अलाव के सहारे गुजर रही तीमारदारों की रातें बकानी सीएचसी में बनी धर्मशाला की लोगों को नहीं जानकारी

एनआरएसएम द्वारा बनाई धर्मशाला का लोकार्पण 1 अप्रेल 2018 को विधायक ने किया था

By: jagdish paraliya

Published: 11 Feb 2019, 11:25 AM IST

बकानी. सीएचसी पर मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के ठहरने के लिए 50 लाख रुपए की लागत से बनी धर्मशाला पर लोकार्पण के बाद से ताला लगा है। व्यापक प्रचार-प्रसार का अभाव और मरीजों के परिजनों को सुविधा की जानकारी नहीं होने से ठंडी रातें अलाव से सहारे खुले आसमान के नीचे गुजारनी पड़ रही हैं।
एनआरएसएम द्वारा बनाई धर्मशाला का लोकार्पण 1 अप्रेल 2018 को विधायक ने किया था। इसके बाद से यहां ताला लगा है। विभाग द्वारा धर्मशाला के रख रखाव के लिए चौकीदार भी नियुक्त कर रखा है, जो रात को यहीं रहता है, लेकिन मरीजों के साथ आने वाले परिजनों के लिए सहां कोई सुविधा नहीं हैं। खुले में बैठे परिजनों के हाथ से ***** कई बार भोजन क्षपटकर ले जाते हैं।
—अलाव के सहारा गुजर रही रात
शुक्रवार रात 10 बजे पत्रिका टीम ने सीएचसी का निरीक्षण किया तो अस्पताल परिसर में जनाना वार्ड के सामने खुले आसमान के नीचे अलाव के सहारे बैठे लोग मिले। कुशलपुरा निवासी शिवलाल तंवर एंव खेरदन्ता निवासी परमान्द तंवर ने बताया कि वे डिलेवरी कराने के लिए आए हैं, रात में सोने की व्यवस्था नहीं होने से अलाव जला लिया है। अस्पातल में अन्दर जाने पर आगरिया निवासी छगनलाल, रतनपुरा निवासी लखनसिंह एंव देवर निवासी रामचन्द किराये के बिस्तर लाकर अस्पताल परिसर में ही खुले में सोते मिले। उन्होंने बताया कि हम भी डिलेवरी कराने के लिए ही आए हैं। जब धर्मशाला के बारे में पूछा तो सभी उन्हें जानकारी नहीं होने की बात कही।
—मरीजों के परिजनों के लिए बनाई धर्मशाला में नल लाइन की सुविधा उपलब्ध हैं, अभी तक कोई भी हमारे पास नहीं आया है कि उसे धर्मशाल में जाना है। अधिकांश लोग यहीं अस्पताल में ही रूकना चाहते हैं। यदि कोई वहां सोना चाहता है तो उसके लिए धर्मशाला खुला दी जाएगी।।
डॉक्टर मृत्युजंय मण्डल, वरिष्ठ चिकित्सा प्रभारी।

स्कूल में क्लास रूम का अभाव होने से खुले में हो रही पढ़ाई
—आवासन मंडल कॉलोनी का मामला
सुनेल. आवासन मंडल कॉलोनी स्थित राजकीय नवीन उच्च प्राथमिक विद्यालय में भवन और सुविधा के अभाव में विद्यार्थीयों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कक्षा एक से ८ तक के विद्यालय मेें ६४ नामांकन है। जिनमें चार शिक्षक और प्रधानाध्यापिका हैं। विद्यालय में तीन कक्षा-कक्ष संचालित हंै जो क्षतिग्रस्त होने से बारिश के समय छतें टपकती हैं, ऑफिस कक्ष भी क्षतिग्रस्त है। इससे विद्यार्थीयों को खुले में बैठाना पड़ता है। स्कूल में कोई भी कमरा ऐसा नहीं है जिसमें पानी नहीं टपकता हो।
—समाजकंटकों का डेराा
विद्यालय में अवकाश होने के बाद समाजकंटकों का डेरा लगा रहता है। वे शराब पीने पहुंच जाते हैं। रात को महफील सजने के बाद सुबह जब बच्चे स्कूल पहुंचते हैं तो शराब की बोतलें देख उनपर गलत प्रभाव पड़ता है। विद्यालय में कई बार चोरी हो चुकी है। वहीं यहां शौचालय भी क्षतिग्रस्त है।

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