपनी अलग पहचान रखती हैं। शाह का पंजा बाबूपुर में सातवीं का मोहर्रम भी अपनी कदीमी यानि पुरातन व ऐतिहासिक अहमियत रखता है। यहां मुगलकाल से ही अजादारी अपने अलग रूप में होती चली आ रही है। यहां हजरत अली के प्रतीकात्मक रौजे पर लोग दूर-दूर से नज्र करने आते हैं।

 

पूरी रात चला मातमी जुलूस
इमाम हुसैन और 71 साथियों की याद में सातवीं मोहर्रम को जिले भर में मातमी जुलूस निकाला गया। अंजुमनों ने नौहे पढ़ने के साथ जंजीर और छुरियों का मातम कर नजराने अकीदत पेश किया गया। मोहर्रम के नौचंदी जुमेरात को शाह का पंजा बाबूपुर में सुबह से ही बड़ी संख्या में अजादारों के पहुंचने का सिलसिला शुरु हुआ। यहां मुगलकाल से ही यह परंपरा चली आ रही है कि लोग दूर-दूर से आकर खिचड़ी, मलीदा व जर्दा बना कर मौला हजरत अली के रौजे पर नज्र कराते हैं। यहां तेलावते कलामे पाक व नौकाख्वानी के बाद जुलूसों का सिलसिला आना शुरु हुआ जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।

 

मन्नती जुलूस अलम, बलुआघाट, सिपाह, पोस्तीखाना, पुरानी बाजार से पहुंचा। तहसीन शाहिद के नेतृत्व में अजादारों के लिए चाय-पानी आदि लोगों को बांटा गया। मुतवल्ली बोर्ड के सदस्य मिर्जा मोहम्मद बाकर, शहजादे, मुन्ना अकेला, अच्छन आदि लोग मौजूद रहे। संचालन मेंहदी रजा एडवोकेट तथा आभार मुतवल्ली तहसीन शाहिद ने किया।

 

ऐतिहासिक जुलूस के साथ हुई मजलिस
बलुआघाट स्थित हाजी मोहम्मद अली खां के इमामबाड़े में सातवीं मोहर्रम के ऐतिहासिक जुलूस की मजलिस सहारनपुर से आए मौलाना सैयद अली हैदर आब्दी ने पढ़ते हुए कहा कि कर्बला को शायद ही कोई भुला सकता है। आज उन्हीं की याद में हम लोग मजलि, मातम और नौहा पढ़ कर उनको नजराने अकीदत पेश कर रहे हैं। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत, अलम और जुलजनाह निकाला गया। जिसमें अंजुमन हुसैनिया नौहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए जुलूस को नवरोज के मैदान तक ले गई। यहां गुलामुल सकलैन ने खेताब किया। इसके बाद इमामबाड़े से शबीहे तुर्बत और झुला अली असगर निकाला गया। जिसे अलम, ताबूत और दुलदुल से मिलाया गया। करंजाकला ब्लाक के करंजाखुर्द में सातवीं मोहर्रम का जुलूस दरोगा जी के इमामबारगाह से निकला। मजलिस में नवाज हैदर व उनके हमनवां ने सोजख्वानी की। सैय्यद मोहम्मद शोजफ आब्दी ने जनाबे हजरत कासिम (अ.स.) की मुनासबत से तकरीर की। इसके बाद शबीह-ए-अलम लेकर पूरे गांव में गश्त अंगारे का मातम हुआ।

by JAVED AHMAD

 

 

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रफतउद्दीन फरीद Desk/Reporting
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