जो बसें इंदौर- कोटा में कंडम घोषित हो चुकी वे झालावाड़ में स्कूली बच्चों को ले जा रही

Hari Singh Gujar

Updated: 17 Nov 2019, 12:20:36 PM (IST)

Jhalawar, Jhalawar, Rajasthan, India

हरिसिंह गुर्जर
झालावाड़.शहर के निजी व सरकारी स्कूलों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थी महफूज नही हैं। कारण है जिले के निजी व सरकारी स्कूलों में चल रही बालवाहिनीयों में छात्र खतरों भरा सफर कर रहे हैं। बालवाहिनीयों में बच्चों को क्षमता से अधिक ठसाठस भरा जा रहा है तो कई बसों की पूरी बॉडी कंपन्न कर रही है। तो कई में संचालकों द्वारा आवश्यक संसाधन की भी अनदेखी की जा रही है। शहर में कई बसे ऐसी है जो इंदौर, कोटा जैसे शहरों में चलने लायक नहीं रही ऐसी कंडम बसों को झालावाड़ लाकर चलाया जा रहा है।
इसके बावजूद जिम्मेदार सरकारी विभागों का इस ओर ध्यान नहीं है। शहर ही नहीं जिलेभर में स्कूलों में बच्चों को लोन व ले जाने के मामले में नियमों की पालना नहीं की जा रही है। इस ओर न तो स्कूल संचालकों का ध्यान है और न ही परिवहन विभाग व जिला प्रशासन का। ऐसे में बच्चों की जान को खतरा बना रहता है। जिलेभर में बेधड़क 237 बालवाहिनीयां दौड़ रही है, कई में नियमों को नहीं हो रहा पालन।

पत्रिका का रियलिटी चेक-
राजस्थान पत्रिका टीम ने शुक्रवार को केन्द्रीय विद्यालय व अन्य निजी विद्यालयों की बसों को चेक किया तो आवश्यक सूचना सहित सुरक्षा उपकरण नहीं मिले है। एक निजी विद्यालय की बस नंबर आरजे 20 पीए 2600 को चेक किया तो छात्र बस के गेट पर खड़े हुए नजर आए। कहीं भी स्कूल का मोबाइल नंबर लिखा हुआ नजर नहीं आया तो कोई परिचालक भी नहीं था। चार बच्चे गेट पर खड़े हुए थे। यही हाल एक अन्य बस आरजे 17 पीए 2377 का भी मिला। तो आरजे 17 पीए 1391 में भी बस की बॉडी जगह-जगह से डेमेज नजर आई। वहीं आरजे 1436 में भी कहीं नाम आदि नजर नहीं आया तो चाइल्ड लाइन व पुलिस कंट्रोल व स्कूल के टेलिफोन नंबर भी नजर नहीं आए है। तो चालक व बस स्टाफ निर्धारित ड्रेस कोड में नजर नहीं आए,

अभिभावक भी नहीं देते ध्यान-
स्कूली बच्चों की जान की परवाह को लेकर अभिभावक भी कताई गंभीर नजर नहीं आते हैं। ऑटो व वैन सहित अन्य वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बिठाया जा रहा है। कई वैन गैस से चल रही है गत वर्ष एक वैन में आग भी लग गई थी। इसके बावजूद अभिभावक इस मामले में लापरवाही दिखाते हैं। ऑटो में पीछे नौनिहाल बिना किसी सहारे के बैठे नजर आए तो बसों में भी जाली लगी हुई नजर नहीं आई। ऐसे में गिरने का भय बना रहता है।

बिना फिटनेस के दौड़ रहे वाहन-
जिला परिवहन विभाग भले ही सभी बाल वाहिनीयों के बिना फिटनेस के नहीं चलने की बात कह रहे हो, लेकिन हाल ये है कि कोई भी व्यक्ति बसों की हालत देखकर कह सकता है कि किसी भी स्थिति में इन बसों को फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं दिए जा सकता हैं, जिनकी पूरी बॉडी जगह-जगह से डेमेज हो रही हो। धूंआ इस स्थिति में निकाल रही है कि इनके आगे से निकलने पर मुहं काला हो जाएं। कई बसों को तो करोसिन मिलाकर चलाया जा रहा है,ऐसे में पर्यावरण को भी ज्यादा नुकसान हो रहा है। ऐसे मे बड़े शहरों में चलाने से बेन की गई बसों को झालावाड़ में चलाया जा रहा है। इस मामले में जिला प्रशासन को सख्ती करनी होगी। नहीं तो आने वाले दिनों में यहां भी स्थिति विकट हो जाएगी।

