शहर काजी अब्दुल रेहमान ने बताया कि रमजान में रोजेदार की दुआ खाली नहीं जाती है। रोजे रखना इस्लाम का फर्ज है। रमजान में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। रमजान का पहला हिस्सा माह के 1 से 10 दिन का रहमत वाला होता है, दूसरा हिस्सा 11 से 20 दिन का मगफिरत और 21 से 30 दिन का हिस्सा बरकतों वाला होता है। रमजान में बेहिसाब, बरकत और रहमतों वाली एक रात होती है, जिसे शबेकद्र कहते हैं। यह रात दूसरी तमाम रातों से बेहतर है। रमजान में कुरान पाक नाजिल किया गया। रमजान में रोजे फर्ज किए गए हैं। रमजान में हर नेकी का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। रमजान में गरीबों का ख्याल रखें। इबादत अधिक करें, जो व्यक्ति माह में रोजेदार को इफ्तार कराता है। उसके सारे गुनाह माफ कर दिए जाते। रमजान में सदका, खेरात व जकात, फितरा आदि दिए जाते हैं तो इसका 70 गुना सबाब मिलता है।