घर बने 2016 में, नपा ने टैक्स के नोटिस दिए २००५ से

घर बने 2016 में, नपा ने टैक्स के नोटिस दिए २००५ से

Arjun Richhariya | Publish: Dec, 08 2018 09:32:51 PM (IST) | Updated: Dec, 08 2018 09:32:52 PM (IST) Jhabua, Jhabua, Madhya Pradesh, India

लोक अदालत : जलकर, संपत्ति कर का नपा में लेखा-जोखा नहीं, लोगों ने जताई आपत्ति, जज ने कलेक्टर व सीएमओ को बुलाने के दिए आदेश

झाबुआ. नगर पालिका ने एक और कारनामा करते हुए उन घरों के मालिकों को टैक्स भरने का नोटिस थमा दिया, तब वे घर बने ही नहीं थे। जिसे लेकर लोक अदालत में शनिवार दोपहर 12 बजे नगर पालिका के स्टॉल पर 200 से अधिक घरों के मालिक जुटे और आपत्ति जताई। जिसे लेकर न्यायाधीश एके तिवारी ने तत्काल कलेक्टर और सीएमओ को यहां पर बुलाने के आदेश दिए। यह लोग पुरानी हाउसिंग बोर्ड, नई हाउसिंग बोर्ड, लक्ष्मी नगर एवं सुखदेव विहार कॉलोनी के थे । अपने-अपने काम छोडक़र यहां पहुंचे लोग सीएमओ एमआर निगवाल की अनुपस्थिति और नगरपालिका कर्मचारियों के गैर जिम्मेदाराना रवैये पर भडक़ गए। अपने साथ पुराने जलकर, संपत्ति कर एवं अन्य रसीद लेकर पहुंचे थे। जिनका नगर पालिका के कम्प्यूटर में कोई लेखा-जोखा नहीं था। इस त्रुटि के कारण लगभग दो सौ परिवार के मुखिया परेशान होते रहे। काफी गहमागहमी के बाद लोगों और कर्मचारियों में तीखी बहस होने लगी।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके तिवारी ने नगरपालिका कर्मचारियों को सीएमओ को बुलवाने एवं कलेक्टर को सूचना देने के लिए आदेश दिया। उन्होंने यहां उपस्थित आक्रोशित लोगों को समझाइश देते हुए मामले का निराकरण करने की बात कही। तब जाकर लोग शांत हुए।
50 लाख का क्लेम अवॉर्ड पारित
एडवोकेट सौरभ सक्सेना ने बताया कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के तहत 2 जनवरी 2016 में आयशर वाहन से टकराने पर भगोर के प्राचार्य निसार उद्दीन अंसारी का निधन हो गया था। इसका प्रकरण न्यायालय में चल रहा था। लोक अदालत के माध्यम से श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा पीडि़त परिवार की मुखिया बदरुन्नीसा, अजहरुद्दीन, अबूबका एवं रजिया के पक्ष में 50 लाख रुपए देने पर समझौता हुआ।

सडक़-पानी नहीं, हजारों रुपए वसूला टैक्स
यहां पहुंचे दो सौ से अधिक लोगों में से शरत शास्त्री, विजय नायर, हेमलता गहलोत, अनीता जाटव, नूरानी बामनिया , लालसिंह बामनिया, मोहिनी गिदवानी ने बताया कि नगरपालिका के 220 प्रकरण में जलकर एवं संपत्ति कर के 170 प्रकरण हाउसिंग बोर्ड एवं सुखदेव विहार कॉलोनी के लोगों को दिए थे। यहां रह रहे लोगों को 20 से 25 वर्षों से सडक़ पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया। इसके बाद भी समय-समय पर सभी लोगों द्वारा जलकर संपत्ति कर का भुगतान किया, लेकिन नगर पालिका के कम्प्यूटर में त्रुटि होने के कारण जिन लोगों ने बकाया राशि का भुगतान कर दिया है उनके पास भी मूल राशि सहित पेनॉल्टी के रुपए वसूलने के नोटिस भेजे गए। लोगों ने 2016 में मकान बनाया और उनके नाम पर 2011 से बकाया राशि के हजारों रुपए के नोटिस भेजे गए। 2005 से यहां पर जलप्रदाय नहीं किया जा रहा, फिर भी भारी भरकम बिल थमाया जा रहे हैं। इसको लेकर आक्रोशित लोग यहां पहुंचे। जब उन्होंने रसीद दिखाई और कम्प्यूटर में एंट्री होने की बात पूछी तब नगरपालिका कर्मचारी जवाब नहीं दे सके। वहीं नगरपालिका के सीएमओ छुट्टी मना रहे थे। यह देखकर लोगों का गुस्सा भडक़ गया। न्यायाधीश के हस्तक्षेप के बाद सीएमओ लोक अदालत पहुंचे।

सिविल मामलों में समझौता ही न्याय का अच्छा पहलू
&लोक अदालत द्वारा किए जा रहे समझौते बिल्कुल व्यवहारिक होते हैं। इसमें दोनों पक्षों को न्याय मिल रहा है। सिविल मामलों में समझौता ही न्याय का सबसे अच्छा पहलू माना जाता है। झाबुआ न्यायालय में 3761 मामले हैं। इसमें से 24 सौ मामले में राजीनामा से संबंधित हैं। लोक अदालत द्वारा कम समय में ज्यादा मामले का हल हो चुका है। इस कारण लोक अदालत पर लोगों का विश्वास बढ़ा है।
एके तिवारी, न्यायाधीश।

कॉलोनीवासियों की समस्या सुनी जाएंगी
&लोगों की समस्या देखते हुए और तकनीकी त्रुटियों के चलते कॉलोनीवासियों के साथ में अगले शनिवार को खुली सभा रखी जाएगी। वहां कॉलोनी वासियों की समस्या सुनी जाएगी एवं उनका निराकरण करने की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
-मंशाराम निगवाल, सीएमओ, नगरपालिका झाबुआ

गिने-चुने किसान पहुंचे
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की सरकार बनने के बाद कर्ज माफी की घोषणा का असर लोक अदालत में देखने को मिला। विभिन्न बैंक के स्टाल लगे थे। ग्रामीण बैंक द्वारा जिन किसानों को नोटिस भेजा था। इसमें से एक भी किसान नहीं पहुंचने से लोक अदालत में एक भी मामले का समाधान नहीं हुआ। बैंक ऑफ बड़ौदा में 30 से अधिक मामलों का समझौता हुआ। मुख्य शाखा प्रबंधक सुरेंद्र सिंह लाठर ने बताया कि जिलेभर से 30 किसानों ने तीन लाख रुपए के लगभग पैसा जमा किया है। बैंक ने एकमुश्त कजऱ् जमा करने पर ब्याज की राशि में छूट देने का निर्णय लिया, लेकिन किसानों ने ध्यान नहीं दिया।

MP/CG लाइव टीवी

Ad Block is Banned