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handicraft products...मुर्गी के पंखों से बना रहे शॉल-साड़ी

. हमारे उत्पादों का विदेश में डंका: बुनकरों के हुनर के विदेशी कायल
. अमरीका और नीदरलैण्ड में सप्लाई, वेस्ट से बन रहा बेस्ट

झालावाड़

Published: December 27, 2021 02:16:58 pm

रणजीतसिंह सोलंकी .झालावाड़. पूरी दुनिया में वेस्ट से बेस्ट बनाने की अवधारणा पर जोर दिया जा रहा है। जिले के एक छोटे से कस्बे के बुनकर परिवार ने नवाचार करते हुए वेस्ट से बेस्ट बनाने का काम शुरू किया तो आज दुनिया कायल हो गई है। बुनकर के हस्त-शिल्प के उत्पाद सात समंदर पार धूम मचा रहे हैं। बात चाहे दुनिया के सबसे चमक दमक वाले अमरीका के कैलीफोर्निया की हो या नींदरलैण्ड की। बुनकर ने अपने हुनर से मुर्गे-मुर्गियों के अनुपयोगी पंखों से शॉल, गमछे आदि तैयार किए हैं, जिनकी विदेशों में आपूर्ति की जा रही है। जिले के असनावर कस्बे के 65 वर्षीय सुजानमल बुनकर ने अपने हस्त शिल्प के हुनर से मुर्गी के पंखों से शॉल, साड़ी और गमछे तैयार किए हैं। बुनकर को अमरीका के एक संगठन ने यह उत्पाद तैयार कर भेजने का अग्रिम ऑर्डर दिया है। उनके यहां अभी दो दर्जन बुनकर दिन-रात यह उत्पाद तैयार करने में जुटे हैं। सुजानमल अपने हुनर को पत्नी व रिश्तेदार ऐश्वर्या के साथ मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं। अब इसकी कमान ऐश्वर्या बुनकर ने संभाल ली है। उन्होंने आसपास की महिलाओं को भी हस्त-शिल्प से जोडऩे की पहल की है। महिलाओं को प्रशिक्षित कर हस्त-शिल्प के कई तरह के उत्पाद तैयार किए जाने लगे हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब ढाई सौ लोग इस रोजगार से जुड़े हुए हैं।
झालावाड़ और कोटा से आते हैं पंख
ऐश्वर्या ने बताया कि वह जयपुर में एक संस्था के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुई थीं, उसकी दौरान अमरीका से आए प्रतिनिधिमण्डल ने वेस्ट से बेस्ट बनाने के बारे में बताया था और उन्होंने सिखाया कि बूचडख़ाने में रोजाना लाखों मुर्गे-मुर्गियों को काटकर उनके पंख नदी-नालों, नहरों और तालाबों में फेंक देते हैं। इससे नदियों और नहरों का पानी भी दूषित होता है। इनके पंखों से पहली बार शॉल, साड़ी, गमछे तैयार कर पहले सैंपल के बतौर भेजे थे, वह पसंद आने के बाद ऑर्डर पर यह तैयार किए जा रहे हैं।
चुनौती है, लेकिन अच्छा काम है
ऐश्वर्या ने बताया कि झालावाड़ में मुर्गे-मुर्गियों के पंखों को लेने के लिए कलक्शन सेन्टर बनाया है। यहां दस-पन्द्रह किलो पंख एकत्रित होते ही असनावर लेकर आते हैं और सफाई की जाती है। इसके बाद गर्म पानी में खूब उबालते हैं। आठ-दस दिन तक सूखा देते हैं। इस प्रक्रिया में काफी मेहतन लगती है और दुर्गंध भी आती है। इसके बाद सुखाकर पैकिंग नागरपुर भेजते हैं। वहां मशीनों में प्रोसेसिंग किया जाता है। फिर वापस लेकर आते हैं। यहां लूम पर धागे तैयार किए जाते हैं। इसके बाद अलग-अलग तरह के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। एक शॉल 700 से 20 हजार रुपए तक बिकता है।
रद्दी के हैण्ड और लैपटॉप बैग खूब पसंद आए
ऐश्वर्या ने बताया कि पिछले सात-आठ माह से अखबारों की रद्दी से हैण्डबैग, लैपटॉप बैग आदि तैयार किए जा रहे हैं। चार माह से कैलीफोर्निया से पेपर रद्दी से बनाए गए हैण्डबैग और लैपटॉप बैग का अग्रिम ऑर्डर आया है। अब तक करीब पांच हजार बैग सप्लाई की जा चुके हैं। आगामी एक साल के अग्रिम ऑर्डर आ चुके हैं। अखबार की रद्दी झालावाड़ के अलावा कोटा, भीलवाड़ा और मध्यप्रदेश से मंगवाई जा रही है।
. मुर्गी के पंखों से शॉल, साड़ी आदि तैयार करने में देश में संभवत: पहले बुनकर है। वेस्ट से बेस्ट उत्पाद तैयार करने के लिए राज्य स्तर पर सम्मानित करने का प्रस्ताव भेजा गया है। सुजान मल और ऐश्वर्या के नवाचार को काफी अच्छा रेस्पोंस मिल रहा है। हरिमोहन शर्मा, महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र झालावाड़
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