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- स्क्रब टाइफस से अभी तक जिले में 6 लोगों की मौत


- स्क्रब टाइफस के मरीजों का आंकड़ा 600 के पार पहुंचा

झालावाड़. जिले में स्क्रब टाइफस बीमारी के कई मामले सामने आ रहे हैं। पिस्सुओं के काटने से होने वाली इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह खुद तो संक्रामक नहीं लेकिन इसकी वजह से शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है। ऐसे में मरीज को तुरंत प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है। जिले में डेंगू और स्क्रब टाइफस,मलेरिया आदि के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गुरूवार को जिले में एक ही दिन में 12 मरीज स्क्रब टाइपस के सामने आ चुके हैं। अभी तक की बात करें तो टाइपस के मरीजों की संख्या 600 के पार पहुंच चुकी है। तो टाइपस से जिले में 6 लोगों की मौत हो चुकी है। सर्दी बढऩे के साथ ही डेंगू ,सर्दी-जुखाम, मलेरिया आदि के मरीजों की संख्या बढ़ गई है इन दिनों चिकित्सालय में 2800-2900 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। हालांकि चिकित्सा विभाग हर मौहल्ले व गली में फिगिंग कराने का दावा कर रहा है। इसके बावजूद चिकित्सा विभाग स्क्रप टाइफस के रोग पर काबू पाने में विफल साबित हो रहा है।

जिले में 1 जनवरी से 28 नवम्बर तक पॉजीटिव मरीजों की संख्या व मृत्यु
बीमारी संख्या मृत्यु
डेंगू 147 00
मलेरिया 166 1
स्वाइन फ्लू 65 7
स्कब टाइपस 610 6

अक्टूबर माह में मरीजों की संख्या-
ओपीडी- 65766
आईपीडी- 7385
- प्रतिदिन मरीजों की संख्या- 2800-2900

ऐसे फैलता है स्क्रब टाइफस-
ये रोग पिस्सू के काटते ही उसके लार में मौजूद एक खतरनाक जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मनुष्य के रक्त में फैल जाता है। सुसुगामुशी दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है सुसुगारू छोटा व खतरनाक और मुशी मतलब माइट। इसकी वजह से लिवर,दिमाग व फेफड़ों में कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं और मरीज मल्टी ऑर्गन डिसऑर्डर के स्टेज में पहुंच जाता है। इन्हें Óयादा खतरा,पहाड़ी इलाके,जंगल और खेतों के आस-पास ये पिस्सू Óयादा पाए जाते हैं। लेकिन शहरों में भी बारिश के मौसम में जंगली पौधे या घने घास के पास इस पिस्सू के काटने का खतरा रहता है।

ऐसे करें इलाज-
लक्षण व पिस्सू द्वारा काटने के निशान को देखकर रोग की पहचान होती है। ब्लड टेस्ट के जरिए सीबीसी काउंट व लिवर फ्ंकशनिंग टेस्ट करते हैं। एलाइजा टेस्ट व इम्युनोफ्लोरेसेंस टेस्ट से स्क्रब टाइफस एंटीबॉडीज का पता लगाते हैं। इसके लिए 7-14 दिनों तक दवाओं का कोर्स चलता है। इस दौरान मरीज कम तला-भुना व लिक्विड डाइट लें। कमजोर इम्युनिटी या जिन लोगों के घर के आसपास यह बीमारी फैली हुई है उन्हें डॉक्टर हफ्ते में एक बार प्रिवेंटिव दवा भी देते हैं।

ये बीमारी के लक्षण-
चिकित्सकों ने बताया कि पिस्सू के काटने के दो हफ्ते के अंदर मरीज को तेज बुखार,102-10& डिग्री फॉरेनहाइट, सिरदर्द,खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है। पिस्सू के काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान दिखता है। इसका समय रहते इलाज न हो तो रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले सकता है। कुछ मरीजों में लिवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाते जिससे वह बेहोशी की हालत में चला जाता है। रोग की गंभीरता के अनुरूप प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है। ऐसे में जिले में समय रहते इस बीमारी पर रोकथाम जरुरी है। साथ ही मेडिकल कॉलेज में एसडीपी मशीन की भी खासी जरूरत महसूस की जा रही है।

साधारण इलाज है-
स्क्रब टाइफस में मरीज को तेज बुखार आता है, सिर दर्द होता है। मरीज को Óयादा समय तक बुखार आता है तो उपचार देर से लेता है तो ये रोग लीवर, गुर्दे, आदि को प्रभावित करता है। इसका समय से इलाज लेना चाहिए साधारण उपचार है 5- 7 दिन में मरीज सही हो जाता है।
डॉ. आरएन मीणा, वरिष्ठ फिजीशियन, मेडिकल कॉलेज व एसआरजी चिकित्सालय,झालावाड़।

जैसे ही स्क्रब टायफस का कोई भी केस कहीं से भी आता है, तो उस क्षेत्र में वेटनेरी विभाग के माध्से से फोगिंग करवाई जाती है। आशा सहायोगिनी सहित स्टाफ को सतर्क कर रखा है , कहीं भी फोड़े- फँुसी आदि का मरीज संपर्क में आता है तो उसे निकट के चिकित्सालय में दिखाने के निर्देश दे रखे हैं, डेंगू सहित बीमारियां कंट्रोल में है।
डॉ. साजिद खान, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, झालावाड़

- स्क्रब टाइफस से अभी तक जिले में 6 लोगों की मौत
- स्क्रब टाइफस के मरीजों का आंकड़ा 600 के पार पहुंचा

