नवजात को मां ने शौचालय में फेंका, टॉयलेट शीट में मुंह फंसने से दम घुटा, सिर्फ दिख रहा था पैर

नवजात को मां ने शौचालय में फेंका, टॉयलेट शीट में मुंह फंसने से दम घुटा, सिर्फ दिख रहा था पैर

Hussain Ali | Publish: Mar, 17 2019 04:37:50 PM (IST) Jhabua, Jhabua, Madhya Pradesh, India

मासूम नवजात को मां ने शौचालय में फेंका, टॉयलेट शीट में फंसा मुंह, सिर्फ दिख रहा था पैर, मौत

झाबुआ. जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बने फीमेल मेडिकल वार्ड के शौचालय में शनिवार सुबह एक नवजात का शव पड़ा मिला। उसका शरीर टॉयलेट शीट के अंदर था और केवल उलटा पैर बाहर नजर आ रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत होने की बात सामने आई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल स्तर पर जांच के लिए अलग से तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है।

जिला अस्पताल का फीमेल मेडिकल वार्ड एक कोने में स्थित है। अमूमन यहां छोटे बच्चे को लेकर कोई नहीं आता। शनिवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे स्वीपर सकीला प्रतिदिन की तरह शौचालय की सफाई करने पहुंची तो टॉयलेट शीट में बच्चे का पैर देखकर घबरा गई। उसने तत्काल वार्ड की प्रभारी सिस्टर कमला कटारा को जानकारी दी। सिस्टर ने सिविल सर्जन डॉ.आरएस प्रभाकर व डॉ. जितेंद्र बामनिया को अवगत कराया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। करीब 11.45 बजे पुलिसकर्मी पहुंचे और मौका पंचनामा बनाकर शव को बाहर निकाला। दोपहर में डॉ.जितेंद्र बामनिया व डॉ. सचिन बावनिया के दो सदस्यीय पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया।

ये तीन बातें आपको झकझोर देगी

1. इंसानियत शर्मसार : टॉयलेट शीट में बच्चे को इस तरह से डाला कि उसका मुंह और कमर पानी के अंदर था और केवल नाजुक सा उलटा पैर बाहर नजर आ रहा था।

2. बच्चे की मौत का कारण : वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जितेंद्र बामनिया ने बताया प्रारंभिक तौर पर बच्चे के दम घुटने से मौत होने की जानकारी सामने आई है।

3. समाज से छुपाना चाहती हो मां : अमूमन कोई मां बच्चे को तब फेंक देती है जब वह पालने में पूरी तरह असक्षम हो या फिर वह समाज को बच्चे के बारे में नहीं बताना चाहती हो।

जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित

शौचालय में बच्चा कहां से आया और कौन इसे डालकर गया यह पता करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें आरएमओ डॉ.सावनसिंह चौहान, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप चौपड़ा व मेटरन कमला कटारा को शामिल किया है। यह टीम प्रसूति वार्ड का सारा रिकॉर्ड खंगालने के साथ सीसीटीवी फुटेज के आधार पर भी बच्चे को छोडक़र जाने वाले का पता करेगी।

शिशु को अस्पताल में लगे पालने में छोड़ा जा सकता था

महिला एवं बाल विकास विभाग ने अस्पताल के मेन गेट पर ही एक पालना लगा रखा है। यहां बकायदा सूचना भी लिखी गई है कि यदि आप बच्चे को अपने साथ नहीं रखना चाहते हैं तो इस पालने में डालकर चले जाए। यदि नवजात को शौचालय में डालने की बजाय इस पालने में डाल दिया जाता तो बच्चे की जान बच जाती और उसे कोई अन्य परिवार गोद ले लेता।

रात में बंद कर देते हैं एक गेट

ट्रामा सेंटर में स्थित फीमेल मेडिकल वार्ड का एक गेट रात में बंद कर दिया जाता है। जबकि अस्पताल के अंदर वाला गेट खुला रहता है। संभवतया: रात में ही कोई शौच के बहाने से आया और नवजात को टॉयलेट शीट में फेंक दिया। इसके बाद पानी डालकर उसे बहाने का प्रयास भी किया होगा, लेकिन उसमें कामयाबी नहीं मिल सकी तो ऐसे ही छोडक़र चला गया। फीमेल मेडिकल वार्ड में सीसीटीवी कैमरे में नहीं लगे हैं। इससे पता चल सके कि कौन व्यक्ति ऐसा करके गया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे

फिलहाल मर्ग कायम कर लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल के रिकॉर्ड से यह भी पता किया जाएगा कि कौन महिला अपना बच्चा इस तरह से फेंक कर गई।
- एनएस रघुवंशी, टीआई, झाबुआ

24 घंटे के अंदर डिलेवरी हुई, मौत की वजह दम घुटना

शिशुकरीब 6 माह का है और 24 घंटे के अंदर ही प्री मैच्योर डिलेवरी हुई। संभवतया: उसे जिंदा टॉयलेट शीट के अंदर डाला होगा। क्योंकि दम घुटने से उसकी मौत हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई है।
- डॉ.जितेंद्र बामनिया, जिला अस्पताल, झाबुआ

यदि अच्छी केयर हो तो जिंदा रहता है प्री मैच्योर बच्चा

यदि बच्चा प्री मैच्योर है तो भी अच्छी देखभाल करने से वह जिंदा रह सकता है। हमारे एसएनसीयू में इसी तरह के केस आते हैं। बहुत कम मामलों में नवजात की मृत्यु होती है।
डॉ. सचिन बावनिया, शिशु रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल, झाबुआ

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