रेल परियोजना पर दोनों दलों का दावा, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और जलसंकट के निदान पर कोई नहीं कर रहा बात

रेल परियोजना पर दोनों दलों का दावा, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और जलसंकट के निदान पर कोई नहीं कर रहा बात

Arjun Richhariya | Updated: 28 Apr 2019, 10:38:54 PM (IST) Jhabua, Jhabua, Madhya Pradesh, India

चुनाव मौसम में राजनीति का पारा बढ़ा, दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों में जुबानी जंग तेज

झाबुआ. चुनाव मौसम में राजनीति का पारा धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस व भाजपा दोनों ही प्रमुख दलों की ओर से प्रचार के साथ जुबानी जंग तेज हो गई है। खास बात यह कि आदिवासी बहुल इस रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट दाहोद-इंदौर और छोटा-उदयपुर-धार रेल परियोजना के शिलान्यास से लेकर उनके प्रगति कार्य को लेकर दोनों ही दलों के प्रत्याशी अपनी सरकार का दावा कर रहे हैं, लेकिन पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और जलसंकट जैसे मुख्य मुद्दे पर कोई कुछ नहीं बोल रहा। ये चारों मुद्दे पूरी तरह गौण हैं। कांग्रेस व भाजपा के प्रत्याशी इन मुद्दों पर बात करने की बजाय आरोप-प्रत्यारोप में उलझे हैं।

चुनाव में नेताओं के इस तरह से बिगड़े बोल-
- 23 अप्रैल को कांग्रेस की नामांकन रैली से पूर्व हुई चुनावी सभा में सांसद प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया के बेटे डॉ. विक्रांत भूरिया ने भाजपा प्रत्याशी गुमानसिंह डामोर को हैंडपंप चोर बोलते हुए जनता से नारे लगवा दिए। वहीं एक कांग्रेस नेता ने तो नाम लिए बोला एक तरफ हमारे कांतिलाल भूरिया है तो दूसरी तरफ एक खूनी है। उसके हाथ खून से रंगे हैं। जवाब में भाजपा प्रत्याशी ने कानूनी कार्रवाई करने की बात कही। वे ये भी बोले कि-जनता को पता है कि चोर और खूनी कौन है। कांतिलालजी मुझे इतना बता दे कि कमल सिसौदिया के खून से किसके हाथ रंगे हैं और रतलाम के कांगे्रस नेता रामेश्वर अग्रवाल को आत्महत्या क्यों करना पड़ी। हमारे मामले में सब पाक साफ है। कोर्ट ने हमें निर्दोष घोषित किया है। ये कोर्ट से बड़े नहीं हो सकते।
-25 अप्रैल को भाजपा की चुनावी सभा में प्रत्याशी गुमानसिंह डामोर ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को दलाल करार देते हुए बोला-कांग्रेस की सरकार में हर मामले में तो दलाली हो रही है। इसके जवाब में कांग्रेस नेता डॉ.विक्रांत भूरिया ने बयान जारी कर कहा-आदिवासियों की परंपरा को दलाली की संज्ञा देने पर भाजपा प्रत्याशी माफी मांगे नहीं तो पूरा आदिवासी समाज सड़कों पर उतर आएगा। यदि 48 घंटे में माफी नहीं मांगते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- 25 अप्रैल को ही चुनावी सभा में भाजपा प्रत्याशी गुमानसिंह डामोर ने कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया के खिलाफ टिप्पणी की थी कि-सांसद कांतिलाल भूरिया की निगाह खराब है और कोई उन्हें अपने घर नहीं बुलाता। इस पर कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए उनकी टिप्पणी को असभ्य करार दिया।
-27 अप्रैल को कांग्रेस नेताओं ने एक बयान जारी कर कहा-भाजपा प्रत्याशी गुमानसिंह डामोर के खिलाफ लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की जांच चल रही है। साथ ही यह भी बोले कि कांच के घर में बैठकर पत्थर फेंकने की गलती न करें। ये उनकी बची इज्जत को भी मिट्टी में मिला देगा।

