बिना परमिट की कंडम बसों में जोखिम भरा सफर

जिम्मेदारों को ग्रामीणों की जान की परवाह नहीं

By: arun tripathi

Updated: 10 Jan 2020, 03:46 PM IST

झालरापाटन. यहां ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली निजी बसों में यात्री धक्के खा रहे हैं। बस संचालक नियमों की अवहेलना करते हुए सीटों से अधिक यात्री बैठाकर धड़ल्ले से बसें दौड़ा रहे हैं। उन्हें रोकने वाले जिम्मेदार जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं। ऐसे में यात्रियों को परेशान होकर यात्रा करनी पड़ रही है।
जानकारी के अनुसार यहां निजी बस स्टैण्ड से संचालित होने वाली अधिकांश बसों में संख्या से अधिक यात्री बैठा लिए जाते हैं। ऐसे में कई बार तो पूरा किराया देने के बावजूद यात्रियों को खड़े-खड़़े गंतव्य तक यात्रा करने की मजबूरी बन जाती है। इसके अलावा बस संचालक सामान भी भारी मात्रा में यात्री बसों में ही ले जा रहे हैं। इससे उन्हें दुगुना किराया मिलता है। जबकि यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। निजी बसों के संचालक यात्रियों के बारे में नहीं सोच कर टैक्स बचाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यह सब कुछ संबंधित विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते हो रहा है।
इन मार्गों पर हो रहा संचालन
नगर के निजी बस स्टैण्ड से सुबह से लेकर शाम तक भानपुरा, रामगंजमंडी, अकलेरा, रायपुर, सुनेल, पिड़ावा, भवानीमंडी, सहित विभिन्न मार्गों पर प्रतिदिन दर्जनों बसों का संचालन हो रहा है। इनमें से अधिकांश बसें एक ही अनुज्ञा पत्र पर कई मार्ग पर चल रही हैं। नियमित जांच व सख्त कार्रवाई नहीं होने से संचालकों के हौंसले बुलंद हैं। इतना ही नहीं जिम्मेदारों की अनदेखी का खामियाजा यात्रियों को भी भुगतना पड़ रहा है।
सरकार को भी लगा रहे राजस्व का चूना
निजी बसें अधिकांशतया राज्य परिवहन निगम के बस स्टैण्ड के बाहर से ही संचालित हो रही है। जिससे रोडवेज बसों में यात्रीभार कम हो रहा है। इसका सीधा असर रोडवेज के राजस्व पर पड़ रहा है। साथ ही मुख्य सड़क पर यातायात में भी बाधक बन रहे हैं।
कथित रूप से अधिकांश बिना परमिट की बसें
कथित रूप से अधिकांश निजी बसें बिना परमिट, बिना बीमा तथा कंडम घोषित होने के बावजूद संचालित की जा रही है जो लोगों की जान के लिए जोखिम साबित हो सकती है। कार्रवाई के अभाव में बेखौफ यातायात नियमों का उल्लघंन किया जा रहा है। कोई देखने व सुनने वाला नहीं है। सरकारी नियम के तहत किसी भी यात्री बस में कोई दिव्यांग सफर करता है तो उसे किराए में छूट का प्रावधान है और महिलाओं के लिए रिजर्व सीट की व्यवस्था है, लेकिन इनकी निजी बसों में पालना नहीं हो रही है।
-मैं अपने गंाव से झालरापाटन निजी बस से सफर करता हूं। इन बसों में अधिकांश सीटें बैठने योग्य नहीं हंै। बसों की हालत भी अच्छी नहीं है, जिससे कई बार रास्ते में ही खराब होने से समय अधिक लगता है।
बालचंद लोधा, यात्री रामनिवास गांव
-रोडवेज के मुकाबले प्राइवेट बसां की स्थिति अच्छी नहीं है, इनमें सवारियां अधिक होने पर किराया भी मनमाना वसूला जाता है। बैठने के लिए भी सीटें सही नहीं हंै। जगह जगह रोकने से समय भी अधिक लगता है। कई बसें तो ऐसी हैं जो मार्ग पर चलने योग्य नहीं हैं।
मांगू सिंह, यात्री निवासी खटकट
-प्राइवेट बस में रोडवेज बस से किराया ज्यादा लिया जाता है और समय भी उससे ज्यादा लगता है। बस में सवारियां अधिक होने पर महिलाओं को बैठाने के लिए सुविधा नहीं दिलाई जाती है, कई बार खड़े-खड़े सफर करना पड़ता है।
सुलोचना बाई, यात्री पांच्याखेड़ी गंाव
-झालरापाटन से सुनेल पिड़ावा की सभी बसो के अनुज्ञापत्र वाया, झूमकी होकर बने हुए हैं, लेकिन इनमें से इक्का-दुक्का बसें ही झूमकी होकर चल रही हैं। इसके अलावा भी अन्य निजी बसें अनुज्ञापत्र में निर्धारित ग्रामीण क्षेत्र में होकर नहीं चलाई जा रही है, जिससे ग्रामीणो को बस सेवा का उचित लाभ नही मिल रहा है।
राकेश गुप्ता, यात्री झूमकी गांव
-झालरापाटन से कई रूट पर निजी बसों का संचालन होता है, इनकी समय समय पर जांच की जाती है। इनमें से कई बसें कंडम और एक ही परमिट पर अधिक बसें संचालित होने की बात संज्ञान में आई है, इसकी अभियान के रूप में जांच की जाएगी। इसके साथ ही निजी बसों में सरकार के मापदंड के अनुरूप यात्रियों को मिलने वाली सुविधा को भी देखा जाएगा। मापदंड के विपरित संचालित होने वाली बसों के संचालकों के विरूद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी।
समीर जैन, जिला परिवहन अधिकारी, झालावाड़
-नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
जगदीश प्रसाद, शहर थाना प्रभारी झालरापाटन

arun tripathi Desk
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