तंबाकू के लिये कैदियों ने जेल में कर दी भूख हड़ताल

  • जांच करने पहुंचे डीआईजी जेल, मान-मनव्वल के बाद बंटा खाना।

जावेद अहमद

जौनपुर. जिला जेल के बंदियों को गुटखा तंबाखू नहीं मिला तो सोमवार को भूख हड़ताल पर चले गए। मामले की जानकारी मिली तो डीआईजी जेल विंध्यवासिनी यादव जांच के लिए पहुंच गए। देर शाम तक जेल के भीतर समझाने-बुझाने का दौर चलता रहा। बंदी मान गए तो उन्हें खाना बांटा गया। दरअसल बीती 7 जुलाई को जेलर के कार्यालय से मोबाइल, शराब की बोतलें वग़ैरह बरामद हुई थीं। इसके बाद जेल प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी। इस पर बंदी हड़ताल पर चले गए।

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पेशी पर दीवानी न्यायालय आए कुछ बंदियों ने बताया कि जेल मैनुअल के हिसाब से उन लोगों को खाने-पीने की व अन्य सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। इससे आजिज़ आकर बंदी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। रात में किसी भी समय कई बार कर हम बंदियों को अनावश्यक उठा कर परेशान किया जाता है। मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। मांग है कि डीएम व एसपी आकर मिलें और समस्याओं का निराकरण करें। इसके बाद डीआईजी जेल जांच को जिला कारागार पहुंच गए। दिन भर बंदियों से कई दौर में हुई, लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी। देर शाम बंदी उनकी बात मान गए तो भूख हड़ताल खत्म की गई। डीआईजी ने बताया कि छापेमारी के दौरान जेल से मिले तंबाखू पदार्थ भी बाहर कर दिए गए थे। इससे आक्रोशित बन्दी भूख हड़ताल पर चल गए। सभी को समझा कर हड़ताल खत्म करा दी गयी है।

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ये हुआ था 7 जुलाई को

जौनपुर। जिला जेल में जिला प्रशासन ने 7 जुलाई को छापा मारा था तो जेलर के कमरे से ही उन्हें कई मोबाइल, शराब की बोतलें और गांजा बरामद हुआ था। इसके बाद भी जेलर साहब अभी जौनपुर जेल में ही तैनात हैं। कोई उनका बाल भी बांका नहीं कर सका। ज़िला प्रशासन ने उन पर क्या कार्रवाई की ये भी बताने वाला कोई नहीँ। ज़िला प्रशासन को इस बात का शक है कि जेलर की मिलीभगत से जेल के भीतर ऐशो आराम की सभी चीज़ें कैदियों को मुहैया कराई जाती हैं। जिला अधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी और एसपी विपिन मिश्रा की टीम अचानक जेल पहुंच गई थी।

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बौरकों में काफी देर निरीक्षण के बाद वापस जाने लगे तो जेलर संजय सिंह के कार्यालय में चले गए। वहां जांच शुरू हुई तो एक के बाद एक आपत्तिजनक चीज़ें मिलना शुरू हो गईं। अलमारी के अंदर से शराब की बोतलें बरामद हुईं। कई मोबाईल फोन, कैश, सिगरेट समेत प्रतिबंधित चीज़ें अब डीएम और एसपी के सामने थीं। डीएम ने सवाल किया कि कैसे जेलर के रूम मे पांच हजार कैश के अलावा इतने अवैध सामान मौजूद हैं तो वे सही-सही जवाब नहीं दे सके। हालांकि ये खुफिया वीडियो कई दिनों बाद वायरल हुआ। इसके बाद तो प्रशासन में हड़कम्प मच गया। अधिकारी भी सकते में हैं कि आखिर यह वीडियो कैसे मीडिया तक पहुंचा गया। हालांकि छापेमारी वाले दिन डीएम ने जेल के बैरकों के अलावा जेलर के रूम से मिली चीजों के बारे में उसी दिन बता दिया था।

रफतउद्दीन फरीद
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