केन्द्रीय विद्यालय के प्राचार्य ने अभिभावकों को खिला पत्र-
केन्द्रीय विद्यालय के प्राचार्य जीआर मीणा ने अभिभावकों को लिखे पत्र में बताया कि प्रिय अभिभावकों बसों की स्थिति सही नहीं है इनमें अपने बच्चे भेजने की जिम्मेदारी आपकी होगी, स्कूल इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। ये कारण बताए बच्चों को नहीं भेजने के-
- बसों के द्वारा यातायात के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है
- क्षमता से ज्यादा बच्चों को बिठाया जा रहा है
- खिड़कियों में कांच नहीं है,बसे बहुत पुरानी है, जो हादसे का कारण बन सकती है।
-बसों पर बालवाहिनी नहीं खिला हुआ है, कोई सहायक नहीं होता है।
-बस चालकों द्वारा पुलिस सत्यापन के लिए कहने के बाद भी अभी तक पुलिस सत्यापन करवा कर स्कूल में नहीं दिया गया है। ऐसी स्थिति में कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी।

यह है नियम-
- बाल वाहिनी का कलर पीना होना चाहिए
- वाहन पर स्कूल का नाम एवं फोन नंबर आवश्यक रुप से होना चाहिए।
- चालक के पास पांच वर्ष पुराना व्यावसायिक लाइसेंस होना चाहिए।
- वाहनों पर स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए

-बस में बैग रखने का निर्धारित स्थान होना चाहिए।
- बस में फस्र्ट एड बॉकस होना जरूरी है।

- बस चालक एवं स्टाफ के निर्धारित डे्रस कोड में होना चाहिए।
- बच्चों को बिठाने व उतारने के लिए एक परिचालक होना जरुरी है।

जिला परिवहन अधिकारी समीर जैन से सीधी बात-

पत्रिका- हर माह यातायात व जिला परिवहन समिति की बैठक में बालवाहिनीयों के नियम बताए जाते है पालना नहीं हो रही
डीटीओ- ऐसा नहीं है समय-समय पर कार्रवाई करते हैं, नियमों की पालना नहीं होने पर चालान बनाते हैं

पत्रिका- बड़े शहरों की कंडम बसों को झालावाड़ में चलाया जा रहा है आप ने अनुमति कैसे दे दी
- डीटीओ- ऐसा नहीं है कि 25 साल पुरानी बसे फिटनेस प्रमाण पत्र है तो रोड पर चल सकती है। जिले में सभी के प्रमाण-पत्र बने हुए है।
पत्रिका- बालवाहिनियों में पीला रंग नहीं हो रहा है, सुरक्षा के उपकरण भी नहीं हे क्या आप ने कभी चेक किया
- डीटीओ- हां समय-समय पर चेक करते हैं सभी को सुरक्षा संबंधी नियमों की पालना करने के लिए बोल रखा है। इसबार नियमों का पालन नहीं करने पर 67 बालवाहिनीयों के चालान बनाए है।

पत्रिका- कई बसे ऐसी है जिनकी पूरी बॉडी कंपन कर रही है जिले में दौसा में एक बच्चा बस में छेद होने से निकल गया था, झालावाड़ शहर में भी केन्द्रीय विद्यालय सहित अन्य स्कूलों में ऐसी बसे चल रही आप ने कभी चेक कर्रवाई
डीटीओ- ऐसा तो नहीं है अगर ऐसा है तो अभिभावकों को भी जागरुक रहना चाहिए, बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जितनी हमारी उतनी ही उनकी भी है, बस की स्थिति सही नहीं है तो उन्हें नहीं भेजना चाहिए। केन्द्रीय विद्यालय में जो बसे चल रही है उनके बारे में अभिभावकों को सूचना दे दी गई है।

ग्रुप बनाकर अपने स्तर पर करेंगे व्यवस्था-
बसों की स्थिति वाकई में बहुत खराब है, हम भी कई दिनों से सोच रहे हैं अब एक गु्रप बनाकर अपने स्तर पर ही अच्छी गाड़ी की व्यवस्था करेंगे चाहे इसके लिए 100-200 रूपए अधिक देने पड़े।
देवेन्द्रसिंह, शैलेन्द्र सोनी अभिभावक केन्द्रीय विद्यालय।


हमारी तरफ से अभिभावकों को सूचना भेज दी गई है, बस संचालकों को कई बार बता दिया है, लेकिन वो नियमों की ओर ध्यान नहीं देते है, अब इसमें जो भी करना है अभिभावकों को ही करना होगा।
जीआर मीणा, प्राचार्य केन्द्रीय विद्यालय,झालावाड़।

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