हादसों के कारक अंधे मोड़

जयपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग बारह पर अंधे मोड़ हादसों का कारण बन रहे हैं।  शहर से करीब चार

By: मुकेश शर्मा

Published: 10 Apr 2016, 11:49 PM IST

झालावाड़।जयपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग बारह पर अंधे मोड़ हादसों का कारण बन रहे हैं।  शहर से करीब चार किलोमीटर दूर झिरनिया के समीप का अंधा मोड़, इसी तरह  कोकंदा के समीप एक अन्य और समेत सुकेत मार्ग पर देवरीघटा से अंदर जाते समय  अंधे मोड़ लोगों के लिए हादसों का कारण बन रहे हंै। पिछले एक वर्ष के दौरान अकेले झिरनिया के समीप स्थित अंधे मोड़ पर करीब आधा दर्जन हादसों में पांच लोग जान गंवा चुके जबकि आधा दर्जन से अधिक घायल           हो चुके।

नहीं बना रहे प्रस्ताव

राष्ट्रीय राजमार्ग बारह पर सुकेत से झालावाड़ आते समय करीब तीन मोड़ों की घूम सही करने के लिए अभियंताओं ने करीब तीन वर्ष पूर्व प्रस्ताव बनाए थे लेकिन ये प्रस्ताव कागजों तक सीमित रह गए।न ये आगे बढ़े, न ही इन पर अमल हुआ। उधर, ये मोड़ अपनी फितरत के मुताबिक लगातार आमजन के रक्त-पिपासु बने हुए हैं।  

वाहनों का भी बढ़ रहा दबाव

राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार वाहनों का दबाव बढ़ रहा है। वाहनों को निकलने में भी परेशानी होती है।  झालावाड़ शहर के बीच से गुजर रहे इस राजमार्ग पर रात-दिन भारी आवाजाही रहती है। हालांकि सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस मार्ग पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए बाईपास के प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भिजवा रखे हैं। इस पर कार्य होना शेष है।

शहर में भी...

शहर के बीच से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग पर मामा-भांजा चौराहा पर चार मार्ग एक साथ होने व इसी तरह झालरापाटन रोड़ पर जाते समय खंडिया चौपाटी पर चौराहा होने पर यहां वाहनों का दबाव अधिक रहता है।  खंडिया चौराहे से झालरापाटन जाते समय मार्ग पर दो जगह अंधे मोड़़ हैं। इसमें एक झालरापाटन बाइपास व एक असनावर रास्ते के दौरान पड़ता है। इस मार्ग पर दिन में कोई परेशानी नहीं है लेकिन रात के समय चौराहों पर चारों ओर से वाहन आने व दो मोड़ अंधे होने से परेशानी होती है।


अंधेरे में होते हैं हादसे

राष्ट्रीय राजमार्ग बारह पर रैन-बसेरा से सुकेत मार्ग पर ज्यादातर हादसे रात के वक्त ही होते हैं। यहां न तो कोई रिफ्लेक्टर लगे हैं ना ही रोशनी का प्रबन्ध है।  
    रात के समय पोल पर जलने वाली स्ट्रीट लाइट तक अधिकतर बंद रहती है।अधिकांश मर्तबा चौपहिया वाहनों की लाइट की चकाचौंध व मोड़ पर वाहनों की दशा ज्ञात नहीं होने के चलते ये हादसे का सबब बन जाते हंै। मोड़ों का सरलीकरण हादसों में रोकथाम का दिशा में मददगाार बन सकता है।  

 & राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंधे मोड़ बाइपास बनने के बाद स्वत: समाप्त हो जाएंगे। फिर भी अभी जिन मोड़ों पर अधिक परेशानी है उसको दिखवाते हैं।
 गिरीश जैन,अधिशासी अभियंता  राष्ट्रीय राजमार्ग बारह
मुकेश शर्मा Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned