मकर संक्राति: इस शुभ मुहूर्त में सूर्य देव की पूजा करने से मिलेगा लाभ, अब शुरू होगें मांगलिक कार्य

मकर संक्राति: इस शुभ मुहूर्त में सूर्य देव की पूजा करने से मिलेगा लाभ, अब शुरू होगें मांगलिक कार्य

Jyoti Mini | Publish: Jan, 13 2018 06:32:55 PM (IST) Jaunpur, Uttar Pradesh, India

मकर संक्रान्ति की तैयारियां जोरों पर...

 

जौनपुर. सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाए जाने वाले मकर संक्रांति पर्व की तैयारी हर ओर शुरू हो गई है। पर्व को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ गई है तो इसमें खरीदारों की भी खूब भीड़ जुट रही है। पर्व के निकट आने के साथ ही पतंगों की मांग बढ़ गई है तो पूरा बाजार तिलवा, तिल, चिउरा व गुड़ आदि से पट गया है।

इसमें तिल से बने एक से एक खाद्य पदार्थ बाजार में बिक रहे हैं। इस बार वेदाचार्य व पंचांग के जानकारों के अनुसार सूर्य के 14 जनवरी की रात 7.35 पर मकर राशि में प्रवेश करने से मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनेगा। 15 जनवरी सोमवार की सुबह स्नान के बाद चूड़ा-दही व तिल खाना शुभ होगा। ऐसे में पर्व को देखते हुए गोमती के घाटों से लेकर हर ओर इसकी तैयारी शुरू हो गई है। मकर संक्रांति पर्व पर स्नान के साथ ही दान आदि का काफी महत्व रहता है। जिससे इस दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु मां पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बनते हैं।

इस दिन लोग तिल, गुड़, तिलवा व उड़द के दाल आदि का दान करते हैं। पर्व पर स्नानादि के बाद लोग सुबह घरों पर दही व चिउरा का सेवन करते हैं तो शाम को घर-घर में खिचड़ी बनती है। इसकी वजह से ही इस पर्व को यहां खिचड़ी ही कहा जाता है।

मकर संक्रांति के दिन ही खरमास भी खत्म हो जाएगा। जिसके बाद शादी-विवाह आदि अन्य शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। ऐसे में पर्व को लेकर हर ओर उल्लास व उत्साह का माहौल दिख रहा है। इसे लेकर तो इस समय पूरा बाजार ही पर्व की रंग में रंग गया है। बाजार में हर ओर रेडीमेड तिलवा बिक रहे जिसकी लोग जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं। जिले भर में मकर सक्रान्ति की तैयारियां जोरों पर चल रही है। चट्टी चैराहे पर और बाजारों में सड़क के किनारे अस्थायी दुकाने लगाकर लाई, चूड़ा, गट्टा, तिलकुट, पपड़ी आदि सामग्रियांे की दुकानों पर खरीददारांे की भीड़ उमड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग जहां अपने घरों में पर्व की सामग्रियां तैयार करते है वहीं शहरों में लोग दुकान पर बने सामानों पर ही पूरी तरह से निर्भर रहते हैं।

input- जावेद अहमद

 

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