रेल परियोजना पर दोनों दलों का दावा-
दाहोद-इंदौर और छोटा उदयपुर-धार रेल परियोजना इस आदिवासी अंचल की जीवनरेखा साबित होगी। दोनों ही दल इन रेल परियोजनाओं पर अपना दावा कर रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया कहते हैं- यूपीए सरकार ने योजना का शिलान्यास किया था और लगातार दबाव बनाकर काम में तेजी लाए। वहीं भाजपा प्रत्याशी गुमानसिंह डामोर कहते हैं-यूपीए के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह ने 2011 में दोनों जिलों में रेल चलने की बात कही थी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। यह तो मोदी सरकार ने हर साल बजट में राशि का प्रावधान कर रेल परियोजना के लिए राशि प्रदान की। इससे आलीराजपुर में रेल की ट्रायल हो चुकी है और दाहोद से झाबुआ के बीच में भी काम चल रहा है।
ये हैं क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे लेकिन चुनाव में कोई जिक्र नहीं-
1. पलायन: पश्चिमी मप्र के आदिवासी अंचल के लिए ये सबसे बड़ा मुद्दा है। झाबुआ-आलीराजपुर जिले से हर साल करीब 2 लाख लोग रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों में पलायन कर जाते हैं, लेकिन दोनों प्रमुख दल कांग्रेस व भाजपा के प्रत्याशी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे हैं। किसी ने भी एक बार इस बात का जिक्र करना मुनासिब नहीं समझा। नहीं पलायन को रोकने के लिए ऐसी कोई प्रभावी योजना लाने की बात की जा रही है।
2. शिक्षा: शिक्षा के मामले में झाबुआ-आलीराजपुर दोनों जिले पिछड़े हैं। आलीराजपुर जिले की साक्षरता दर 37.2 प्रतिशत है। इसमें पुरुष साक्षरता दर 43.6 0 और महिलाओं की साक्षरता दर 31 प्रतिशत है। वहीं झाबुआ जिले की साक्षरता दर 44.45 प्रतिशत है। इसमें पुरुषों की साक्षरता दर 54.65 प्रतिशत तो महिलाओं की साक्षरता दर 34.65 प्रतिशत है। आज भी हजारों बच्चे शाला त्यागी है तो कई ऐसे भी जिन्होंने अब तक स्कूल का मुंह नहीं देखा।
3. स्वास्थ्य: स्वास्थ्य के क्षेत्र में दोनों जिले बेहद पिछड़े हैं। कहने को आलीराजपुर में एक जिला अस्पताल, 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 159 उप स्वास्थ्य केंद्र है। वहीं झाबुआ में एक जिला अस्पताल, 2 सिविल अस्पताल, 5 सामुदायिक स्वास्थ्य, 18 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 240 उप स्वास्थ्य केंद्र है। इसके बावजूद दोनों जिले के लोगों को उपचार के लिए सीमावर्ती गुजरात राज्य का रुख करना पड़ता है। गुजरात-राज्य परिवहन की राणापुर-दाहोद बस में तो अधिकांश मरीज ही सफर करते हैं।
4. जलसंकट: जिला मुख्यालय में प्रतिवर्ष जलसंकट की स्थिति है। नई पेयजल योजना का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। वर्तमान पेयजल योजना वर्ष 1970 में मात्र 6 हजार की आबादी के लिए बनी थी। आज आबादी 40 हजार से ऊपर पहुंच चुकी है। ऐसे में पेयजल आपूर्ति के लिए दो दिन में एक बार पानी सप्लाय किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात बेहद गंभीर है। ग्रामीण नदी की तलहटी में झिरी खोदकर पीने के पानी का इंतजाम करने को मजबूर है। उन तक साफ पानी पहुंचाने के लिए कोई बात नहीं की जा रही।

 

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