चातुर्मास के लिए आचार्यश्री और मुनिश्री का मंगल प्रवेश

चातुर्मास के लिए आचार्यश्री और मुनिश्री का मंगल प्रवेश

Arjun Richhariya | Updated: 11 Jul 2019, 06:46:15 PM (IST) Jhabua, Jhabua, Madhya Pradesh, India

शोभायात्रा के साथ पैलेस गार्डन पर हुआ धर्मसभा का आयोजन, बैंड-बाजों पर प्रस्तुत धार्मिक गीतों और ढोल-ताशों से पूरा शहर गूंजायमान हुआ

झाबुआ. गुरुवार को वह ऐतिहासिक अवसर था, जब नवल स्वर्ण जंयती चातुर्मास-2019 को लेकर आचार्य देवेश विजय नरेन्द्र सूरीश्वर 'नवलÓ एवं मुनि जिनेन्द्र विजय 'जलजÓ का झाबुआ शहर में ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। नवल एवं जलज का विशाल शोभायात्रा के साथ शहर में आगमन हुआ। इसका सकल जैन समाज साक्षी बना और शोभायात्रा में पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेकर महिलाएं जहां अपने सिर पर कलश लेकर चली तो बालक-बालिकाएं जगह-जगह नृत्य करते हुए शामिल हुए।

बैंड-बाजों पर प्रस्तुत धार्मिक गीतों और ढोल-ताषों से पूरा शहर गूंजायमान हुआ। हाथी-घोड़े पर लाभार्थी भगवान एवं गुरुदेव के चित्रों को लेकर चले। आचार्य एवं मुनि के जयकारों से पूरा शहर गुंजायमान हुआ। विभिन्न समाजजनों एवं संस्थाओं ने पलक-पावड़े बिछाकर आचार्य एवं मुनिराज का भव्य स्वागत-वंदन किया।
हर धर्म-समाज, राजनीतिक पार्टियों ने भी आचार्य श्रीजी का बहुमान कर दर्शन-वंदन का लाभ प्राप्त किया। इसके बाद पैलेस गार्डन पर हुई धर्मसभा में आचार्य श्रीजी ने चातुर्मास में समाजजनों को जप-तप एवं आराधना के साथ सभी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने का आह्वान किया।

गुरुवार को सुबह 8 .30 बजे सकल श्री संघ की ओर से श्री गोड़ी पाश्र्वनाथ मंदिर पर नवकारसी का आयोजन रखा गया। इसका समाजजनों ने लाभ लिया। बाद यहां श्री पाश्र्वनाथ भगवान के आचार्य एवं मुनि द्वारा दर्शन करने के पश्चात् शोभायात्रा आरंभ हुई। इसमें सबसे आगे हाथी पर बैठने का लाभ मोना-टीना, क्रिश रूनवाल परिवार ने प्राप्त किया। इसके पीछे दो अश्वों (घोड़ो) पर समाज के ध्वज लेकर लवेश सिद्धार्थ वागरेचा एवं कांठी परिवार के बालक चले। झाबुआ जिले की संस्कृति के अनुरूप आदिवासी नृतक द्वारा आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किया। बैंड-बाजों पर प्रस्तुत धार्मिक गीतों से पूरा शहर गुंजायमान हुआ। विशेष बग्घी में पहली बग्घी पर श्यामबाई रूनवाल परिवार दादा गुरूदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वर के चित्र को लेकर बैठा था तो दूसरी बग्घी में माणकबाई लोढ़ा परिवार त्रि-स्तुतिक परंपरा के महान संत मुनि देवेन्द्र विजय के चित्र को लेकर विराजमान हुआ। इसके पीछे ढोल-ताशों की आवाज पूरे शहर में गुंजायमान हुई। समाज के बालक-बालिकओं ने उत्साह के साथ जगह-जगह नृत्य कियाा। सिर पर कलश लेकर विभिन्न महिला एवं बालिका मंडलों की बालिकाएं अपने-अपने मंडल की वेशभूषा में कतारबद्ध होकर चली।
नवकार ग्रुप की महिलाओं ने जगह-जगह सुंदर नृत्य एवं अपने अभिनव के माध्यम से आचार्य एवं मुनि के नगरागमन पर उनका स्वागत-वंदन किया। दादा गुरुदेव विजय राजेन्द्र सूरीश्वर के चित्र के सम्मुख जगह-जगह समाजजनों ने गहूली की। इसके पीछे आचार्य नरेन्द्र सूरीश्वर एवं मुनि जिनेन्द्र विजय मसा चले। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में सकल जैन समाजजनों की सहभागिता रही।

इन मार्गों से निकली विशाल शोभायात्रा-
शोभायात्रा शहर के गोड़ी पाश्र्वनाथ मंदिर से सुबह करीब 9.15 बजे प्रारंभ हुई। जो हाइवे मार्ग से राजगढ़ नाका, डीआरपी लाईन तिराहा, नेहरू मार्ग, गोवर्धननाथ मंदिर तिराहा, आजाद चौक, बाबेल चौराहा, थांदला गेट, रूनवाल बाजार, ऋषभदेव बावन जिनालय, लक्ष्मीबाई मार्ग, राजवाड़ा होते हुए पैलेस गार्डन पर पहुंची। यात्रा को गोड़ी पाश्र्वनाथ मंदिर से पैलेस गार्डन पहुंचने में करीब 3 घंटे का समय लगा।

