टारगेट पूरे करने के लिए फर्जी लोगों के नाम भर रहा रजिस्टर में पशुपालन विभाग

टारगेट पूरे करने के लिए फर्जी लोगों के नाम भर रहा रजिस्टर में पशुपालन विभाग

harisingh gurjar | Publish: Aug, 12 2018 08:10:30 PM (IST) Jhalawar City, Jhalawar, Rajasthan, India

 

-उच्चाधिकारियों की नजर में काम का अच्छा प्रदर्शन दिखाने के लिए

 

झालावाड़.हरिसिंह गुर्जर. राज्य सरकार ने पशुपालन विभाग को पशुपालकों के पशुओं की नस्ल सुधारकर दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के उद्देश्य से कृत्रिम गर्भाधान योजना चला रखी है। लेकिन यह योजना झालावाड़ जिले में कितनी फलीभूत हो रही है। यह जानकर आप हैरान हो जाएंगे। जी हां, जिले में इस योजना के तहत कागजों में ही मादा पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जा रहा है। ऐसे में कैसे जिले के मालवी पशुओं की नस्ल में सुधार होगा। और जिले के पशुपालकों की आय 2022 तक कैसे दोगुनी होगी। जिले में जिला मुख्यालय का बहुउद्देश्य पशु चिकित्सालय अपने नाम के अनुरूप काम नहीं कर पा रहा है। नाम भले ही बहुउद्देश्य है। यहां पशुपालन विभाग ने जो लक्ष्य दिया वह पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में चिकित्सालय कागजों में ही लक्ष्य पूरा कर रहा है। चिकित्सालय में वर्ष 2014 से 2017 तक कई पशुपालकों के मादा पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। लेकिन इनमें से कई ऐसे पशुपालकों के नाम भी है जिनका कोई अता-पता ही नहीं है। पशु चिकित्सालय के कर्मचारियों ने ऐसे व्यक्तियों के नाम रजिस्टर में भर दिए है। जो उस गांव में रहते भी नहीं है। ऐसे हालात में कैसे राज्य सरकार का उन्नत पशु,खुशहाल किसान का नारा पूरा होगा। यह सोचनीय बिन्दू है।
इसलिए कर रहे खानापूर्ति-
राज्य सरकार के पशुपालन विभाग ने सभी पशु चिकित्सालयों में कृत्रिम गर्भाधान के प्रतिवर्ष लक्ष्य निर्धारित कर दिए है। इसमें पहले 600, इसके बाद 1200 सौ तक किए गए है। अब बड़े पशु चिकित्सालयों में टारगेट और बढ़ा दिया गया है। इसके चलते लक्ष्य पूरा नहीं होने से कागजी खानापूर्ति की जा रही है। ऐसे में पशुपालकों के हक का जो पैसा सरकार खर्च कर रही है वह बेकार ही जा रहा है। अधिकारी योजना का प्रचार-प्रसार करने की बजाए अपनी कुर्सी नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे में पशुपालकों में जागरुकता नहीं होने से जानकार पशुपालक ही अपने पशुओं का कृत्रित गर्भाधान करने के लिए लाते है। लेकिन ऐसे पशुपालकों की संख्या बहुत कम होती है। ऐसे में शेष ऐसे ही खानापूर्ति कर लक्ष्य पूरा किया जा रहा है।
यह है खानापूर्ति की बानगी-
राजकीय बहुउद्देश्य अ श्रेणी पशु चिकित्सालय झालावाड़ में वर्ष 2014, 2015, 2016, तथा 31 मार्च 2017 तक कुल 28 सौ से अधिक मादा पशुओं का गर्भाधान किया गया है। इनमें से ऐेसे कई पशुपालकों के नाम भर दिए गए है। जो उन गांवों में निवास ही नहीं करते हैं। उस गांव में ग्रामीणों व सरपंच से पता किया तो उस गांव में रजिस्टर में लिखे नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं रहता है। ऐसे एक नहीं कई नाम है। ऐसे करीब 23 व्यक्यिों के नाम की पड़ताल की गई तो वह उन गांवों में रहते ही नहीं है।
सरंपच व ग्रामीणों से मौके पर जाकर किया पता-
पशु चिकित्सालय द्वारा कोलाना गांव के पूनमचन्द गुर्जर तथा दौलराम बंजारा नाम के पशुपालकों की मादा भैंसों को कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। लेकिन यहां सरंपच व ग्रामीणों से पता करने पर सामने आया कि दोनों नाम के व्यक्ति गांव में रहते ही नहीं है। पूरे गांव में भील समाज के व्यक्ति रहते हैं। ऐसे ही खानपुरिया गांव में सोहनलाल मीणा व रामशंकर मीणा की भैंसों में कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। जबकि यहां पता किया तो पूरे गांव में पाटीदार समाज के लोग रहते हैं। ऐसे ही पटपडिय़ा में श्यामलाल गुर्जर की भैंस को कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। लेकिन यहां भी इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला है।

क्यों हो रहा ऐसा-
उच्चाधिकारियों को संतुष्ठ करने व लक्ष्य पूरा करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। लेकिन इस दिशा में उच्चाधिकारियों का लक्ष्य टारगेट देने तक ही सीमित है। आज तक पशुपालन विभाग के उच्चाधिकारियों ने इसकी मॉनिटरिंग नहीं की। इसके चलते ही ऐसी स्थिति सामने आ रही है। ऐसे हालात रहे तो ना तो पशुओं की नस्ल में सुधार होगा और ना ही सरकारी धन का दुरूपयोग रूक पाएगा। ऐसे में सरकार व विभाग को इस ओर ध्यान देने की खासी जरुरत है।
इतने किए कृत्रिम गर्भाधान
वर्ष गर्भाधान
31 दिसम्बर 2014 209
31 दिसम्बर 2015 1306
15 दिसम्बर 2016 1066
16 दिसम्बर से16 फरवरी 2017 -238
कुल- 2819

यह बोले जिम्मेदार-
-कृत्रिम गर्भाधान में में हम पशुपालकों से आईडी तो लेते नहीं है। जो नाम पशुपालक बताता है वही लिखते हैं। अगर फर्जी नाम की बात है। तो कल दिखवा लेंगे।
डॉ.आरके बंसल, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, झालावाड़।

ग्रामीण आते वही नाम लिखवाते हैं, ऐसे में हमें पता नहीं होता है सही आदमी कौन है। इसबार 16 सौ का कृत्रिम गर्भाधान का टारगेट मिला है। उसमें से अभी तक 30 फीसदी ही पूरा हुआ है। लोग जानवरों को बांधकर नहीं रखते हैं। इसलिए कृत्रिम गर्भाधान नहीं हो पाता है।
औंकारलाल पाटीदार, उपनिदेशक पॉली क्लिनीक, बहुउद्देश्य पशु चिकित्सालय, झालावाड़।

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