कल्याणपुरा में जिनालय ने आकार लिया

गुरुदेव आचार्यश्री जयानंद सूरीश्वर के सान्निध्य में आज से पंचाह्निका अंजनश्लाका प्रतिष्ठा महोत्सव

झाबुआ. पारा निवासी 85 वर्षीय संघवी वालीबाई सागरमल छाजेड़ के मन में एक भव्य जिनालय का निर्माण कराने की इच्छा थी। जब आचार्यश्री जयानंदसूरीश्व के स?मुख उन्होंने अपनी यह इच्छा जाहिर की तो गुरुदेव ने कहाकि ऐसे किसी गांव में जिनालय का निर्माण कराओ जहां समाज के लोग रहते हो, लेकिन मंदिर नहीं बना हो। इस तरह कल्याणपुरा के पहले जिनालय ने आकार लिया।

यहां जैन समाज के 21वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ की प्रतिमा की प्रतिष्ठा की जाएगी। संघवी वालीबाई शुरू से ही धार्मिक प्रवृत्ति की महिला है। उन्होंने अपना पूरा जीवन व्रत-उपवास और तपस्या में व्यतीत किया। उनके मन में भाव आया कि क्यों न एक मंदिर का निर्माण कराया जाए। चूंकि आचार्यश्री जयानंदसूरीश्वर ने आदेश दिया था कि निर्माण ऐसी जगह करवाना जहां पहले से कोई मंदिर न बना हो। लिहाजा ऐसे कस्बे की तलाश शुरू की गई। पता चला कि कल्याणपुरा में जैन समाज के 50 परिवार रहते हैं, लेकिन यहां समाज का मंदिर नहीं है। इसलिए कल्याणपुरा में मंदिर निर्माण करवाने का निर्णय लिया। इसके लिए करीब सवा साल पहले सदर बाजार में ढाई हजार वर्ग फीट जमीन खरीदी गई। फिर यहां मंदिर निर्माण शुरू किया गया। जो पूरा हो चुका है। आधे हिस्से में मंदिर और आधे हिस्से में उपाश्रय है। शुक्रवार से यहां आचार्यश्री जयानंदसूरीश्वर, मुनि भगवंत और साध्वीवृंद के सान्निध्य में 6 दिवसीय पंचाह्निका अंजनश्लाका प्रतिष्ठा महोत्सव शुरू होगा। इस दौरान प्रतिदिन सुबह साढ़े 9 से साढ़े 10 बजे तक गुरुदेव के प्रवचन होंगे। संपूर्ण महोत्सव के विधिकारक तिलोक कांकरिया (पारा) रहेंगे। वहीं सुवासरा के रमेशभाई एंड पार्टी द्वारा प्रतिदिन प्रभुजी की संगीतमय भक्ति की जाएगी।

पारा से पालीताणा तक पैदल संघ निकाल चुकी हैं वालीबाई-
संघवी वालीबाई सागरमल छाजेड़ वर्ष 2007 में पारा से पालीताणा तीर्थ तक पैदल संघ निकाल चुकी है। उन्हें संघवी की पदवी दी गई थी। इसके अलावा वे बड़ी तपस्या में वर्षीतप, उपध्यान, चौमासा, आयंबिल, एकासना, बियासना सहित अन्य तपस्या कर चुकी हैं। इसके अलावा वर्ष 2007 से लगातार हर वर्ष चौवियर छट करके सात यात्रा का आयोजन भी उनके द्वारा किया जा रहा है।

पंचाह्निका अंजनश्लाका प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत कब, क्या होगा
6 दिसंबर: प्रभुजी व गुरुदेव का नगर प्रवेश होगा।
7 दिसंबर: कुंभ स्थापना, दीप स्थापना के साथ ज्वारा रोपण होगा।
8 दिसंबर: नवग्रह पाटला पूजन, दस दिग्पाल पूजन, अष्टमंगल पूजन व मेहंदी रस्म की जाएगी।
9 दिसंबर: च्यवन एवं जन्मकल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। सिद्धचक्र विशस्थानक नंदावर्त पाटला स्थापना की जाएगी।
10 दिसंबर: दीक्षाकल्याणक के साथ वरघोड़ा निकलेगा। जलयात्रा व वेदी स्थापना की जाएगी।
11 दिसंबर: तड़के 6 बजे से अंजनश्लाका प्रभु प्रतिष्ठा की जाएगी।
12 दिसंबर: द्वार उद्घाटन किया जाएगा।

kashiram jatav
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