टोल नाके पर सैकड़ों बसें खड़ीं, फिर भी प्रवासी मजदूरों को ट्रकों से भेज रहे जिम्मेदार

सवारियां बसों में बैठ जाती हैं, उन्हीं सवारी को उतारकर जबरदस्ती ट्रकों में भेजे जाने के प्रयास किए जाते हैं

By: kashiram jatav

Published: 16 May 2020, 10:53 PM IST

पिटोल. मप्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित उनके घर भेजने के लिए करोड़ रुपया खर्च कर पिटोल बॉर्डर पर उनके लिए समुचित व्यवस्था बनाई है, परंतु थोड़े दिन तक तो व्यवस्था ठीक चली, लेकिन विगत 4 दिनों से पिटोल बॉर्डर पर अब अव्यवस्थाएं बढ़ गई हैं। जहां आरटीओ परिसर में चारों तरफ गंदगी हो गई है। वहीं प्रवासी मजदूर अपने गंतव्य तक जाने के लिए प्रशासनिक अव्यवस्था का शिकार होकर जान जोखिम में डालने को मजबूर है।

बसों द्वारा ले जाने के लिए सैकड़ों की संख्या में पिटोल चेक पोस्ट पर बसें खड़ी की गई हैं। जिले के मजदूरों को भेजने के लिए तूफ ान जीप गाड़ी की व्यवस्थाएं की गई, परंतु झाबुआ के मजदूर बहुत ही कम संख्या में आए, भिंड, मुरैना ,सीधी, रीवा, सतना, शहडोल , सिंगरौली आदि दूरस्थ जिलों की प्रवासी मजदूर हजारों की संख्या में आए और उन्हें उनके गृह जिले तक पहुंचाने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, परंतु विगत 4 दिनों से शाम 4 बजे के बाद बसों की बजाय ट्रकों में भेजा जा रहा है। जो अधिकारी इस पूरी कार्ययोजना के जिम्मेदार है।
वहीं ट्रक ड्राइवर को धौंस डपट और डंडे के दम पर सवारियां ट्रक बैठा कर भेज रहे हैं। जबकि आरटीओ चेक पोस्ट पर हमेशा सैकड़ों बसें खड़ी होती हैं। जो सवारिया बसों में बैठ जाती है, उन्हीं सवारी को उतारकर जबरदस्ती ट्रकों में भेजने के प्रयास किए जाते हैं , कई महिलाएं गर्भवती होती है, छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी होते हैं।
दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे
प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र, गुजरात , प्रदेश के अन्य जिलों से उप्र, बिहार जा रहे हैं। कहीं न कहीं दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं । बीती रात्रि में औरैया में दो ट्रकों की दुर्घटना होने से 24 यात्रियों की मौत हो गई वहीं मप्र के सागर जिले में सडक़ दुर्घटना में 5 मजदूरों की मौत हो गई। ये सभी मौजूद ट्रक से यूपी और बिहार जा रहे थे। वही पिटोल बॉर्डर पर बसों का ऑपरेटरों की बेईमानी का धंधा भी चालू है। यहां पर बड़े ऑपरेटरों को प्राथमिकता दी जाती है और छोटे बस मालिकों के साथ भेदभाव किया जाता है। एक ही रूट की तीन बसें होती हैं। पेट्रोल-डीजल डीजल भरवाने के बाद कुछ किमी आगे जाकर तीन बसों की सवारियां दो बसों में शिफ्ट कर एक बस वापस आ जाती है। कल दोपहर एक बार एमपी 11 पी 2020 पिटोल बॉर्डर से सीधी जिले के लिए भरी गई। इसमें ड्राइवर ने डीजल भरा कर ड्राइवर ने सभी सवारी को पेट्रोल पंप पर उतार दिया। इस पर प्रशासनिक अमले ने कार्रवाई की। पूर्व में गुजरात से आने वाली बसों द्वारा भी इन प्रवासी मजदूरों का शोषण किया गया। परमिट कहां का बना होता है और पिटोल बॉर्डर खाली करके चले जाते हैं। जिस पर भी पिटोल बॉर्डर पर कार्रवाई की गई, परंतु सवाल यह है कि सरकार द्वारा इतना खर्च करने के बावजूद लोग ट्रकों में जाएंगे और अपनी जान जोखिम में डालेंगे।

&सभी को सुविधाजनक स्थिति में भेजने का प्रयास कर रहे हैं। बसें वहां खड़ी हैं। बसों से ही भेज रहे हैं। यदि ट्रकों में भेजा जा रहा है तो दिखवा लेता हंू।

-अभय खराड़ी, एसडीएम, झाबुआ

kashiram jatav
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned