दुर्लभ व नायब धरोहरों को संजोएं है, गढ़ भवन राजकीय संग्रहालय

दुर्लभ व नायब धरोहरों को संजोएं है, गढ़ भवन राजकीय संग्रहालय

jitendra jakiy | Publish: May, 17 2018 07:44:28 PM (IST) Jhalawar City, Jhalawar, Rajasthan, India

-विश्व संग्रहालय दिवस पर विशेष

दुर्लभ व नायब धरोहरों को संजोएं है, गढ़ भवन राजकीय संग्रहालय
-विश्व संग्रहालय दिवस पर विशेष
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. प्राचीन व रियासत काल की दुर्लभ व नायाब धरोहर को अपने में संजोएं है जिला मुख्यालय पर एतिहासिक गढ़ भवन में स्थित राजकीय संग्रहालय। यहां कलाकृतियों मूर्तियों, अभिलेखों, हस्तलिखित ग्रंथों व चित्रित हस्त ग्रंथों का अदभुत भंडार है। संग्रहालय को चार भागों प्रचाीन मूर्तियां, शिलालेख, बहुमूल्य सिक्के व कलात्मक चित्र कक्ष में विभक्त किया गया है। वर्तमान में संग्रहालय को पूरे गढ़ भवन में संचालित करने के लिए पूरे गढ़ भवन के सौंदर्यकरण का काम चल रहा है। इस साल के अंत तक सौंदर्यकरण के बाद यह पूरे क्षेत्र का दर्शनीय स्थल बन कर उभरेगा।
- नायब वस्तुओं का संग्रहण केंद्र है
-संग्रहालय अधीक्षक मोहम्मद आरिफ ने बताया कि इस संग्रहालय की स्थापना झालावाड़ के शासक भवानी सिंह ने 1 जून 1915 को की थी। इस संग्रहालय को हाड़ौती का प्रथम संग्रहालय होने का भी गौरव प्राप्त है। वर्तमान में यह संग्रहालय गढ़ पेलेस के राजेंद्र इजलास भाग में पांच साल पहले ही स्थानांतरित ुहआ है, इससे पहले यह गढ़ के बाहर स्थित था। वर्तमान में संग्रहालय में 8 वीं सदी से 18 वीं सदी तक की अति सुंदर व कलात्मक मूर्तियां है, शिलालेख कक्ष में 5 वीं से 19 वीं सदी तक शिलालेखों का संग्रह है। मुद्रा कक्ष में सम्राट कनिष्क से मुगलों तथा झालावाड़ राज्य के शासकों की मुद्राओं का संग्रह है। चित्रकला कक्ष में पाण्डुलिपियां, सुनहरी चित्रों सहित 11 जिल्दों में भागवत, अवतार चरित्र, पुरुषोत्तम महात्मय, कुरान शरीफ, शाहनामा जैसी महत्वपूर्ण निधि है। यहां हाड़ौती शैली के कई हस्त निर्मित चित्र भी संग्रहित है।
-अद्वितीय अद्र्धनारीश्वर प्रतिमा
इतिहासकार ललित शर्मा ने बताया कि संग्रहालय में चंद्रावती नगरी से प्राप्त अद्वितीय मूर्ति अद्र्धनारीश्वर 8 वीं सदी की भारतीय मूर्ति व शिल्पकला की उत्कृष्ट कृति है। लाल बलुआ पाषाण खंड़ पर उत्कीर्ण इस मूर्ति ने इंग्लैण्ड में 1982 में आयोजित भारत महोत्सव में इस धरती, प्रदेश व देश का प्रतिनिधित्व कर भारतीय मूर्तिकला खंड़ में द्वितीय स्थान पा्रप्त किया था। 1990 में जब इसे जयपुर के अल्बर्ट हॉल में तथा जवाहर कला केंद्र की प्रदर्शनी में सम्मान सहित प्रदर्शित किया तो देश के ख्यातिप्राप्त मूर्ति विशेषज्ञों ने इसकी शिल्पकला से प्रभावित होकर इसे मास्टर पीस आब्जेक्ट ऑफ राजस्थान के रुप में मान्यता प्रदान की थी।
-आज गागरोन में रहेगा फ्री प्रवेश
पुरात्तव विभाग के क्यूरेटर मोहम्मद आरीफ ने बताया कि विश्व संग्रहालय दिवस पर शुक्रवार को विश्व धरोहर में शामिल गागरोन किले में पर्यटकों के लिए प्रवेश निशुल्क रहेगा।

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