डेढ़ करोड़ की प्याऊ निजी!

झाबुआ की चार प्याऊ पक्की बनवाई गई थीं। इनकी भूमि की बाजार कीमत डेढ़ करोड़ रुपए है

By: Gitesh Dwivedi

Published: 16 Apr 2016, 11:43 PM IST

झाबुआ. जिला प्रशासन और नगर पालिका पानी मुहैया कराने के लिए कितनी सजक है इसका नमूना प्याऊ को देखकर मिल रहा है। झाबुआ की चार प्याऊ पक्की बनवाई गई थीं। इनकी भूमि की बाजार कीमत डेढ़ करोड़ रुपए है। गंभीर बात ये है कि प्याऊ तो बंद हो गई। साथ ही इन पर निजी कब्जा हो गया है। इससे राहगीरों को पानी मिलना बंद हो गया और सरकारी बेशकीमती जमीन भी
चली गई।
हर साल हजारों रुपए अस्थायी प्याऊ पर खर्च
बस स्टैंड की प्याऊ में वाटर कूलर भी लगा था। इसका कोई अता-पाता नहीं है। खास बात ये भी है कि नगर पालिका हर साल हजारों रुपए अस्थायी प्याऊ लगाने पर खर्च करती है। जगह-जगह टेंट लगाकर प्याऊ बनाती है। इसमें मटकों में पानी भरा जाता है। साथ ही एक कर्मचारी को इनमें बैठने की तनख्वाह देती है। वहीं पक्की प्याऊ को इस तरह भुला दिया कि वह निजी हो गईं।
इन प्याऊ की भूमि
पर कब्जा
बस स्टैंड पर मोहम्मद सेठ ने प्याऊ बनाकर दान दी थी। इसमें अब निजी गोदाम बना है। इस भूमि की बाजार कीमत 55 लाख रुपए है। बस स्टैंड पर ही 17 दुकान के पास प्याऊ थी। इसकी कीमत 55 लाख रुपए है। राजवाड़ा चौक पर सिलेक्शन के सामने प्याऊ में दुकान खुल गई। इस प्याऊ को बसंतीबाई लक्ष्मण सिंह ने दान किया था। इस जमीन की कीमत 30 लाख रुपए है। इसी तरह कालिका माता मंदिर के सामने, रामद्वारा परिसर में मिस्त्री की दुकान के पास प्याऊ थी। इसका बाजार भाव 10 लाख रुपए है। चारों प्याऊ पक्की और स्थायी बनवाई गई थीं।

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