कार्ड में परिवार के सदस्यों का नाम नहीं जोडऩे से ग्रामीणों को नहीं मिल रहा राशन

खाद्य विभाग में शिकायत लेकर पहुंच रहें हैं, लेकिन यहां भी कोई निराकरण नहीं हो रहा है

झाबुआ. शासन गरीबों को कम कीमत में अनाज उपलब्ध कराने के कितने ही दावे कर ले, लेकिन जमीनी स्तर पर देखने से पता चलता है कि सच्चाई इन दावों से कोसों दूर है। सहकारी उचित मूल्य की दुकानों पर कई परिवारों को पर्याप्त राशन नहीं मिल रहा है। इस वर्ष फसलों पर मौसम की मार से किसानों के पास खाने के लिए भी पर्याप्त राशन नहीं बचा। राशन कार्ड में परिवार के सदस्यों का नाम नहीं जोडऩे से परिवार को वास्तविक सदस्य संख्या की तुलना में पर्याप्त राशन नहीं दिया जा रहा। वही एक परिवार को 1 साल से सरकारी उचित मूल्य की दुकान से राशन नहीं मिल रहा। परिवार खाद्य विभाग में शिकायत लेकर पहुंच रहें हैं, लेकिन यहां भी कोई निराकरण नहीं हो रहा।

छोटी डेबर में रहने वाले मजदूर राकेश पिता पांगला एवं उसकी पत्नी नमिता ने बताया कि 2 साल हो गए राशन कार्ड में नाम जोडऩा है। हमारे पांच बेटा बेटी हैं। इनमें से एक भी सदस्य का नाम राशन कार्ड में जुड़ा हुआ नहीं है। इस कारण पूरे परिवार को महज दो सदस्यों के हिसाब से राशन दिया जा रहा है। जो कि 7 जनों के परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है। जबकि पांचों बच्चों जिसमें 10 साल की सुगना, 9 साल की सारंगी, 6 साल का कर्ण, 4 साल की रजीना एवं 3 साल के सुभाष के आधार कार्ड समग्र आईडी बनकर तैयार है। इसके लिए 2 साल पहले स्कूल पर मंत्री को 5 जनों के नाम जोडऩे के लिए 510 रुपए दिए थे। बड़ी ढेबर की स्कूल में आधार कार्ड एवं समग्र आईडी बनाते समय नाम जोडऩे के लिए 30 रुपए दिए थे, लेकिन अभी तक परिवार का नाम नहीं जुड़ा। पूरे परिवार के सदस्यों के लिए खाद्य सामग्री देने के बदले में पात्रता पर्ची लाने के लिए कहा गया जब पात्रता पर्ची बनाने के लिए खाद्य विभाग पहुंचे तो वहां भी दौड़ाया जा रहा है। कंट्रोल में अंगूठा नहीं लगने के कारण भी राशन नहीं दिया जाता।

एक साल से राशन नहीं दिया जा रहा-
बड़ी करड़ावद के रहने वाले गंगजी पिता तातरिया डामोर अपनी पत्नी भुंद्री एवं 12 वर्ष के पुत्र विनोद को लेकर कलेक्टर कार्यालय खाद्य विभाग में पात्रता पर्ची बनवाने एवं विनोद का नाम समग्र आईडी में जोडऩे के लिए पहुंचे। यहां पात्रता पर्ची बनाकर नहीं दी। विनोद का नाम समग्र आइडी में जुड़ सका। इसके बाद भुंद्री ने बताया परिवार में 22 वर्षीय राकेश उसकी 20 वर्षीय पत्नी कर्मा एवं उसकी 5 माह की लड़की ममता के साथ 21 वर्षीय नानू डामोर, 14 वर्षीय नानी , 12 वर्ष का विनोद, 8 वर्ष का कालिया, 6 वर्ष की मंगली सहित कुल 9 लोग रहते हैं। 1 साल से हमें राशन नहीं दिया जा रहा है। कंट्रोल दूसरे फलिए में हैं। वहां अनाज लेने जाने पर कंट्रोल संचालक कहता है कि तुम्हारे नाम से कंट्रोल में अनाज नहीं आता है। इसलिए तुम पात्रता पर्ची लेकर आओ। विनोद का नाम राशन कार्ड में नहीं है। 1 वर्ष से बनिए के यहां से ऊंचे भाव में राशन खरीद रहे हैं।

मजदूरी करके गुजारा-
इस वर्ष जिले में बारिश के कारण खेती में भी नुकसान हुआ है । ग्रामीणों के आधे सदस्य मजदूरी करके गुजारा करने को मजबूर है, लेकिन अधिकारी मजबूरी समझने की बजाय टालमटोल कर रहे हैं। अनाज नहीं मिल रहा खाद्य विभाग पात्रता पर्ची बनाने की जगह चक्कर लगवा रहा।

सारे काम पंचायत स्तर पर पूरे हो रहे
पात्रता पर्ची हमारे यहां नहीं बनती। पंचायत से मिलना चाहिए , जिन लोगों के बारे में आप बोल रहे हो उनकी समग्र आईडी बनी है। समग्र आईडी पर पात्रता पर्ची नहीं दी जा सकती। शासन ने कुछ कैटेगरी बनाई है। जिस संस्था से समग्र आईडी बनती है। वहीं संस्था समग्र पोर्टल में संबंधित व्यक्ति की श्रेणी की इंट्री करता है। जो इन श्रेणियों के हिसाब से पात्र होगा। वह ऑनलाइन दिखाई देगा। अलग-अलग स्थानों पर रहने वाले लोगों के लिए जनपद से या पंचायत स्तर से इंट्री डालने के बाद एक माह बाद पोर्टल पर प्रदर्शित होने लगता है। आजकल सब ऑनलाइन होता है। सारे काम पंचायत स्तर पर ही पूरे हो रहे हैं।
-एमके त्यागी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी

kashiram jatav
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