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भीषण गर्मी में बच्चों का ऐसे रखें खयाल.. डॉक्टर ने ये बताएं उपाए

 

-डी-हाईड्रेशन से उल्टी-दस्त से पीडि़त हो रहे बच्चे, चिकित्सा विभाट अलर्ट मौड़ पर

-देर तक धूप में खेलने व पर्याप्त पानी नहीं पीने से बीमार हो रहे बच्चे

झालावाड़

Published: April 14, 2022 05:16:59 pm

झालावाड़.गर्मी चरम पर है और पारा भी 4० डिग्री पार पहुंच जाने से बच्चे बीमार होने लगे। शरीर में पानी की कमी (डी-हाइड्रेशन) होने से बच्चे उल्टी-दस्त से पीडि़त होकर अस्पताल पहुंच रहे है। जनाना अस्पताल में बड़ी संख्या में परिजन बच्चों को साथ लेकर परामर्श व इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। शिशु रोग विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों के देर तक धूप में खेलने व कम पानी की वजह से कई बार बच्चे बीमार हो जाते हैं।भीषण गर्मी के मौसम में बच्चों को मौसमी बीमारी घेर रही है। शिशु रोग विशेषज्ञों का भी कहना है कि बच्चों को धूप में न जाने दें तथा साफ पानी तथा तरल पदार्थ पिलाते रहें। चूंकि उल्टी-दस्त होने से बच्चों में एकाएक कमजोरी आ जाती है, जिसके चलते अभिभावक भी चिंतित हैं। भीषण गर्मी में बच्चे स्कूल से लौटकर आने के बाद कुछ सुस्त से नजर आ रहे हैं। गर्मी के मारे पसीना-पसीना हो जाते हैं, इससे थकान भी ज्यादा हो रही है। बच्चों में इन दिनों उल्टी-दस्त एक साथ होने लगे। ऐसे में डॉक्टर को दिखाने पर शरीर में पानी की कमी तथा गर्मी का प्रकोप बता रहे हैं।
Take care of children like this in scorching heat.. doctor told these measures
भीषण गर्मी में बच्चों का ऐसे रखें खयाल.. डॉक्टर ने ये बताएं उपाए
आसमान से बरस रही आग-
इन दिनों जिलेभर में आसमान से भीषण आग बरस रही है। वहीं कई क्षेत्रों में पीने का साफ व ठंडा पानी नहीं मिलने से भी बच्चों में बीमारी हो रही है।

गर्म हवाएं कर रही परेशान-
गर्मी इस बार कहर बरपा रही है ओर अप्रेल माह के शुरुआती दिनों में ही पारा 42डिग्री तक पहुंच गया तथा मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 14 अप्रेल को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है। इतना तापमान पिछले वर्षों में मई व जून में हुआ करता था, लेकिन इस बार गर्मी ने अप्रेल से ही कहर ढाना शुरू कर दिया। ऐसे में बच्चों व बुजुर्गों की देखरेख करना जरूरी हो गया।
शिशु रोग विशेषज्ञ : डॉ. राजेन्द्र नागर से सीधी बात

सवाल: बच्चे अधिक बीमार हो रहे हैं क्या वजह है

जवाब: इन दिनों गर्मी बहुत अधिक पड़ रही है तथा बच्चों में उल्टी-दस्त व डायरिया की शिकायत आ रही है। अधिक गर्मी के बीच शरीर में पानी की कमी भी हो रही है।
सवाल: बीमार होने की वजह क्या हो सकती है
जवाब: इस बार तेज गर्मी जल्दी पडऩे लगी है तथा धूप में खेलने और शरीर में पानी की कमी होने पर उसे समय पर पानी न मिलने तथा अमानक व दूषित पानी या कुछ खाने से यह स्थिति बन रही है।
सवाल: परिजन क्या करें, ताकि बच्चे बीमार न हों
जवाब: बच्चे धूप में खेलने से बचें तथा घर से निकलते समय कुछ ताजा खाएं तथा पर्याप्त पानी पीकर निकलें। समय-समय पर साफ पानी व तरल फल आदि खाएं तथा रात का खाना खाने से बचें।