चातुर्मास कार्यालय का शुभारंभ-
शोभायात्रा के ऋ षभदेव बावन जिनालय पहुंचने पर आचार्य श्री द्वारा सर्वप्रथम चातुर्मास कार्यालय का फ ीता काटकर लोकार्पण किया। इसके बाद अंदर प्रवेश कर वाक्षेप पूजन की गई। तत्पश्चात् बावन जिनालय में प्रवेश कर भगवान आदिनाथ एवं दादा गुरुदेव विजय राजेन्द्र सूरीश्वर के दर्शन किए।

संगीतमय आर्केस्ट्रा के साथ विभिन्न बोलियां लगाई गई
पैलेस गार्डन में धर्मसभा हुई। सर्वप्रथम सामूहिक गुरुवंदन श्री संघ के पूर्व व्यवस्थापक धर्मचन्द मेहता ने कराया। मंगलारण आचार्य नरेन्द्र सूरी ने किया। आचार्यश्री की प्रथम गहुली संतोषकुमार, सुनिता, मोना, टीना, क्रिश रूनवाल परिवार द्वारा की गई। इसके बाद भगवान पाश्र्वनाथ, दादा गुरुदेव विजय राजेन्द्र सूरीश्वर एवं देवेन्द्र विजय के चित्र पर दीप प्रज्जवलन एवं वाक्षेप पूजन की बोलियां लगाई गई। इस बीच संगीतमय आर्केस्ट्रा के साथ मेरा एक साथी है ... वह गुरुवर है ..., गुरुवर हमको दीजिए जन्म-जन्म का साथ .... की प्रस्तुति संचालनकर्ता हितेष जगावत ने की।

महिलाओं ने गीत प्रस्तुत किया-
इस अवसर पर मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी बीजी मेहता उपस्थित थे। वहीं अन्य अतिथियों में बाहर से आए हुक्मीचंद आहोर, रमेश जोगापुरा मौजूद रहे। प्रथम बोली राहुलकुमार अमृतलाल संघवी राहुल इंवेट एवं जय कम्प्यूटर ने ली। दीप एवं धूप प्रज्जवलन की बोली चातुर्मास समिति के अध्यक्ष कमलेश, सुजानमल कोठारी परिवार ने ली। वाक्षेप पूजन की बोली संतोषकुमार रूनवाल परिवार ने लेकर लाभ प्राप्त किया। इस दौरान सुंदर गीत नवकार ग्रुप की महिलाओं ने प्रस्तुत किया। गुरु वंदन गीत की प्रस्तुित बहू मंडल की महिलाओं ने दी। रूनवाल परिवार की श्राविकाओं ने मंगल गीत गाया। चातुर्मास समिति अध्यक्ष कमलेश कोठारी ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर चांदी के पट्ट एवं शांति कलश सूरी मंत्र जाप की बोलियां भी बोली गई। जो निलेशकुमार बाबूलाल लोढ़ा परिवार ने ली। गुरुदेव को कामली ओढ़ाने का लाभ हिम्मतलाल परमार एवं चातुर्मास के लिए सहयोग राशि देने की घोषणा दलीचंद भीकमचंद संघवी परिवार ने की।
गुरुदेवजी का बहुमान
आचार्य नरेंद्र सूरी का बहुमान का लाभ राहुल अमृतलाल संघवी परिवार निवासी बड़ौदा द्वारा लेते हुए गुरुदेव का बहुमान किया। इसके साथ ही श्वेतांबर श्री संघ झाबुआ की ओर से संजय मेहता, सुभाष कोठारी, रिंकू रूनवाल ने भी आचार्य श्रीजी एवं मुनि का कामली ओढ़़ाकर बहुमान किया। सकल जैन समाज की ओर से भी आचार्य श्रीजी को कामली ओढ़ाई गई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि बीजी मेहता का मंच पर शाल ओढ़ाकर श्रीफल भेंटकर चातुर्मास समिति की ओर से वरिष्ठ यशवंत भंडारी, नीलेश लोढ़ा, कमलेश कोठारी, संतोष रूनवाल, जितेन्द्र जैन, अशोक रूनवाल, अक्षय लोढ़ा, मधुकर शाह आदि ने किया। वर्षीतप की तपस्वी मोना रूनवाल का भी चातुर्मास समिति एवं श्वेतांबर श्री जैन संघ की ओर से भावभरा बहुमान किया गया।

चातुर्मास में जप-तप एवं आराधना में लीना होना है-
मंगल प्रवचन देते हुए आचार्यश्री नरेन्द्र सूरी एवं जिनेन्द्र विजय ने कहा कि आपको चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचनों का श्रवण कर धर्म लाभ लेने के साथ इन दिनों में जप-तप एवं आराधना में पूर्णत लीन होकर धर्म और आस्था के प्रति अपनी समर्पण भावना को प्रस्तुत करना है। मनुष्य को मोक्ष मार्ग पर प्रशस्त होने के लिए नियमित धर्म क्रियाआें में लीन रहना जरूरी है। धर्मसभा का संचालन चातुर्मास समिति के कार्यक्रम संयोजक यशवंत भंडारी ने किया। आभार चार्तुमास समिति के अशोक रूनवाल ने माना।। तत्पश्चात् बावन जिनालय स्थित धर्मशाला में सभी के साधर्मी वात्सल्य का आयोजन हुआ।

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