UP ELECTION 2017: जौनपुर से चुनाव लड़ सकते हैं मुख्तार, अतीक और बृजेश

UP ELECTION 2017: जौनपुर से चुनाव लड़ सकते हैं मुख्तार, अतीक और बृजेश
Mukhtar Ansari

मुन्ना बजरंगी और धनंजय पहले से ही हैं मैदान में, रोचक होगा मुकाबला

जौनपुर. सियासी बिसात बिछते ही अपना हाथ आजमाने यहां अब कई माफिया भी कूदने वाले हैं। मुख्तार अंसारी से लेकर अतीक अहमद और बृजेश सिंह की पत्नी आगामी विधानसभा में यहां से चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं माफिया मुन्ना बजरंगी की पत्नी और धनंजय सिंह पहले से ही ताल ठोके हुए हैं। इस सुगबुगाहट से खूफिया तंत्र की भी नींद उड़ी हुई है। अगर ऐसा हुआ तो प्रदेश की राजनीति जौनपुर की धरती पर होने वाली इस टक्कर पर निगाह लगाए रहेगी।


विधानसभा चुनाव की आहट सुनाई पड़ने लगी है। ऐसे में विधायक बनने का ख्वाब देख रहे प्रदेश के कई डाॅन जौनपुर को अपनी पसंद बना चुके हैं। सपा और कौमी एकता दल का विलय हुआ तो मुख्तार अंसारी भी सपा के उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं। 



सूत्रों की मानें तो उनकी पहली पसंद जौनपुर सदर सीट ही है। क्योंके ये मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। ऐसे में मऊ सीट से उनकी पत्नी या बेटा चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं जफराबाद सीट से माफिया बृजेश सिंह अपनी पत्नी को भाजपा से टिकट लेकर मैदान में उतारना चाहता है। भाजपा के पास जफराबाद से दमदार नाम सामने नहीं होने से भी इस बात को बल मिलता है। इस सीट पर क्षत्रिय वोट का बोलबाला रहा है। 



इलाहाबाद से पूर्व सांसद अतीक अहमद भी अपना भविष्य जौनपुर में ही तलाश रहे हैं। फूलपुर सीट पर सपा का वर्तमान विधायक होने के नाते वहां से इनकी दावेदारी कमजोर पड़ गई है। वो भी सपा का झंडा थामे जौनपुर की सीमा में प्रवेश करना चाह रहे हैं। आजकल समाजवादी खेमे में उनकी पैठ किसी से छिपी नहीं है। अंदर खाने से खबर आ रही है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से अपनी इच्छा जाहिर कर दी है।  



पूर्व सांसद बाहुबली धनंजय सिंह ने भी फिर से बसपा का दामन थाम लिया है। ये लगभग तय है कि वे मल्हनी विधानसभा सीट पर अपनी जीत की मुहर लगाने के लिए मैदान में उतरेंगे। इनमें इतना दम है कि अकेले कई ब्लाक प्रमुख बनवा दिए। पिछले विधानसभा चुनाव में मड़ियाहूं सीट से भाग्य अजमा चुका मुन्ना बजरंगी इस बार पत्नी सीमा सिंह को मैदान में उतार रहा है। हालांकि पहले सीमा सिंह बसपा से ही टिकट मांग रही थीं, लेकिन अब अपना दल से टिकट मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इन धुरंधरों के हाथ टिकट लगा तो हर सीट पर घमासान देखने को मिल सकता है। इनके सामने उम्मीदवार घोषित करने से पहले पार्टियों को भी कई बार विचार करना पड़ेगा। ऐसी सूरत में कानून व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौती होगी।
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