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झालावाड़

निर्जला एकादशी आज, शुभ नक्षत्रों के संयोग में मनाएंगे पर्व

Nirjala Ekadashi will be celebrated today in conjunction with auspicious stars.

झालावाड़Jun 17, 2024 / 10:55 pm

jagdish paraliya

  • सुनेल. निर्जला एकादशी का पर्व मंगलवार को शुभ संयोगों में मनाया जाएगा। इस दिन त्रिपुष्कर, शिव एवं स्वाति नक्षत्र का अद्वुत संयोग बन रहा है। पंडित नरेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि पंचाग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी मंगलवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदयात तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी व्रत मंगलवार को रखा जाएगा।
सुनेल. निर्जला एकादशी का पर्व मंगलवार को शुभ संयोगों में मनाया जाएगा। इस दिन त्रिपुष्कर, शिव एवं स्वाति नक्षत्र का अद्वुत संयोग बन रहा है। पंडित नरेन्द्र कुमार शर्मा ने बताया कि पंचाग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी मंगलवार सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदयात तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी व्रत मंगलवार को रखा जाएगा। एकादशी का पारणा बुधवार को होगा। निर्जला एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी सबसे कठिन मानी जाती है, इस दिन अन्न, जल ग्रहण नहीं किया जाता है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी और बड़ी ग्यारस नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने व व्रत रखा जाता है।
ऐसे करें निर्जला एकादशी पर पूजन

निर्जला एकादशी के दिन चौकी पर साफ वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। कपड़े का रंग यदि पीला है तो इसे काफी शुभ माना जाता है। भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत प्रिय है। इसलिए एकादशी व्रत के दिन पूजा सामग्री में पीले पुष्प, वस्त्र, फल केला या आम, कलश व आम के पत्ते जरुर रखे। पूजा सामग्री में पान, लौंग, सुपारी, कपूर,पीला चंदन, अक्षत, पानी से भरा नारियल, पंचमेवा, कुमकुम, हल्दी धूप, दीप तिल, मिष्ठान, मौली इत्यादि अवश्य रखी जाए। इन वस्तुओं के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। हिंदू धर्म में पंचामृत का विशेष महत्व है। इसलिए भगवान विष्णु की पूजा में पंचामृत अर्थात् दूध, दही, घी, शक्कर और शहद से मिश्रित द्रव्य को शामिल किया जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि पंचामृत का भोग लगाने और पूजा के बाद उसे ग्रहणकरने से साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल निश्चित रुप से किया जाए। क्योंकि उन्हें तुलसी सर्वाधिक प्रिय है। इसलिए पूजा के समय भोग में और पंचामृत में तुलसी पत्र अवश्य डालने चाहिए। इससे न केवल इन वस्तुओं की शुद्वि होती है, बल्कि भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते है।
दान का विशेष महत्व

निर्जला एकादशी के दिन दान का विशेष महत्व है। इस दिन गोदान, जल दान, छाता दान देने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन साधक निर्जला व्रत रखकर किसी को पानी पीने का घड़ा दान करता है, तो शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
पीपल को जल चढ़ाएं

निर्जला एकादशी के दिन पीपल के पेड़ की पूजा कर जल अर्पित करें। एकादशी व्रत कथा सुनने से पूजा पूर्ण होती है। इस दिन पौधे लगाना शुभ माना गया है। इसलिए पीपल, बरगद, नीम आदि का पौधा अवश्य लगाएं।
निर्जला एकादशी पर यह काम नहीं करना चाहिए

  • निर्जला एकादशी के दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे व्रत का फल नष्ट हो जाता है। तुलसी को स्पर्श नहीं करें और न ही उसमें जल चढ़ाना चाहिए, क्योंकि इस दिन मां तुलसी व्रत रखती है। इस दिन तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करें। जमीन पर शयन करें। झाउूपोछा करने में सावधानी बरतें।

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