हिंदुस्तान की सरजमीं पर मिला बसेरा, तो आया चैन

Jitendra Jaikey

Updated: 13 Aug 2019, 06:43:27 PM (IST)

Jhalawar, Jhalawar, Rajasthan, India

हिंदुस्तान की सरजमीं पर मिला बसेरा, तो आया चैन
-पाकिस्तान में अपनी मातृभूमि का मंजर याद आते ही कांप जाती है रूह
-देश के बटवारे का दर्द सांझा करते वृद्घ की भर आई आंख
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. सन् 1947 के समय की स्थिति के दौरान अखंड़ भारत में फेंटियर राज्य (अब पाकिस्तान) के पेशावर जिले की तहसील चारसद्दा में किराने की दुकान चलाने वाले 21 वर्षीय युवक किशनलाल भाटिया की आंखों के सामने आज भी 15 अगस्त 1947 के समय की खौफनाक स्थिति का मंजर तैर जाता है तो वह सिहर उठते है। देश के बटवारे के दौरान उपजी खतरनाक स्थिति के बीच जब ऐलान हुआ कि या तो पाकिस्तान से चले जाओं या फिर धर्म परिवर्तन करो। ऐसी परिस्थितियों में जो जैसा था वेसे ही हिंदुस्तान भागने को आतुर नजर आया। चारो ओर दहशतगर्दी का माहौल था। ऐसे में कैसे विपरित परिस्थतियों में किशनलाल भाटिया पाकिस्तान में अपना सब कुछ छोड़ कर हिंदुस्तान आए इसी बात को वह स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में पत्रिका संवाददाता जितेंद्र जैकी के साथ सांझा कर रहे है।
-परिवार दूर गांव में था
झालावाड़ में 67 साल से रह रहे 94 वर्षीय किशनलाल भाटिया ने बताया कि उनके पिता रामलुभाया भाटिया व माता केमलपुर जिले की तलागंद तहसील के गांव सिंगवाला में रहते थे। जबकि किशनलाल गांव चारसद्दा में किराने की दुकान लगाते थे। उनके बड़े भाई गुरलदास भाटिया, चरणजीत भाटिया व पिता को भी पाकिस्तान में अपनी मातृभूमि व कर्मभूमि छोडऩी थी। 15 अगस्त के बाद वहां स्थिति बहुत खराब हो गई थी। चारो ओर अराजकता फैली हुई थी असामाजिक तत्व खुले आम आतंक बरपा रहे थे। हिंदुस्तान आने वाले बुरी तरह दहशत में थे। वह तो दुकानें को जैसे थी वैसे ही छोड़ कर एक गुरुद्वारे में शरण लेने पहुंच गए थे। वहां उनके भाई भी मिल गए थे लेकिन पिता नही मिल सके। इस दौरान हिंदुस्तान जाने वालों को रेल मार्ग, सड़क मार्ग व हवाई मार्ग से भेजा जा रहा था।
-आधे टिकट पर आए युवा किशनलाल
गुरुद्वारे में रहे रहे किशनलाल को एक दिन उनके बड़े भाई चरणजीत ने कहा कि हवाईजहाज में डेढ़ सीट खाली है तुम तुरंत बुआ के साथ चले जाओं इस पर वह अपनी बुआ के साथ 110 रुपए के आधे टिकट पर हिंदुस्तान पहुंच गए। उनके बड़े भाई चरणजीत भाटिया बाद में रेल मार्ग से पहुंचे। हिंदुस्तान में उन्हे पंजाब के करनाल जिले के कुरुक्षेत्र में विस्थपितों के लिए लगाए शिविर में रखा गया।
-सीमांत गांधी ने की थी रक्षा
पाकिस्तान में उस समय सीमांत गांधी कहे जाने वाले उदय खितमतदार विपक्षी पार्टी के खान अब्दुल गफ्फार ने हिंदुस्तान जाने वाले सभी लोगों को गुरुद्वारा में एकत्र कर उनकी रक्षा करने का आश्वासन दिया था। करीब दो माह तक इस दौरान उन्हे राहत महसूस की थी।
-पाकिस्तान से आते वाहनो में तलाशते थे परिजनों को
किशनलाल भाटिया ने बताया कि वह तो अपनी बुआ के साथ हिंदुस्तान आ गए लेकिन अपने भाई व पिता को तलाश करने के लिए पाकिस्तान से आने वाली बसों व रेल के स्टेशन पर पहुंचते ही उतरने वाले यात्रियों में अपनों को तलाश करना शुरु कर देते थे। इस दौरान उनके भाई चरणजीत मिल गए। 30 जनवरी 1948 को जब पता चला कि महात्मा गांधी को गोली मार दी गई है उस समय संयोग से उनके पिता अमृतसर में उन्हे मिले। तीनों शिविर में करीब डेढ़ साल तक रहे। उनके पिता ने जैसे तैसे करके लुधियाना में ही रहना शुरु कर दिया था। इसी दौरान सबसे बड़े भाई की मृत्यु हो गई थी उसकी पत्नी अपनी पुत्री को लेकर अपने पीहर श्रीगंगानगर चली गई। दोनो भाई रोजगार की तलाश में लगे रहे।
-ऐसे आए झालावाड़
किशलाल भाटिया ने बताया कि दोनो भाई रोजगार की तलाश में भटक रहे थे। इस दौरान कई तरह की मुसीबतों का सामना किया। वह दिल्ली आ गए व फोटोग्राफी सीखी। इसके बाद वह 1952 में रेल मार्ग से वह कोटा आए, लेकिन कोटा उनको रास नही आया इस पर उन्होने फोटोग्राफी व्यापार के सिलसिले में जब झालावाड़ का रुख किया तो यहां के शांत व सुरक्षित माहौल में उनको राहत मिली व दोनो भाईयों ने यहीं बसने का निर्णय किया व अपना व्यापार जमा लिया।
-सालों तक रहे दहशत में
भाटिया ने बताया कि देश के बटवारें के दौरान 1974 में पाकिस्तान क्षेत्र में खौफनाक मंजर से रुबर होने वाले मंजर से वह सालो तक दहशत में रहे। उन्हे डरावने सपने आते थे। आज भी जब वह मंजर को याद करते है तो शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। उन्होने अपनी आंखों से उस समय बात नही मानने वालों के साथ होती ज्यादती देखी थी।

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned