Chandrabhaga Kartik Fair 2021...324 साल से चली आ रही परंपरा को कायम रखो सरकार

चन्द्रभागा कार्तिक मेले के आयोजन की अनुमति की उठी मांग

By: Ranjeet singh solanki

Published: 13 Oct 2021, 05:08 PM IST

झालावाड़. झालरापाटन. कोरोना वैश्विक महामारी के चलते राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने कोविड-19 गाइडलाइन की पालना में 324 वर्ष से लगातार नगर में लगने वाले राज्य स्तरीय चंद्रभागा कार्तिक मेले के आयोजन पर पिछले साल रोक लगा दी थी, लेकिन अब हालात सामान्य हैं और सरकार ने पुष्कर में ही लगने वाले मेले को वर्ष आयोजन की अनुमति दे दी है। इसे देखते हुए चंद्रभागा कार्तिक मेले को भी फिर से शुरू करने की मांग भी उठने लगी है।
324 वर्ष पहले वर्ष 1696 में तत्कालीन महाराज जालिम सिंह ने व्यापारिक गतिविधियों को बनाने के लिए कार्तिक पूर्णिमा पर मेले की परंपरा शुरू की थी। छोटे से स्वरूप से शुरू हुए मेले की पहचान आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। मेले में राजस्थान के कई जिलों के साथ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेशए गुजरात सहित विभिन्न प्रांतों के व्यापारी अपना कारोबार करने और पशुपालन पशुधन की खरीद-फरोख्त के लिए आते हैं। मेले को देखने के लिए राज्य के दूर-दराज शहर और कस्बों से लोग आते हैं। इसके अलावा कई विदेशी सैलानी भी इसमें आने लगे हैं। मेले में पशुओं के व्यापार के साथ ही सबसे अधिक आकर्षण ऊनी कपड़ा बाजार का रहता है। यहां से लोग सिलाई की दर पर वस्त्र खरीद कर ले जाते हैं। मेला कई जरूरतमंद गरीब परिवारों को सस्ती दर पर मिलने वाले ऊनी कपड़ों से सर्दी में गर्मी का अहसास कराता है। मेले के आयोजन से सरकार को दुकानों के भूखंडों की नीलाम बोली, रवनना पर्ची व अन्य मदो से हर वर्ष लाखों रुपए का राजस्व मिलता हैं। मेले में ऊनी कपड़ों की सैकड़ों दुकानें लगती हैं, जहां से गरीब परिवार के लोग अपने लिए सस्ती दरों पर पूरे साल के लिए पहनने के कपड़े और सर्दी से बचाव के लिए कोट, जर्सी, मफलर, कंबल, रजाई व अन्य घरेलू सामान रियायती दरों पर खरीदते हैं। मेले के आयोजन को लेकर अब तक व्यापारियों में असमंजस हैं। मेले में दुकानें लगाने वाले व्यापारियों को करीब 2 माह पहले से ही दुकानों के लिए सामान लाने की तैयारियां करनी पड़ती है, हालांकि इस वर्ष कोरोना का प्रभाव कम हो जाने के साथ ही सरकार के गाइड लाइन में शिथिलता देने के साथ ही कई चीजों को फिर से चालू करने की अनुमति प्रदान करने राज्य के पुष्कर में मेले के आयोजन को लेकर अनुमति देने से व्यापारी इस मेले के आयोजन को लेकर अभी असमंजस में है। इस बारे में प्रशासन ने अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है। इससे व्यापारी आपस में इसको लेकर चर्चा कर रहे हैं। जिला प्रशासन व पशुपालन विभाग के तत्वावधान में सरकारी स्तर पर यह मेला 8 दिन तक चलता है। इसके बाद नगर पालिका की देखरेख में मेला करीब 3 माह तक लगता है। मेले में होने वाले व्यापार से कई परिवार पूरे वर्ष भर का गुजारा चला लेते हैं। गरीब व मध्यम वर्ग के लोगों का कहना है कि 100 दिन तक लगातार चलने वाले इस मेले में अच्छी ग्राहकी रहने से उनके परिवार का पूरे वर्ष का घर चल जाता है। विभिन्न नस्ल के पशुओं की होती हैं। मेले में ऊंट, गोवंश, घोड़े घोड़ी, बछेरा-बछेरी, भैंस की अच्छी तादाद में आवक होने के साथ ही इनकी करोड़ों रुपए में खरीद-फरोख्त होती है। इस मेले से लोग वर्ष भर के घर पर काम आने वाली वस्तुओं की खरीद करते हैं। साथ ही यह मेला दर्शकों के लिए मनोरंजन का भी अच्छा माध्यम है। यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए मनोरंजन के साधन उपलब्ध होते हैं। पर्यटन विभाग के माध्यम से मेले में 3 दिन तक रंगारंग कार्यक्रम आयोजित होते हैं जिसके माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों के लोक कलाकार लोक संस्कृति का समागम प्रस्तुत कर हमारी देश की अनेकता में एकता का संदेश देते हैं। चंद्रभागा कार्तिक मेले का उद्घाटन देवउठनी एकादशी पर भूमि पूजन व ध्वजारोहण के साथ होता है। मोक्षदायिनी चंद्रभागा नदी में कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र स्नान के लिए दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु आते हैं जो स्नान के बाद मेले के मनिहारी, लोहा बाजार, ऊनी कपड़ा बाजार सहित अन्य बाजार से जरूरत के सामानों की खरीदारी करते हैं। साथी बच्चे और महिलाएं मनोरंजन के साधनों का लुत्फ उठाते हैं।

BJP Congress
Show More
Ranjeet singh solanki
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned