scriptSaved land with good yield | अच्छी उपज लेने के साथ सहेजी धरती | Patrika News

अच्छी उपज लेने के साथ सहेजी धरती

किसान दिवस विशेष....
- जैविक खेती की ओर बढ़ रहा किसानों का रूझान
- डीजीडी में 60 फीसदी योगदान

झालावाड़

Published: December 23, 2021 04:55:24 pm

हरि सिंह गुर्जर

झालावाड़.खाने का लाजवाब स्वाद और रसोई में लगे तड़के की महक से राजस्थान का हर कोना झालावाड़ के किसानों की मेहनत से अछूता नहीं रहा है। प्रदेश के किसानों की मेहनत मंडियों और बाजार से होकर देश के हर घर को महका रही है। बात चाहे शाही दावत की हो या विदेशी मेहमानों के स्वागत की या फिर शादी और तीज-त्योहार। जब-जब थाली में लजीज व्यंजन परोसे जाते हैं तो कहीं न कहीं प्रदेश की खुशबू बिखर ही जाती है।जिले के किसानों ने अपनी मेहनत से देश के उच्च कोटी के वह अनाज व सब्जियों का उत्पादन किया हैं जो देश में कहीं और किसी भाग में नहीं होते। कलौंजी, अश्वगंधा, धनिया, संतरा, मैथी, पालक,खीरा जैसे उत्पाद में झालावाड़ की विशेष पहचान है।
आईये किसान दिवस पर जिले के प्रगतिशील व जैविक खेती में अपने आप को लगाए हुए आधा दर्जन किसानों किसानों के नवाचार से आपको रूबरू करवाते हैं। कई किसान ऐसे भी है जो पूरी तरह से जैविक कर धरती मां को रासायनिक नुकसान से बचाने का बीडा उठा रहे हैं। पेश है नवाचार करने वाले की विशेष रिपोर्ट......
Saved land with good yield
अच्छी उपज लेने के साथ सहेजी धरती
खरपतवार नाशक धरा को कररही बंजर-
1.जिले के असनावर तहसील के पद्मश्री हुकमचन्द पाटीदार का कहना है कि वो 40 एकट में चना, कलौंजी, मैथी, गेहू, प्याज, लहसुन आदि पैदा कर रहे हैं। पाटीदार ने बताया कि किसन जैविक खेती को अपनाएं इससे स्वयं व देश के लोगों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।
संदेश-
किसान खेतों मेें खरपतवारनाशक का बहुत ज्यादा प्रयोग कर रहे हैं, इससे जमीन बंजर होती जा रही है। जो बीज उग गया वो सभी खेतों के लिए फायदें मंद है। उसे निकालने के लिए मानव संसाधन का प्रयोग करें, उसका भी खाद खेतों में लगता है। एक शोध में सामने आया कि धरती में न्यूनतम 0.90 के स्तर तक कार्बन की जरुरत होती है। जबकि अभी धरती में 0.0 5कार्बन आ रहा है। किसान दिवस पर यही संदेश है कि प्राकृतिक खाद को अपनाएं नहीं तो आने वाले समय में बंजर जमीन में बीज उगना बंद हो जाएगा।
किसानों की परेशानी पर ध्यान दें सरकार
2.जिले के हिम्मगढ़ निवासी युवा जैविक किसान हरकचन्द दांगी का कहना है कि किसान दिवस मनाने का तभी फायदा है जब सरकार किसानों की परेशानी समझे। युवा किसान 2बीघा में पूरी तरह से जैविक खेती करते हैं। जिसमें स्वयं के लिए सब्जियां व गेहूं का उत्पादन करते हैं। किसान का दर्द है कि जैविक में पर्याप्त लागत नहीं मिल पाती है। ऐसे में किसानों की मजबूरी है कि वह रासायनिक खाद आदि काम मेंं लेते हैं। सरकार को उन्हे पशुपालन पर अनुदान देना चाहिए ताकि वह प्राकृतिक खेती कर सकें।
संदेश- किसान दिवस की सभी किसान भाईयों को शुभकामना। सभी को मेरी से यही संदेश है कि जैविक अपनाएं कुछ साल उत्पादन कम होगा, लेकिन खर्चा कम होने से लागत कम आती है। धीरे-धीरे अच्छा जमीन की उर्वरवा क्षमता बढ़ती है। इंसान व पशु-पक्षी आदि की सेहत भीखराब भी नहीं होती है।
धरती मां को बचाना है तो हर किसान को जैविक की ओर आना होगा