झालावाड़. जिले में स्क्रब टाइफस बीमारी के कई मामले सामने आ रहे हैं। पिस्सुओं के काटने से होने वाली इस बीमारी में भी डेंगू की तरह प्लेटलेट्स की संख्या घटने लगती है। यह खुद तो संक्रामक नहीं लेकिन इसकी वजह से शरीर के कई अंगों में संक्रमण फैलने लगता है। ऐसे में मरीज को तुरंत प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है। जिले में डेंगू और स्क्रब टाइफस,मलेरिया आदि के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गुरूवार को जिले में एक ही दिन में 12 मरीज स्क्रब टाइपस के सामने आ चुके हैं। अभी तक की बात करें तो टाइपस के मरीजों की संख्या 600 के पार पहुंच चुकी है। तो टाइपस से जिले में 6 लोगों की मौत हो चुकी है। सर्दी बढऩे के साथ ही डेंगू ,सर्दी-जुखाम, मलेरिया आदि के मरीजों की संख्या बढ़ गई है इन दिनों चिकित्सालय में 2800-2900 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। हालांकि चिकित्सा विभाग हर मौहल्ले व गली में फिगिंग कराने का दावा कर रहा है। इसके बावजूद चिकित्सा विभाग स्क्रप टाइफस के रोग पर काबू पाने में विफल साबित हो रहा है।

जिले में 1 जनवरी से 28 नवम्बर तक पॉजीटिव मरीजों की संख्या व मृत्यु
बीमारी संख्या मृत्यु
डेंगू 147 00
मलेरिया 166 1
स्वाइन फ्लू 65 7
स्कब टाइपस 610 6

अक्टूबर माह में मरीजों की संख्या-
ओपीडी- 65766
आईपीडी- 7385
- प्रतिदिन मरीजों की संख्या- 2800-2900

ऐसे फैलता है स्क्रब टाइफस-
ये रोग पिस्सू के काटते ही उसके लार में मौजूद एक खतरनाक जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी मनुष्य के रक्त में फैल जाता है। सुसुगामुशी दो शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है सुसुगारू छोटा व खतरनाक और मुशी मतलब माइट। इसकी वजह से लिवर,दिमाग व फेफड़ों में कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं और मरीज मल्टी ऑर्गन डिसऑर्डर के स्टेज में पहुंच जाता है। इन्हें ज्यादा खतरा,पहाड़ी इलाके,जंगल और खेतों के आस-पास ये पिस्सू ज्यादा पाए जाते हैं। लेकिन शहरों में भी बारिश के मौसम में जंगली पौधे या घने घास के पास इस पिस्सू के काटने का खतरा रहता है।

ऐसे करें इलाज-
लक्षण व पिस्सू द्वारा काटने के निशान को देखकर रोग की पहचान होती है। ब्लड टेस्ट के जरिए सीबीसी काउंट व लिवर फ्ंकशनिंग टेस्ट करते हैं। एलाइजा टेस्ट व इम्युनोफ्लोरेसेंस टेस्ट से स्क्रब टाइफस एंटीबॉडीज का पता लगाते हैं। इसके लिए 7-14 दिनों तक दवाओं का कोर्स चलता है। इस दौरान मरीज कम तला-भुना व लिक्विड डाइट लें। कमजोर इम्युनिटी या जिन लोगों के घर के आसपास यह बीमारी फैली हुई है उन्हें डॉक्टर हफ्ते में एक बार प्रिवेंटिव दवा भी देते हैं।

ये बीमारी के लक्षण-
चिकित्सकों ने बताया कि पिस्सू के काटने के दो हफ्ते के अंदर मरीज को तेज बुखार,102-103 डिग्री फॉरेनहाइट, सिरदर्द,खांसी, मांसपेशियों में दर्द व शरीर में कमजोरी आने लगती है। पिस्सू के काटने वाली जगह पर फफोलेनुमा काली पपड़ी जैसा निशान दिखता है। इसका समय रहते इलाज न हो तो रोग गंभीर होकर निमोनिया का रूप ले सकता है। कुछ मरीजों में लिवर व किडनी ठीक से काम नहीं कर पाते जिससे वह बेहोशी की हालत में चला जाता है। रोग की गंभीरता के अनुरूप प्लेटलेट्स की संख्या भी कम होने लगती है। ऐसे में जिले में समय रहते इस बीमारी पर रोकथाम जरुरी है। साथ ही मेडिकल कॉलेज में एसडीपी मशीन की भी खासी जरूरत महसूस की जा रही है।

साधारण इलाज है-
स्क्रब टाइफस में मरीज को तेज बुखार आता है, सिर दर्द होता है। मरीज को ज्यादा समय तक बुखार आता है तो उपचार देर से लेता है तो ये रोग लीवर, गुर्दे, आदि को प्रभावित करता है। इसका समय से इलाज लेना चाहिए साधारण उपचार है 5- 7 दिन में मरीज सही हो जाता है।
डॉ. आरएन मीणा, वरिष्ठ फिजीशियन, मेडिकल कॉलेज व एसआरजी चिकित्सालय,झालावाड़।

जैसे ही स्क्रब टायफस का कोई भी केस कहीं से भी आता है, तो उस क्षेत्र में वेटनेरी विभाग के माध्से से फोगिंग करवाई जाती है। आशा सहायोगिनी सहित स्टाफ को सतर्क कर रखा है , कहीं भी फोड़े- फँुसी आदि का मरीज संपर्क में आता है तो उसे निकट के चिकित्सालय में दिखाने के निर्देश दे रखे हैं, डेंगू सहित बीमारियां कंट्रोल में है।
डॉ. साजिद खान, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, झालावाड़

harisingh gurjar Reporting
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