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कांग्रेस विधायक ने उठाया ऐसा मुददा, राज्यपाल मंगूभाई पटेल को पड़ा टोकना, जानिए क्या

झाबुआ आदिवासी बाहुल्य में क्षेत्र में फैल रही महामारी को लेकर राज्य पाल ने जाहिर की चिंता
राज्यपाल का झाबुला विजिट

झाबुआ

Published: February 24, 2022 05:59:36 pm

झाबुआ। सिकलसेल की रोकथाम के लिए अलीराजपुर और झाबुआ जिले में 6 माह के लिए पायलेट प्रोजेक्ट बनाया गया है। जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय दिवस पर की थी। अब इसकी समीक्षा के लिए झाबुआ आए राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने की। इसी दौरान कांगे्रस के विधायक कांतिलाल भूरिया ने पलायन के साथ अन्य मुद्दों पर बोलने लगे। उन्हे विषय से भटकता देख राज्यपाल को तीन बार टोकना पड़ा। इसके बाद भी भूरिया बोलते रहे तो राज्यपाल ने कहा ये अलग विषय है और इसके लिए हम अलग से बात करेंगे। अभी सिकलसेल पर बात हो रही है। तब जाकर भूरिया रुके।
वहीं राज्यपाल आलीराजपुर जिले के आंकड़े देखकर चकित रह गए। प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि आलीराजपुर में अब तक 11 हजार 656 लोगों की स्क्रीनिंग में से 2 हजार 337 लोग सिकलसेल पॉजिटिव पाए गए। ये कुल स्क्रीनिंग का 20 प्रतिशत है।

गंभीर यह स्थिति-
राज्यपाल ने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कोरोना जैसी महामारी 100 साल में आई थी और सिकलसेल उससे भी गंभीर बीमारी है। सारी दुनिया में ये बीमारी है और इसके पीडि़तों में 95 फीसदी आदिवासी समुदाय से है। यदि हम 100 बच्चों को भी बीमारी से बचाने में सफल हो गए तो समझ लेना कि मानव जीवन सफल हो गया।
The MLA raised such an issue, Governor Mangubhai Patel had to interrup
The MLA raised such an issue, Governor Mangubhai Patel had to interrup
राज्यपाल ने ७२ घंटे में दिया उपचार का आदेश
राज्यपाल मंगूभाई ने कहा झाबुआ-आलीराजपुर जिले में लक्षित समूह में करीब 56 हजार से अधिक गर्भवती हैं। ऐसे प्रयास किए जाए कि होने वाले बच्चे की तत्काल स्क्रीनिंग कर 72 घंटे के भीतर उसका उपचार शुरू कर दिया जाए ताकि उन्हें ज्यादा दर्द न सहना पड़े।
बैठक में नागपुर से आए नेस्को के राष्ट्रीय सचिव गौतम डोंगरे ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया उनकी 17 साल की बेटी और 12 साल का बेटा दोनो सिकलसेल से पीडि़त हैं। ये बीमारी बहुत पीड़ादायक है। इसके लिए नए मरीज के जन्म को रोकना होगा। उन्होंने बताया उनकी संस्था मप्र, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सिकलसेल पीड़ितों के लिए काम कर रही है। मरीजों के अलग अलग व्हाट्स एप ग्रुप बना रखे है। शाम 7 बजे सभी ग्रुप पर एक्टिव होते हैं जहां विशेषज्ञ चिकित्सक के जरिए उन्हें परामर्श दिया जाता है।

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