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800 कर्मचारियों का 10 करोड़ का वेतन बकाया, लोन की किश्तें भी नहीं दे पा रहे

locationझालावाड़Published: Jan 27, 2024 03:04:03 pm

Submitted by:

Omprakash Dhaka

Rajasthan News : मेडिकल कॉलेज के राजमेस में जाने के बाद से हर माह कर्मचारियों को वेतन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर वेतन के अभाव में सैंकड़ों कर्मचारियों की कार-हाउस लोन की किस्त समय पर जमा नहीं होने से कर्मचारियों को हर माह हजारों रुपए की पैनल्टी लग रही है।

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झालावाड़ जिला कलक्टर को वेतन के लिए ज्ञापन देते मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी।

Jhalawar News : मेडिकल कॉलेज के राजमेस में जाने के बाद से हर माह कर्मचारियों को वेतन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर वेतन के अभाव में सैंकड़ों कर्मचारियों की कार-हाउस लोन की किस्त समय पर जमा नहीं होने से कर्मचारियों को हर माह हजारों रुपए की पैनल्टी लग रही है। इतना ही नहीं कर्मचारियों को बच्चों की फीस जमा करने, किराना सामान लाने में भी परेशानी आ रही है। किराने व दूध वालों ने भी अब ज्यादा उधारी होने से पैसे मांगना शुरू कर दिया है।

मेडिकल कॉलेज के करीब 800 कर्मचारियों को दिसंबर माह का वेतन अभी तक नहीं मिला है। कर्मचारियों का करीब 10 करोड़ रुपए दिसंबर का बकाया है, वहीं जनवरी माह भी निकलने को आया है। लेकिन अभी तक वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों को आर्थिक हालात से जुझना पड़ रहा है।

हर माह की परेशानी
कर्मचारियों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के राजमेस में जाने के बाद से एसआरजी व जनाना चिकित्सालय का डीडीओ पावर मेडिकल कॉलेज में चला गया है। तब से हर माह यही परेशानी आती है, कभी भी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता है, जबकि 1 से 5 तरीख के बीच कर्मचारियों को वेतन मिल जाना चाहिए। इससे पूर्व समय पर वेतन आता था, लेकिन जब से राजमेस में कॉलेज गया है तब से परेशानी झेल रहे हैं।

पैनल्टी लग रही
हाउस लोन चल रहा है, बैंक तो ऑटो मोड पर होने से खाते से स्वत:लोन किस्त काट लेता है, अगर खाते में पैसे नहीं होने से किस्त बाउंस हो गई है, दिसंबर में समय पर पैसे जमा नहीं हुई, जनवरी भी निकलने को आया। ऐसे में दोनों माह की पैनल्टी लग गई है।
राहुल रावल ऑफिसर, एसआरजी चिकित्सालय, झालावाड़।

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आर्थिक परेशानी
हाउस लोन चल रहा है। लेकिन हर माह समय पर वेतन नहीं आने से काफी आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दो माह का वेतन हो गया है। घर खर्च उधारी में चला रहे हैं।
मो.आवेश नर्सिंग ऑफिसर एसआरजी चिकित्सालय, झालावाड़

मेडिकल कॉलेज में दिसंबर,जनवरी व फरवरी माह का 26.75 लाख रुपए का बजट आ चुका है। लेकिन फिर भी तकनीकी परेशानी के चलते कर्मचारियों के बिल पास नहीं हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में काम करने वाले डॉक्टर सहित राजकीय व सोसायटी सहित सभी कैडर के करीब 800 कर्मचारियों के 11 बिल अटके हुए है। ऐसे में पहले बजट नहीं था, अब बजट आ गया है, लेकिन बिल पास नहीं होने से कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में कई डॉक्टरों का 3 से लेकर 6 लाख रुपए प्रति माह वेतन है, जिनमें से कई के मकानों के करोड़ों रुपए का लोन चल रहा है। जिनकी हर माह लाखों रुपए की किस्त भी जाती है। लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से किस्त बाउंस होने से मोटी पैनल्टी लग रही है।

इतने कर्मचारियों का वेतन बकाया
ज्ञापन में बताया कि राजमेस व राजकीय कैडर के नर्सेज संघ, फार्मासिस्ट संघ,लैब टेक्नीशियन संघ, रेडियोग्राफर संघ,स्टेनो संघ, कंप्यूटर ऑपरेटर संघ, फिजियोथेरेपी संघ, मंत्रालयिक संघ, सहायक कर्मचारी संघ, स्टोरकीपर संघ सभी विभागों के कई कर्मचारी मौजूद रहे। सभी विभागों के दिसंबर व जनवरी माह का करीब 20 करोड़ रुपए बकाया हो चुका है, जबकि बजट होने के बाद भी मेडिकल कॉलेज से वेतन पास नहीं किया जा रहा है।

जिला कलक्टर से लगाई गुहार
मेडिकल कॉलेज से सलंग्न दोनों चिकित्सालय में कार्यरत सभी कैडर के राजकीय व सोसायटी कर्मचारियों को माह दिसंबर 2023 का वेतन समय पर नहीं मिलने से कर्मचारी एकत्रित होकर गुरुवार को जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ के पास पहुंच गए। कर्मचारियों ने ज्ञापन में बताया कि समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों को भारी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बहुत से कर्मचारियों के लोन की किस्त वेतन के अभाव में समय पर जमा नहीं होने से पैनल्टी भुगतनी पड़ रही, वहीं घर खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त बयान जारी कर आरोप लगाया कि समय-समय पर स्थानीय चिकित्सा प्रशासन, प्रिंसिपल, मुख्य लेखाधिकारी व लेखा विभाग को अवगत कराने के बाद भी आज तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।

अटका रखे हैं बिल
कलेक्टर को दिए ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि कभी बजट का अभाव तो कभी टेक्निकल समस्या बताकर कर्मचारियों के वेतन बिल अटकाए जाते है। यहां तक कि संबंधित लिपिक को बिल बनाने से भी मना कर दिया जाता है। जब से डीडीओ पावर मेडिकल कॉलेज के अधीन गई है। वंहा पर बैठे लेखाधिकारियों की कार्यशैली के कारण आ रही हे। ऐसे में नहीं चाहते हुए भी चिकित्सा जैसे जनहित के कार्य में उन्हें मजबूरी में बहिष्कार जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। कर्मचारियों ने सामूहिक निर्णय लिया कि यदि 28 जनवरी तक वेतन का भुगतान नहीं होता है, तो कर्मचारी मजबूरन 29 जनवरी से 2 घंटे कार्य बहिष्कार करेंगे, जिससे आमजन को होने वाली परेशानियों के लिए चिकित्सा प्रशासन ही जिम्मेदार होगा।

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