3.जिले के धतुरिया निवासी देवीलाल गुर्जर ने बताया कि वो दो बीधा में अश्व गंधा, 2 बीघा में कलौंजी, एक-एक बीघा में गेहूं व धनिया, आधा बीघा में चने ले रहे हैं। इसके साथ ही पपीता के 100 पौधे भी लगा रखे हैं। गुर्जर का कहना है कि ये पूरी तरह से जैविक कर रहे हंै। प्राकृतिक खेती अगर करेंगे तो लागत भी कम आएगी उत्पादन भी अच्छा होगा। गुर्जर जिवामृत व जैविक किटनाशक का ही प्रयोग करते हैं। इसके साथ ही इंदौर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एग्रो मिट,जयपुर सहित कई जगह जैविक की जानकारी दे चुके हैं।
संदेश-
अगर धरा तो बचाना है तो एक गाय रखे और उससे जिवामृत व जैविक किटनाशक बनाओ। एक गाय के गो-मूत्र से 15 बीघा जमीन की दवाई बनाई जा सकती है। मृदा व इंसानों की सेहत को स्वाथ्य रखना है तो जैविक खेती करें।
लगातार जैविक खेती करने से फसलों में कोई रोग नहीं आता
4. जिले के ओडियाखेडी निवासी युवा किसान रघुवीर धाकड़ ने 4 हजार संतरे के पौधे लगा रखे हैं ,जिसमें से वो पूरी तरह से 1 हजार में जैविक फल लेते हैं। धाकड़ ने लहसुन, गेहू, कलांैजी धनिया व मैथी लगा रखी है जो पूरी तरह से जैविक करते हैं। किसान का कहना है कि जैविक से अच्छा उत्पादन मिलताहै, लागत भी कम आती है। लंबे समय तक जमीन की उर्वरा क्षमता बनी रहती है। फसलों में पीलापन व अन्य बीमारियां भ्पाी नहीं आती है। रासायनिक उत्पाद डालने से 10 ग्राम मिट् टी में रहने वाले एक करोड़ लाभदायक बेक्टेरिया मर जाते हैं। किसान जानकारी के अभाव में अनावश्यक जहरीली दवाइयां खाद डाल रहे हंै, इसके दुरगामी परिणाम खतरनाक होंगे।
संदेश-जैविक खेती को उपनाएं। केंचुए व कल्चर खाद आदि का प्रयोग करें। इसका परिणाम धीरे-धीरे आता है लेकिन लंबे समय तक फायदेमंद होता है।
आदर्श सब्जी वाटिका से कमा रहे लाखों रुपए
5.जिले के हरिगढ़ के निकट हीचर निवासी रूपचन्द गुर्जर ने अपने एक बीघा खेत में आदर्श सब्जी वाटिका लगा रखी है। जिसमें पालक, बैंगन, आलू, गिलकी, लौकी, मैथी, धनिया, मूली आदि लगा रखी है। गुर्जर इस एक बीघा से हर रोज 6-7 सौ रुपए कमा रहे हैं। गुर्जर सब्जियों को कहीं बाजार में बैचने नहीं जाते हैं। जैविक व स्वादिष्ट होने से लोग बाड़ी से ही स्वयं लेकर जाते हैं।
संदेश-
मेरा किसान भाईयों को एक ही संदेश है कि गोबर की खाद डाले इससे जमीन भी बंजर नहीं होती है। डीएपी - यूरिया खाद में रेत मिलाकर नकली खाद आ रही है। किसान उससे मन समझा रहे हैं। उससे फायदा कम नुकसान ज्यादा हो रहा है। किसान गाये पाले और देशी खाद डाले।
आय कम खर्चा ज्यादा
6.जिले के अकलेरा क्षेत्र के दतिला निवासी प्रगतिशील किसान जयेन्द्रसिंह तंवर का कहना है कि उन्होंने 3-4 बीघा जमीन में सब्जियां, स्ट्रॉबेरी, तरबूज, खरबूज, करैला, बैंगन, पालक, मैथी, मूली, गाजर आदि लगा रखी है। जिसे पूरी से जैविक करते हैं। किसान जानकारी के अभाव में सीधे दुकानदार से रासायनिक खाद व अन्य दवाईयां लाकर डाल रहे हैं। इससे खर्चा ज्यादा आ रहा है।
संदेश-
किसानों को मेरा यही संदेश है कि अनावश्यक रसायनों का प्रयोग नहीं करें। सब्जियों व कई फसलों में किसी प्रकार के खाद की जरूरत नहीं होती है इनमें गोबर की खाद ही पर्याप्त होती है।लेकिन किसान जानकारी के अभाव में अंधाधुंध रसायनों का प्रयोग कर रहेहैं। किसान तकनीकी खेती करें, अच्छा मुनाफा मिलेगा।

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