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Migratory birds....दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट से गूंज रहे मुंडलियाखेड़ी और गोमती सागर तालाब

सात समंदर पार से लंबी उड़ान भरकर पहुंचे

झालावाड़

Published: December 31, 2021 03:57:31 pm

झालरापाटन. सर्दी की दस्तक के साथ ही सात समंदर पार से लंबी उड़ान भरकर रंग-बिरंगे विदेशी मेहमानों का आगमन शुरू हो गया है। नगर स्थित गोमती सागर तालाब एवं मुंडलिया खेड़ी तालाब में विदेशी दुर्लभ प्रजातियों के दर्जनों पक्षियों की चहचहाहट गूंजने लगी है। यहां पर विदेशी के साथ ही देश के कई प्रांतों से पक्षी आए हंै।
करीब 150 से भी अधिक पक्षी यहां आए हैं, इनका रोजाना आना जाना जारी है। हर वर्ष सर्दी बढ़ते ही दिसंबर तक पक्षी पहुंचने लगते हैं। पक्षियों के मूल देश और प्रदेशों में बफबारी होने से इनके भोजन की किल्लत हो जाती है, इसके कारण यह विदेशी मेहमान देश में अलग-अलग जगह विभिन्न जलाशयों की और रुख करते हैं। यहां पर तापमान में तेजी आने के साथ ही यह पक्षी फरवरी के शुरूआत में ही वापस लौटने लगते हैं। दोनों जलाशय में अभी आधा दर्जन प्रकार के पक्षियों की प्रजाति आई हुई है। इनमें कुछ प्रजाति प्रवासी पक्षियों की श्रेणी में आते हैं,यहां पर हर वर्ष इस मौसम में 10 से 12 प्रजातियों के जलीय आसपास के क्षेत्र में स्थानीय पक्षी आते हैं। इन जलाशयों में पक्षियों को अन्य सुविधाओं के साथ भोजन के रूप में मछली, कीड़े, जलीय पौधे, गीली घास एवं अन्य चीजें उपलब्ध है जिसके कारण पक्षियों का यह जलाशय हर वर्ष ठिकाना बन चुका है। जलाशयों के आसपास कई पेड़-पौधे होने से जंगल जैसा नजारा दिखाई देने लगता है। इससे प्रवासी पक्षी आकर्षित होकर अपना डेरा यहां जमा लेते हैं। दोनों तालाब पास पास होने से पक्षियों को यह झील के रूप में दिखाई देते हैं और आसपास खुला वातावरण मिलने से यह पक्षी स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं।
रंग-बिरंगे पक्षियों की सुंदरता और उन की मधुर आवाज देखते ही बन रही है। इसमें कई दुर्लभ पक्षी भी मौजूद है। पक्षियों के अनुकूल तालाब होने से प्रवासी पक्षी हर साल आ रहे हैं, लेकिन इनके संरक्षण के इंतजाम नहीं होने से लोग मौका पाकर इनका शिकार भी कर रहे हैं। जिला प्रशासन और वन विभाग को इनकी सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए प्रयास करने चाहिए। दोनों जलाशय को मिलाकर बनाई जा सकती है झील। गोमती सागर तालाब और मूड़लियाखेड़ी तालाब पास पास होने से बरसात के मौसम में पानी लबालब भरने पर एक दूसरे से आपस में मिल जाते हैं। इससे बहुत ही सुंदर और मनोरम दृश्य दिखाई देता है। जिला प्रशासन और राज्य सरकार यदि प्रयास करें तो दोनों जलाशयों को मिलाकर आकर्षक झील बनाई जा सकती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी योजना तैयार की थी, लेकिन मामला खटाई में पड़ गया। झील बनाने से नौकायन शुरू हो सकती है।
Migratory birds....दुर्लभ पक्षियों की चहचहाहट से गूंज रहे मुंडलियाखेड़ी और गोमती सागर तालाब
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