Nutrition scam in Jhalawar...पोषाहार वितरण में घालमेल, शिकायतों पर डाल दिया पर्दा

कागजों में ही बांट देते पोषाहार

By: Ranjeet singh solanki

Published: 11 Oct 2021, 03:55 PM IST

झालावाड़. जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार वितरण में घालमेल की लगातार शिकायतें आ रही है। किसी केन्द्र पर कम पोषाहार वितरण किया जा रहा है तो किसी पर बच्चों के नाम पर फर्जी तरीके से पोषाहार उठा लिया जाता है। कागजों में पोषाहार वितरण का खेल चल रहा है। तीन माह की 9 किलो दाल की जगह तीन किलो ही दी जा रही है। अधिकारियों के पास भी शिकायतें पहुंच रही है, लेकिन कार्रवाई के बजाए शिकायतों पर पर्दा डाल दिया जाता है। एक आंगनबाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता ने तो मौखिक रूप से स्वीकार किया है कि कैसे पूरा पोषाहार वितरण करेंगे। 'ऊपरÓ तक माल पहुंचाना पड़ता है। पोषाहार वितरण में झालावाड़ शहर से लेकर गांवों तक के आंगनबाड़ी केन्द्रों से शिकायतें आ रही है। जांच के नाम पर विभाग के पर्यवेक्षक भेजे जाते हैं, लेकिन वह खानापूर्ति की रिपोर्ट देते हैं।

महिला एंव बाल विकास विभाग, झालावाड़ के उपनिदेशक महेशचंद्र गुप्ता का कहना है कि पोषाहार वितरण के दौरन धांधली व कम वितरण की सूचना स्थानीय पार्षदों ने मुझे दी थी। इसकी जांच कराई जाएगी। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत पाई गई, तो उन पर भी सख्त कार्रवाई होगी। अन्य राज्यों व बाजार में पोषाहार बेचना गम्भीर मामला है। इसकी जांच करवाई जाएगी।

कागजों में ही बांट देते पोषाहार
चन्दीपुर. मनोहरथाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत सोरती के गांव कोलूखेड़ी मेवातीयान के आंगनबाड़ी केंद्र पर जुलाई से सितंबर माह का पोषाहार का वितरण करने में अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्रामीण साजिद खान, गणपत लोधा, रईस खान, सद्दाम ने बताया कि पोषाहार तीन महीने के हिसाब से 9 किलो दाल गेहूं, 4 किलो 500 ग्राम, चावल मिलना चाहिए था। लेनिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने तीन किलो गेहूं, दाल एक किलो 500 ग्राम, चावल एक किलो 500 ग्राम की दिया। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने एसडीएम से की गई । शिकायत के बाद बाल विकास विभाग के सुपरवाइजर रामू नागर जांच करने के लिए आए । उसमें भी पूरा पोषाहार आने का मामला सामने आया। लेकिन सुपरवाइजर ने शिकायतकर्ताओं के बयान तक नहीं लिए, कैसे 'क्लीनचिटÓ दे दी। यह सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है शिकायत के बाद भी पूरा पोषाहार नहीं मिल रहा है। इससे पूर्व भी दो बार पोषाहार कम वितरण करने का मामला आ चुका है। जिसकी शिकायत भी पहले भी की जा चुकी है। लेकिन उचित कार्रवाई नहीं होने के कारण कार्यकर्ता द्वारा आधा अधूरा ही पोषाहार वितरण किया जा रहा है। ग्रामीणों से सोरती पंचायत की बट्टूखेडी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने तो यह दिया कि उच्चाधिकारियों तक माल पहुंचाया जाता है कैसे पूरा पोषाहार बांटेंगे।
पोषाहर वितरण में गड़बड़झाला
पिड़ावा. आगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार वितरण में लंबे समय से गड़बड़झाला हो रहा है। पिड़ावा के 15 आगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण में गड़बड़ी की जा रही है। सभी आगनबाड़ी केंद्रों पर वर्तमान में भी दो-दो माह का पोषाहार वितरण किया जा रहा है। कोरोना के चलते सरकार ने गर्भवती, धात्री महिलाओं व बच्चों के सेहत बनाने व उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए गेहूं, चावल व चना दाल का वितरण किया जा रहा। जिसमें गर्भवती व धात्री महिलाओं को 3 माह की 9 किलो दाल, साढ़़े चार- चार किलो गेहंू व चावल का वितरण करना था। वहीं बच्चों को भी 6 किलो दाल व 3 किलो 750 ग्राम गेहंू व चावल अलग अलग- वितरण करना था, लेकिन आगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ता महज उन्हें 2 माह का ही पोषाहार वितरित कर रही है। जरूरतमंदों के हक का निवाला छीना जा रहा है।
ये है शिकायतें

. बट्टूखेडी आंगनबाड़ी केन्द्र पर विनोद बैरवा के फर्जी हस्ताक्षर कर पोषाहार का चावल, गेहूं, दाल उठा ली गई।
राम प्रसाद बैरवा को मार्च से जून 2021 का पोषाहार वितरण नहीं किया गया।
. दिनेश कुमार भील, बीरम भील, राधेश्याम लोधा, तेजमल लोधा, राहुल लोधा आदि के बच्चों का बट्टूखेड़ी आंगनबाडी केन्द्र पर रजिस्ट्रेशन है, लेकिन पोषाहार का वितरण नहीं किया गया।
. पात्र व्यक्तिों से पूरा पोषाहार प्राप्त करने के हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं, जबकि तीन माह के 9 किलो गेहूं की जगह तीन किलो ही दिया जा रहा है। दाल-चावल में भी इसी तरह की गड़बड़ी की जा रही है।
जवाबदेही तय होना जरूरी
सरकार की मंशा है कि महिलाओं ,जरूरतमंदों और बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से पोषाहार वितरित किया जाए। आंगनबाड़ी केन्द्र मां बाडी की भूमिका निभाएं, लेकिन यहां तो पोषाहार में कमाई का खेल शुरू हो गया है। लॉक डाउन में जब आंगनबाड़ी केन्द्र बंद थे, तब भी सरकार ने पोषाहार का वितरण किया और घर-घर पोषाहार का जिम्मा सौंपा। लेकिन आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पोषाहार वितरण में घालमेल चल रहा है। यह गंभीर मामला है, इसकी प्रशासनिक अधिकारियों से जांच करवाने की आवश्यकता है, ताकि गांव के अंतिम छौर के व्यक्ति को भी सरकार की योजना का लाभ मिल सके। इसके लिए जिला कलक्टर को मामले में संज्ञान में लेकर जांच करवाई जानी चाहिए। क्योंकि विभाग के एक पर्यवेक्षक ने तो शिकायतकर्ताओं से बात तक नहीं की और एक आंगनबाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता को क्लीन चिट दे दी। एसीबी भी कार्रवाई की पहल कर सकती हैं। ताकि दूध का दूध, पानी का पानी हो सके।

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