दूसरों को दे रहे नियमों की सलाह, अधिकारी-कर्मचारी खुद लापरवाह!

पुलिस विभाग यातायात के लिए ठोस काम करने की जगह नुक्कड़ नाटक और बच्चों से रंगोलियां बनवा रहा

झाबुआ. पुलिस विभाग की ओर से 31 वां सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जा रहा है, लेकिन सड़क पर यातायात प्रभावित करते दृश्य आम दिनों की तरह है। अधिकारी आम लोगों को तो यातायात के नियम बता रहे हैं, पर खुद लापरवाही वरत रहे हैं। यातायात के लिए ठोस काम करने की जगह नुक्कड़ नाटक और बच्चों से रंगोलियां बनाबाई जा रही हैं। शहर भर में एक भी सड़क एकांकी घोषित नहीं की गई। इस कारण शहर के बीचोबीच वर्षों पुरानी संकीर्ण गलियों में जाम लगा रहता है।

बाजार आने वाले लोगों के वाहन पार्क करने के लिए एक भी पार्किंग स्थल नहीं होना भी यातायात में बाधा पहुंचा रहा है। शहर के सभी शॉपिंग मॉल, मुख्य बाजार, बैंक, होटल, टॉकीज, रेस्टोरेंट के बाहर पार्किंग व्यवस्था नहीं है। यहां पहुंचने वाले लोग अपने वाहन सड़कों पर पार्क करते हैं। कलेक्टोरेट पुलिस अधीक्षक कार्यालय यातायात थाना पुलिस कोतवाली के सामने से वाहनों में लटककर ओवरलोड सवारी सफर करती हैं। सड़क पर आम नागरिकों के साथ पुलिस जवान तक बिना हेलमेट के बाइक चलाते दिख रहे हंै। अधिकतर सवारी वाहन ओवरलोड चल रहे हैं। बहुत से वाहनों की फिटनेस एवं परमिट नहीं है। तो कुछ वाहन बिना नंबरों के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। 17 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थी तीन -तीन को बैठा कर मोपेड एवं बाइक चलाते दिख रहे हैं। यह सब शहर की सड़कों पर आसानी से देखा जा रहा है, परंतु यातायात विभाग इससे अनजान बना हुआ है।

जागरूकता रैली, कभी वाहन चालकों का नेत्र परीक्षण
सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत 7 दिनों तक पुलिस विभाग वाहन चालकों पर सख्ती एवं समझाइश दोनों तरीके आजमा कर दुर्घटनाओं को रोकने की हर साल की तरह खानापूर्ति में लगा है। इसके लिए पुलिस विभाग कभी जागरूकता रैली, कभी वाहन चालकों का नेत्र परीक्षण, कभी स्कूल विद्यार्थियों को यातायात विषय पर निबंध , चित्रकला प्रतियोगिता के साथ सड़क सुरक्षित तरीके से चलने के नियम बताकर तो कभी वाहनों का पंचनामा बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर लेता है। इस कारण सड़क हादसों में हुई मौत के आंकड़ों को रोकने के लिए पुलिस विभाग को कोई खास कामयाबी नहीं मिली। सड़क दुर्घटनाओं के मामले में जारी पुलिस विभाग के आंकड़ों की माने तो 2014 से 2019 के बीच छह वर्षो में कुल 4971 सड़क हादसों में 730 लोग मृत्यु के शिकार हुए एवं 5526 लोग घायल हुए हैं। इसमें पिछले वर्ष 706 हादसों में 149 लोगों की मृत्यु हुई एवं 806 लोग घायल हुए हैं।

चलती-फिरती मौत बनकर दौड़ रहे
लोडिंग गाडिय़ों में कंस्ट्रक्शन कार्यों में उपयोग किए जाने वाले सरिए का परिवहन में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। जानलेवा परिवहन की श्रेणी में आने के बाद भी विभाग आंखें मूंदे बैठा है। नियमानुसार सरियों पर दोनों और लाल फीता बांधकर परिवहन किया जाना चाहिए। खुले सरियों का मुंह सड़क की ओर होने के स्थान पर आसमान की ओर होना चाहिए, लेकिन शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक निर्माण सामग्री ले जाने वाले लोडिंग वाहन नियमों को ताक में रखकर सड़क पर चलती-फिरती मौत बनकर दौड़ रहे हैं।

kashiram jatav
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