दस साल से कर रहे इंतजार अब तक नहीं आई ट्रेन

अफसरों पर लेटलतीफी का आरोप

झाबुआ. झाबुआ को 2011 में मिलने वाली रेल लाइन अब तक बस कागजो पर ही दौड़ रही है। बजट स्वीकृत हुए लगभग 10 साल होने को है लेकिन इंतजार खत्म होने का नाम ही नही ले रहा है। तत्कालीन सरकार द्वारा झाबुआ दाहोद और धार उदयपुर रेल लाइन के लिए लगभग 250 करोड़ का बजट स्वीकृत किया जा चुका था लेकिन अभी तक योजना धरातल पर नही आ पाई है। मप्र के पश्चिम झाबुआ,धार,आलीराजपुर जिले के लोगों का रेल के लिये इंतजार कब खत्म होगा। रेल के साथ विकास का झुनझुना पकड़े क्षेत्र के लोग पिछले दस सालों से रेल आने का इंतजार कर रहे है लेकिन रेल्वे और राजस्व अधिकारियों की अनदेखी के चलते रेल पटरी पर आज तक नहीं आ सकी है। 8 फरवरी 2008 को तत्कालीन यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहनसिंह ने झाबुआ की हरिभाई की बावड़ी मैदान पर इंदौर दाहोद रेल परियोजना और छोटा उदयपुर व्हाया आलीराजपुर धार रेल परियोजना की आधार शिला रखते हुए कहा था कि 2011 तक रेल पटरी पर दौडऩे लगेगी। लेकिन दस वर्ष बीतने के बाद आज तक उक्त दोनों परियोजनाओं का रेल लाइन बिछाने का काम अत्यंत धीमी गति से चल रहा है। झाबुआ और धार के बीच अभी तक भूमि अधिग्रहण व मुआवजा वितरण का काम तक पूरा नहीं हो सका। झाबुआ दाहोद रेल लाइन के लिए 120 करोड़ रुपए और छोटा उदयपुर धार रेल लाइन के लिए 180 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, लेकिन फिर भी इन दोनों परियोजनाओं पर काम जितना तेजी से चलना चाहिए चल नहीं पा रहा है।
कछुवा गति से चल रहा काम
"दाहोद-इंदौर रेल लाइन का काम बिल्कुल कछुवा गति से चल रहा है। रेल लाओ महासमिति ने क्षेत्र के सांसद कांतिलाल भूरिया से भी मांग की है कि वह भी इस दिशा में प्रयास करें और उक्त परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करवाने में अपना येागदान दें।"
दिलीप सिंह वर्मा, महासचिव रेल लाओ महासमिति

अर्जुन रिछारिया Incharge
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