पिता के बाद पुत्र निभा रहे रामलीला में भूमिका, देखें वीडियो...

Arun Tripathi

Updated: 02 Oct 2019, 04:55:40 PM (IST)

Jhalawar, Jhalawar, Rajasthan, India

अकलेरा. जहां एक ओर लोग सभ्यता और संस्कृति को भूलते जा रहे हैं वहीं क्षेत्र के सरड़ा में अभी भी लोगों ने लोक-संस्कृति को बचा रखा है। यहां 74 वर्षों से स्थानीय कलाकारों द्वारा शारदीय नवरात्र में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। आदर्श रामलीला कला मंडल जन कल्याण संस्थान सरड़ा अध्यक्ष मांगीलाल राठौर ने बताया कि सोमवार रात्रि को रामलीला शुरु हुई। प्रार्थना के बाद रामायण आरती, गजानंद महाराज की सजीव झांकी दिखाई। झांकी के बाद राम जन्म, ताड़का वध, मारिच-सुभाऊ वध की लीला का मंचन हुआ।
-इन पौराणिक विधाओं में किया जाता मंचन
मंडल अध्यक्ष मांगीलाल राठौर ने बताया कि कलाकारों द्वारा की जा रही इस रामलीला में शेर, तबिल, बेहरत, शायरी, वार्ता जैसी लुप्त होती जा रही पौराणिक विधाओं के साथ मंचन किया जाता है। इसके प्रेरणा स्त्रोत बद्री प्रसाद शर्मा हैं। उन्हीं की प्रेरणा से मंचन किया जा रहा है।
मंडल अध्यक्ष ने बताया कि रामलीला में पिता के बाद पुत्र भूमिका निभा रहे हैं। हरिशंकर विजय के पुत्र कस्टम अधिकारी संतोष, विजय, हनुमान लीलाधर बैरागी, पागल बाबा के पुत्र कजोड़ बैरागी, बाणासुर बालचंद सेन के पुत्र चौथमल सेन, सुमंत शोभाराम मेवाड़ा के पौत्र चेतन कुमार मेवाड़ा, गिद्धराज अध्यापक लालचंद बैरागी के पुत्र हर्षित बैरागी, ढोलक वादक गोपाल राव अपने पिता अमरलाल के बाद और हारमोनियम वादक उमाशंकर अपने भाई हनुमानसिंह के बाद, रोहित सुमन अपने पिता प्रकाश सुमन के बाद से लाइट डेकोरेशन, अंगद सहित कई पात्रों की भुमिका अब उनके पुत्रों द्वारा निभाई जा रही है।
-दूसरे शहरों से आते भुमिका निभाने
सरकारी सेवा व गैर सरकारी संस्थाओं में कार्यरत सरड़ा के मूल निवासी रामलीला में दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश और कोटा, जयपुर से अपने निजी कार्य को छोड़कर रामलीला में किरदार को निभाने और सहयोग करने के लिए आते हैं। मंडल अध्यक्ष ने बताया कि गुजरात से कस्टम अधिकारी संतोष विजय हनुमान की भूमिका, दिल्ली से ऋषभ कांत टेलर उर्फ अंकुर गायन, कोटा से प्रधानाध्यापक बद्री टेलर राम की भूमिका, रेडियोग्राफर एमआरआई इंचार्ज मेडिकल कॉलेज कोटा विनय टेलर गायन, गुजरात से डॉ. प्रियंका जोशी, कोटा से दिव्यांशु पारेता उर्फ विक्की तकनीकी सहयोग, जयपुर से हेमराज राठौर और पंजाब से भारतीय थल सेना सेनानायक चतुर्भुज राठौर भी रामलीला में सहयोग प्रदान करने आते हैं। वहीं रामलीला मंडल उपाध्यक्ष राधेश्याम रुहेला निदेशक,लालचंद बैरागी, मंच संचालक महावीर प्रसाद गोयल, कोषाध्यक्ष मांगीलाल टेलर, गोपाल पोटर, मुकेश शर्मा, देवीलाल टेलर, बजरंग लाल टेलर, चांदमल कारपेंटर, मुकेश कारपेंटर, उम्मेद रुहेला, हेमराज रुहेला, रमेश बैरागी, दिनेश शर्मा, नवीन विजय, मांगीलाल बैरागी, भगवान स्वरूप शर्मा आदि रामलीला में सहयोग कर रहे हैं।

राम जन्मोत्सव पर बरसी खुशियां
-रामलला के जयकारों से गूंजा पांडाल
झालरापाटन. नगरपालिका के तत्वावधान में दशहरा महोत्सव के तहत द्वारिकाधीश परिसर में आयोजित रामलीला में रात भगवान राम के जन्म के प्रसंगों का मंचन किया। भगवान के जन्म की खुशी में दर्शक दीर्घा रामलला के जयकारों से गंूज उठी। मध्यप्रदेश उज्जैन के महाकालेश्वर रामायण प्रचारक समिति के कलाकारों ने देश भक्ति एवं मातृ भूमि का अहसास कराने के साथ साथ राजस्थानी गीतों पर नृत्य के माध्यम से दर्शकों को राजस्थान की सैर कराई। कलाकारों ने भोला नहीं माने रे...,मचल गए नचने को...,भजन पर नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने हम फिदा जाने वतन साथियों..., गीत से देश भक्ति का जज्बा जगाया। इस पर दर्शकों ने तालियां बजाकर गायक का हौंसला बढ़ाया। राम जन्मोत्सव के दौरान पूरा पाण्डाल राम मय हो गया। कार्यक्रम में ऋषि मुनियों का आगमन, दशरथ दरबार, मारिक वध, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार प्रसंगों का सजीव मंचन किया। इसमें मुनि द्वारा सरयू नदी के तट पर राजा दशरथ के पुत्रेष्ठी यज्ञ कराने, ऋषि मुनियों गुरू वशिष्ठ के राजा दशरथ से राक्षसों से रक्षा व सहायता के लिए विनती कर बालक राम लक्ष्मण की मांग करने, राजा दशरथ द्वारा राम लक्ष्मण को गुरू वशिष्ठ को सौंपने, राम द्वारा मारिच का वध, ताड़का वध, पत्थर की अहिल्या का उद्धार देखकर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए।

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