आचार्यश्री की गहुली कर आगवानी

आचार्य देवेश ऋषभचंद्रसूरीश्वर का आचार्यपदवी के बाद पहली बार नगरागमन हुआ

आलीराजपुर. आचार्य देवेश ऋषभचंद्रसूरीश्वर का आचार्यपदवी के बाद पहली बार नगरागमन हुआ। कृषि उपज मंडी परिसर के पास नवकारसी के पश्चात् चल समारोह प्रारंभ हुआ। इसमें जैन समाज के हर परिवार ने आचार्यश्री के सम्मुख गहुली की।
आचार्यश्री ने नगर में स्थित जैन मंदिर के दर्शन किए। आचार्यश्री को जैन श्रीसंघ की ओर से संतोषीलाल केशरीमल जैन एवं पदाधिकारीयों ने कामली ओढ़ाई एवं तेजराज, हरकचंद जैन परिवार ने गुरु पूजन किया। विधायक नागरसिंह चौहान ने आचार्यश्री एवं मुनिमंडल की अगवानी कर आशीवा्रद प्राप्त किया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्यदेवेश ऋषभचंद्रसूरीश्वर ने कहा कि मोहनखेड़ा तीर्थ की पावन भूमि से आज देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मोहनखेड़ा तीर्थधाम की 25 फरवरी को होने वाली प्रतिष्ठा अजंनशलाका के लिए प्रयाण हुआ है। आचार्यश्री ने कहा है कि हम अपने सिर के बाल कितने ही काले क्यों न कर ले पर हम अपनी उम्र को नहीं छिपा सकते। शरीर में रोग का प्रवेश कब हो जाएगा और मृत्यु कब आ जाएगी कोई नहीं जानता।
मालव केसरी मुनि हितेशचन्द्रविजय ने कहा कि भगवान कहा रहते है ? क्या करते है, और क्या देते है ? किसी राजा के दरबार में मंत्री को राजा ने प्रश्न पूछ लिया तब यह सटीक जवाब उनकी पुत्री ने दिया कि दूध से हम जीस प्रकार मक्खन और घी अलग नहीं कर सकते। उसी प्रकार भगवान भी सर्वव्यापी है और हर जगह निवास करता है। आचार्यदेवेश ऋषभचंद्र सूरीश्वर, मालवकेसरी मुनि हितेशचंद्र विजय, मुनि दिव्यचंद्र विजय, मुनि रजतचन्द्र विजय, मुनिचन्द्रयशविजय, मुनि वैराग्यय शविजय, मुनि जिनचंद्र विजय, मुनि जीतचन्द्र विजय, मुनि जनकचंद्र विजय, साध्वी रत्नत्रया, साध्वी तत्वत्रया, साध्वी गोयमरत्ना आदि ठाणा का मंगलमय प्रवेश आलीराजपुर नगर में हुआ। इस अवसर पर आदिनाथ राजेंद्र जैन पेढ़ी मोहनखेड़ा तीर्थ पेढ़ी ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, सेवंतीलाल मोदी, संतोष चत्तर, राजेंद्र खजांची, प्रकाश पावेचा, सह प्रबंधक प्रितेश जैन, पार्षद नरेंद्र भंडारी, दिलीप भंडारी, संतोष पिपाड़ा एवं लक्ष्मणी तीर्थ के अध्यक्ष प्रकाशचंद जैन मौजूद थे।

 

अर्जुन रिछारिया Incharge
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