बीमा कंपनी 30 फीसदी ही मान रही नुकसान, किसान बोल रहे 90 फीसदी नुकसान

Hari Singh Gujar

Updated: 01 Sep 2019, 10:36:57 AM (IST)

Jhalawar, Jhalawar, Rajasthan, India

 

झालावाड़.जिले में लगातार हुई बारिश से फसलों में काफी नुकसान हुआ है।लेकिन सर्वें की धीमी चाल से किसान परेशान नजर आ रहे हैं। कहीं किसान अधिकारियों के समक्ष प्रदर्शन कर मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं तो कहीं किसान खेतों में खराब फसलों को देखकर मायूस नजर आ रहे हैं। जिले में नदी क्षेत्रों व जलभराव वाले खेतों में तो करीब 90 फीसदी तक नुकसान किसान बता रहे हैं, लेकिन कृषि विभाग व बीमा कंपनी के प्रतिनिधि इन क्षेत्रों मेें भी 30 फीसदी ही नुकसान मान रहे हैं। हालांकि जिले में बुधवार शाम को एग्रीकल्चर इंश्योरेंस इंडिया बीमा कंपनी के प्रतिनिधी पहुंच गए है। अब वह कृषि विभाग के माध्यम से पहुंचे इंटीमेशन आवेदन के आधार पर सैंपल सर्वे कर रहे हैं। जबकि किसानों की मांग है कि सरकार सर्वे का काम तेज करवाएं।

 

जिले में इतने आवेदन आए अभी तक-
जिलेभर में मक्का, सोयाबीन, उड़द, मंूग आदि फसलों के अभी तक करीब 7200 इंटीमेशन फार्म कृषि विभाग के पास पहुंचे है। ऐसे में इन फार्म के आधार पर बीमा कंपनी के लोग जिले में सर्वे करेंगे।

बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों ने देखे हालात-
बीमा कंपनी के जयपुर व जिले के प्रतिनिधियों ने खानपुर क्षेत्र के जोलपा, सुमर, भंवरा पटवार मंडलों पर जाकर खेतों में खराबे की स्थिति देखी है। कंपनी के करीब एक दर्जन कर्मचारियों ने खानपुर पटवार मंडल के बाद गुरुवार को रायपुर क्षेत्रों में खेतों में जाकर सर्वे का आंकलन किया है।


16 हजार 600 में हैक्टेयर में माना खराबा-
फसल नुकसान
सोयाबीन- 10120 हैक्टेयर- नुकसान- 15-30 फीसदी के बीच
उड़द- 2952 हैक्टेयर- 20-25 फीसदी
मक्का- 2528 हैक्टेयर- 10-25 फीसदी
मंूग- 125 हैक्टेयर- 15-25
मंूगफली 250 हैक्टेयर- 10-25 फीसदी
सब्जियां व अन्य फसल- 650 हैक्टेयर - 10-25 फीसदी नुकसान
कुल- 16625 हैक्टेयर में प्रारम्भिक नुकसान माना गया है
यहां 40 फीसदी का अनुमान-
जिले में बकानी, रायपुर, खानपुर क्षेत्रों में नदी आने व अन्य जलभराव क्षेत्रों में करीब 40 फीसदी नुकसान माना गया है, जबकि किसान यहां 80-90 फीसदी नुकसान बता रहे हैं। किसान बालमुकंद, रोडूलाल आदि का कहना कि सोयाबीन ऊपर से सही नजर आ रही है, लेकिन पूरी तरह से जड़े सड़ चुकी है। वहीं अभी जहां पानी भरा हुआ है वहां तो पत्ते सहित पूरा पौधा ही खराब हो चुका है। ऐसे में सोयाबीन व मक्का में नुकसान 90 फीसदी हुआ है। उड़द,मूंग आदि में भी 50 फीसदी नुकसान है।

 

सर्वे नहीं मानें तो कहां जाए किसान
कई बार फसल बीमा कंपनी कृषि विभाग के सर्वे को भी नहीं मानती है। इस कारण किसानों तक मुआवजे की राशि नहीं पहुंच पाती है। बीमा कंपनी कुछ ही क्षेत्रों में जाकर सैंपल सर्वे कर रही है। ऐसे में जिले के सभी बीमीत किसानों की सही रिपोर्ट नहीं मिल पाती है।


इन दो तरीके से मिलता है मुआवजा
कंपनी दो प्रकार के नुकसान पर मुआवजा देती है। बारिश या ओलावृष्टि होने पर यदि किसान 72 घंटों के भीतर रिपोर्ट करता है तो बीमा कंपनी कृषि विभाग के एक अधिकारी और अपने एक कर्मचारी के साथ सर्वे करती है। नुकसान की रिपोर्ट भेजी आती है और फि र मुआवजा मिलता है। क्रॉप कटिंग के माध्यम से मुआवजा तभी मिलेगा जब वर्तमान सीजन में उपज पिछले सालों से औसतन उपज से कम हो।

लगातार नमी की वजह से नहीं आया फलाव-
जिले में लगातार हुई बारिश से खेतों में नमी बनी हुई है। ऐसे में फसलों में फलाव नहीं आ पाया है, कई जगह सोयाबीन आदि में फलाव आ गया, लेकिन एक पौधे में 60-80 फलियों के स्थान पर 8-10 फलियां आ पाई है। ऐसे में अब बीमा कंपनी के प्रतिनिधि ऐसी फसलों को क्रॉप कटिंग में शामिल करने की बात कर रहे हैं। जबकि जिले में कई क्षेत्रों में फसलें पूरी तरह से गल चुकी है।

सर्वेशुरू हो गया है-

जिले में बीमा कंपनी द्वारा सर्वे शुरु कर दिया गया है।एक दर्जन लोगों खानपुर के तीन पटवार मंडल पर सर्वे किया है, एक पटवार मंडल पर 10-12 किसानों के खेतों का सर्वे कर उसे पूरे पटवार मंडल पर लागू किया जाएगा। अभी खानुपर में रायपुर में ज्यादा खराबा सामने आया है।
जुगल किशोर मीणा, जिला समन्वयक, एग्रीकल्चर इंश्योरेंश बीमा कंपनी, झालावाड़।

रिपोर्ट- हरिसिंह गुर्जर,झालावाड़

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