खतरे में जौनपुर जेल की सुरक्षा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा 

जेल में क्षमता से अधिक बंदी, न वाच टावर और न ही हाईमास्ट लैंप, 2005 में तीन खूंखार कैदी हुए थे फरार 

जौनपुर. भोपाल सेंट्रल जेल ब्रेक के बाद जेलों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एहतियात के तौर पर जेलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मगर जौनपुर जिला जेल की बात करें तो यहां सुरक्षा के नाम पर जो इंतजाम किये गये हैं, वो नाकाफी हैं। 


जिला जेल में कैदियों पर निगरानी के लिए  महज 20 सीसीटीवी कैमरे हैं जिनसे जेल के कुछ हिस्सों पर नजर रखी जा सकती है। 320 बंदियों वाली इस जेल में 834 बंदी रखे गए हैं। इसी में श्रमजीवी विस्फोट का दोषी ओबैदुर्रहमान भी मौजूद है। 2005 में यहां से भी 3 अपराधी भागे थे। जिन्हें बाद में पुलिस ने मार गिराया।

320 की क्षमता जबकि जेल में हैं 834 कैदी 
भोपाल सेंट्रल जेल से सिमी के आठ सदस्य बंदी रक्षक की हत्या कर भाग निकले। हालांकि पुलिस ने सभी को एनकाउंटर में मार गिराया। इसके बाद से जेलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए। यहां की जिला जेल भी ऐसे ही किसी हादसे का इंतजार कर रही है। इसकी क्षमता 320 बंदियों को रखने की है, लेकिन वर्तमान समय में यहां 834 बंदी मौजूद हैं। कुल बंदीरक्षकों की संख्या 49 है। जो बारी-बारी तीन शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं। 


2005 में तीन खूंखार कैदी हुए थे फरार, बाद में हुआ था इनकाउंटर 
मानक के अनुसार 8 बंदी पर एक बंदी रक्षक तैनात होना चाहिए। एक अधीक्षक, एक जेलर व 2 डिप्टी जेलर हैं। आवश्यकता 4 डिप्टी जेलरों की है। जेल में नजर रखने के लिए वाच टावर भी मौजूद नहीं है। हाइमास्ट लैंप की अनुपस्थिति में रात के समय निगरानी संभव नहीं है। किसी तरह यहां जैमर लगाने के लिए शासन स्तर से मंजूरी मिल गई है। बता दें कि यहां से भी वर्ष 2005 में तीन खूंखार अपराधी राजेंद्र, जय प्रकाश और राजदेव फरार हो गए थे। बाद में सभी एनकाउंटर में मारे गए।
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अखिलेश त्रिपाठी
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