मजदूर नहीं मिलने से खेतों में सड़ रहे तरबूज और टमाटर

ढाई हजार हेक्टेयर में टमाटर व एक हजार हेक्टेयर में तरबूज बोया था

By: kashiram jatav

Published: 18 Apr 2020, 11:00 PM IST

पेटलावद. टमाटर और तरबूज की खेती यहां के किसान बड़ी मात्रा में करते हैं। इससे उनकी माली हालत में भी काफी सुधार हो रहा था, लेकिन इस वर्ष कोरोना वायरस के महामारी के चलते लॉकडाउन से किसानों को उपज का मुनाफा नहीं मिल रहा। टमाटर और तरबूज को तोडऩे के लिए मजदूर नहीं मिल रहे। किसान खुद थोड़ा तोड़ भी ले तो प्रशासन बाजार में नहीं लाने दे रहा। ऐसे में दोनों ही फसल खेतों में सड़ रही है।

क्षेत्र में तरबूज एक हजार हेक्टेयर में लगा है। तरबूज की खेती में कम लागत में अधिक मुनाफा होने के कारण क्षेत्र के किसानों का रुझान इन दिनों तरबूज की खेती की ओर अधिक बढ़ा। पिछले वर्षों में तरबूज की खेती कर किसानों ने अच्छा खासा मुनाफा कमाया, लेकिन इस वर्ष तरबूज का भाव 4 रुपए से लेकर 5 रुपए थोक में जा रहा है। क्षेत्र में सारंगी, रायपुरिया , करवड, बनी, रामनगर आदि क्षेत्रों के किसान ने तरबूज बोए थे।

किसान नारायण पिता अंबाराम पाटीदार निवासी सिमलावदा तहसील रतलाम ने इन दिनों पंथ-बोराली के किसान की खेती मुनाफे (एक फ़सल के लिए) रखकर तरबूज की खेती 8 बीघा मे सागर किंग प्लस (मल्चिंग लगाकर) के 30 हजार पौधे अंजड़ (बड़वानी) से लाकर लगाए थे। इसमें दवा, खाद मल्चिंग रेप आदि का खर्च अभी तक 3 लाख 50 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। इसके बाद तरबूज का फल तैयार होने के बाद अभी तक 220 क्विंटल थोक में 4 रुपए किलो के हिसाब से बाजार में बेचा जा चुका है। अभी भी खेत में लगभग 250 क्विंटल तरबूज निकालना बाकी है।

12 से 15 रुपए प्रति किलो खरीदने में तैयार थे
शुरुआती दौर में बाहर के व्यापारी उक्त माल को 12 से 15 रुपए प्रति किलो खरीदने में तैयार हो गए थे, लेकिन लॉकडाउन होने के कारण बाहर के व्यापारियों का आना-जाना बंद होने की वजह से बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। इसकी वजह से अब हमें उक्त तरबूज आसपास के गांव के लोगों को मात्र 4 या पांच रुपए किलो के भाव में तरबूज बेचना पड़ रहा है। यदि इस भाव में भी नहीं भेजे तो सभी माल खराब होने का खतरा बना हुआ है। इस वजह से कम भाव में भी मजबूरी में बेचना पड़ रहा है।

दो रुपए में भी खरीदने तैयार नहीं-
टमाटर तोडऩे के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। वहीं लॉकडाउन की वजह से थोड़ा बहुत तोड़ भी लें तो बाजार में बेचने नहीं आने दिया जा रहा। ऐसे में टमाटर खेतों में ही सड़ रहा है। यहां ढाई हजार हेक्टेयर में टमाटर की फसल लगी है। जिसे कोई दो रुपए में भी खरीदने तैयार नहीं है।

किसान सब्जी स्टोर करना नहीं जानते
&अधिकांश बड़े व्यापारियों ने फल सब्जी की खरीदी बंद कर रखी है। व्यापारी ४- 5 मई के बाद खरीदी की बात कह रहे हैं। गर्मी बढऩे से प सब्जी खराब होने का डर है। अधिकांश किसान सब्जी स्टोर करना नहीं जानते। ऐसे में उनकी उपज किलो 2 किलो में भी कोई नहीं खरीद रहा।

बालाराम पाटीदार, उन्नत किसान

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