मल्हनी उपचुनावः मान रहा भगवा खेमा बड़ी कठिन है डगर पनघट की

अतीत में मिली करारी हार का दाग धोने की छटपटाहट।

जावेद अहमद

जौनपुर. उपचुनाव को सरकार की साख का सवाल माना जाना राजनीति में हमेशा का चलन रहा है। सपा के लिए मल्हनी जहां अभेद्य किले के रूप में शुमार है वहीं भगवा खेम के लिए यहां जीत मृग मारीचिका साबित हुई है। सम्प्रति अब यह साख का ही सवाल है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के पहले स्वयं सरकार ही यहां आ धमके। हर हाल में जीत की छटपटाहट का ही आलम रहा कि वे बड़े सरकार यानि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अब तक के कई नामुमकिन समझे जाने वाले कामों को मुमकिन कर दिए जाने का हवाला देते हुए कहा बूथ जीतो- चुनाव जीतो मल्हनी में जीत अब मुमकिन है।

 

रारी से लेकर नवसृजित मल्हनी विधानसभा चुनाव के अब तक के परिणामों पर नजर डालें तो भगवा खेमा यह समझ रहा है कि यहां बहुत कठिन है डगर पनघट की... मौजूदा सियासी हालातों में मोदी- योगी की सफल जोड़ी, मोदी की छवि का बरकरार आकर्षण, प्रदेश व देश की सत्ता हांथ में होने की हनक कुछ ऐसे अहम फैक्टर हैं जिसने यहां पार्टी कार्यकर्ताओं में जान फूंक दी है।

 

यहां बिखरा विपक्ष सत्ता पक्ष की घेरेबंदी से कैसे पार पा सकेगा फिलहाल अभी इसका भी कोई रोडमैप नहीं दिख पाया है। सीएम योगी ने यहां आकर भाजपा सरकार की उपल्बधियों का बखान करने के साथ ही भविष्य के सपने भी दिखाए लेकिन यह सारी कवायद परिणाम के लिहाज से कितना मुफीद होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। चुनावी परिस्थितियों के लिहाज से राजनीति के जानकारों का मानना है कि यहां सपा व भाजपा के लिए नाक का सवाल बन चुका यहां का उपचुनाव दिलचस्प सियासी जंग का गवाह बनेगा।

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रफतउद्दीन फरीद
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