हाथठेला पर फल-फू्रट बेचने वालों को छूट, ग्रामीण महिलाओं से सब्जी जब्त

मुसीबत के समय में भी आदिवासी अंचल के ग्रामीण को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है

By: kashiram jatav

Published: 12 May 2020, 11:42 PM IST

राणापुर. तीसरे चरण के लॉकडाउन के दौरान जैसे मजदूर अपने गांव में आने के लिए छटपटा रहे हैं, लेकिन राज्य सरकारें उन्हें लाने में तत्परता नहीं दिखा रही। वही शहरों के लोगों को जो विदेश में फंसे हैं उन्हें हवाई जहाज से वापस लेकर आ रही है। इस तरह इस मुसीबत के समय में भी आदिवासी अंचल के ग्रामीण को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। अब इस लॉकडाउन में विकासखंड की ग्रामीण इलाकों की महिलाएं अपनी सब्जी और फ्रूट टोकरे में भरकर नगर में घूमकर बेचती थी। उन सभी की दुकान स्थानीय नगरी प्रशासन ने अनाज मंडी में लगवा दी है। जो नगर के फल के व्यापारी वह सडक़ों चौराहों पर अपनी दुकानें लगाकर फल बेच रहे हैं। अब प्रशासन का यह दोहरा मापदंड ग्रामीण इलाका के आदिवासियों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है।

ग्रामीण इलाकों से आदिवासी महिलाएं कई किलोमीटर दूर पैदल चलकर दो वक्त की रोटी के लिए नगर में सब्जियों व फल बेचने आती है। इस भयंकर मुसीबत के दौरान आदिवासियों के पास ग्रामीण इलाकों में पैसा तक खत्म हो गया है। वह सूखी रोटी और मिर्ची से कूटकर भोजन कर रहे हैं। गुजरात से काम कर लौट मजदूरों को भी पैसे नहीं मिले। अब उनके खेतों में जो उन्होंने सब्जियां उगा रखी है। वह सब्जियां ही वह रोजाना बाजारों में लेकर आते हैं और उन्हें बेचकर जो पैसा आता है। उससे ही वह बाजार में राशन खरीदते हैं और दो वक्त की रोटी का इंतजाम होता है, लेकिन प्रशासन के इस दोहरी मानसिकता के चलते उनके इसके भी लाले पड़ रहे हैं। नगर परिषद द्वारा मुनादी कराकर यह घोषणा की गई कोई भी सब्जी एवं फल विक्रेताओं की दुकानें नगर में नहीं लगेगी। सभी की दुकानें अनाज मंडी लगेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अर्थदंड की कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण महिलाएं सब्जी टोपला लेकर बाजार में घूमकर बेच रही थी। जो ग्रामीण महिलाएं सडक़ किनारे पर सब्जी बेचने बैठी थी। उनकी सब्जी जब्त कर ली। एक महिला नगर परिषद के कर्मचारियों से कहने लगी कि साहब मुझे सब्जियां वापस दे दो अब दुकान नहीं लगाऊँगी में गरीब हंू, लेकिन उन्होंने सब्जी जब्त कर आगे चले गए। महिला रोती बिलखती रही, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। जबकि पुराना बस स्टैंड, नया बस स्टैंड, अस्पताल तिराहा, झाबुआ नाका, एमजी रोड इन सभी प्रमुख चौराहे पर फल की दुकान ठेला गाडिय़ों में लाइन से लगी हुई थी। जिसे नगर परिषद के कर्मचारियों ने कुछ नहीं कहा या देखकर भी अनदेखा कर दिया। केवल ग्रामीण इलाके की महिलाएं सब्जी और फल अपना परिवार का भरण पोषण करती हैं। उन पर ये नियम लागू किया।

नहीं हुई बोवनी
मैं सुबह से 7 बजे से यहां मंडी में दुकान लगाकर बैठी हूं, लेकिन 11 बजे तक हमारी बोनी तक नहीं हुई। जब हम बाजार में घूम को सब्जी बेचते थे तो 1 घंटे में सभी सब्जियों बिक जाती थी और हम अपने घर पहुंच जाते थे।
-तोला राठौर, बन

राशन कैसे खरीदेंगे
हमारे पास पैसे खत्म हो गए हैं। हमने जो सब्जियां पकाई थी अपने खेतों में वह सब्जिया बाजार में बेचने आते हैं, लेकिन मंडी में दुकान लगी सब्जियों की बोनी तक नहीं हो रही है, इन्हीं सब्जियों को बेचकर हम तेल, मिर्च, मसाला, जरूरत की चीज खरीदते हैं। अब हम राशन कैसे खरीदेंगे।
-शारदा , वगाई

8 किमी चलकर आए
सुबह घर से 6 बजे निकलते हैं। सिर पर टोपला रखकर उसमें सब्जियां लेकर 8 किलोमीटर पैदल चलकर राणापुर में सब्जियां बेचने आते हैं और मंडी में सब्जी की दुकानें लगाने से हमारे पास कोई भी ग्राहक नहीं आ रहा है। क्योंकि बाजारों में सब्जियां बिक रही हैं। सब्जियां वापस लेकर घर जाना पड़ रहा है।
-जोगड़ी, धामनी कटारा

बाजार में बिक रही सब्जी
हम गरीब लोग हैं साहब बाजार में सब्जियां बिक रही है और हमारी दुकान है यहां अनाज मंडी में लगा दी है तो हमसे सब्जी कौन लेगा। पारती, भोड़ली
&मेरी ड्यूटी पिटोल बार्डर लगा रखी है। मैं सीएमओ को बोलता हूं वह देखते हैं। बाज़ार में फ ल-सब्जी दुकानें लगी हैं। उसे हटवा देते हैं।
- रविन्द्र चौहान, तहसीलदार

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