बढ़ते तापमान को देखते हुए किया अलर्ट
झालावाड़.प्रदेश मेें गर्मी के मौसम एवं अतिरिक्त तापमान को देखते हुए चिकित्सा विभाग द्वारा जिले के सभी चिकित्सा प्रभारियों को निर्देश दिए है कि सभी अस्पताल में प्रसव पूर्व, प्रसव पश्चात वार्ड तथा प्रसव कक्ष में थर्मामीटर लगाए, जिसमें सामान्य 15 से 18 डिग्री सेन्टीग्रेट तापमान रखा जाए तथा कूलर, पंखे व वेंटीलेशन की उपयुक्त व्यवस्था करें, रोगीयों के लिए ठंडे पीने के पानी, बैठने के लिए छाया की व्यवस्था साथ ही लू, ताप- घात के रोगीयों के लिए चिकित्सा संस्थान पर दो बैड आरक्षित रखे। सीएमएचओ डॉ.साजिद खान ने बताया कि
सभी चिकित्सा अधिकारी अस्पताल में सुबह 8 बजे से 8:30 बजे के बीच भर्ती मरीजों का निरीक्षण कर लिया जाएं एवं 9 बजे से 10 बजे के बीच में सभी प्रसूताओं को उनके निवास स्थान पर आवश्यक रूप से छुडवाया जाना सुनिश्चित करें। लू ताप घात से होने वाली मृत्यु का पोस्ट मार्टम रिपोर्ट मेडिकल बोर्ड द्वारा ही करवाया जाए। जिला औषधी भण्डार से लू ताप घात के उपचार केलिए आवश्यक दवाईयॉ व ओआरएस पर्याप्त मात्रा में चिकित्सा संस्थानों पर रखे तथा पीने के पानी की टंकीयों की सफाई करवाये। नरेगा में काम करने वाले मजदूरो ;मेटद्ध हेतु दवाईयॉ उपलब्ध कराने हेतु चिकित्सा अधिकारीयों को निर्देश दे कि वह अपने अधीनस्थ एएनएम को पाबन्द करें की अपने क्षैत्र में दवाईयॉ उपलब्ध करावे। लू ताप घात के लक्षण मिलने पर मरीज को तुरन्त वार्ड में भर्ती कर आईवी फ्लूइड लगाया जाएं।
खाली पेट नहीं निकले घर से-
डिप्टी सीएमचओ डॉ. लेखराज मालव ने बतायाकि आमजन घर से बाहर निकलते समय भूखे पेट नहीं निकले हल्का भोजन लेवे,भोजन के साथ प्याज, केरी, केरी का आंच, छाछ, दही आदि का सेवन अवश्य करेें। प्रात: 10 से पूर्व व सांय 5 के बाद ही घर से निकले। मोटर साइकिल चलाते समय बच्चों को आगे न बिठाए। अपने साथ साफी, तौलिया, सूती कपडा अवश्य रखे। बच्चें, गर्भवती महिला व बुजुर्ग लू ताप घात के प्रति काफी संवेदन शील होते है इनका विशेष ध्यान रखे।
ये लू तापघात के लक्षण-
घबराहट होना, गला सूखना, होट सूखना, ठण्डा पसीना आना, बैचेनी होना, चक्कर आना, जी घबराना, सिर का भरीपन व सिरदर्द होना। मालव ने बताया कि लू तापघात से बचाव ही उपचार है। तेज धूप में निकलने से बचे, आवश्यक हो तो पूरे वस्त्र पहनकर निकलें। घर से बाहर निकलने से पहले भरपेट पानी पिए, लू ताप घात से प्रभावित रोगी को तुरन्त छायादार स्थल पर लिटा दें, रोगी की त्वचा को गीले कपडे से स्पंज करते रहे तथा रोगी के कपडों को ढीला कर दें, रोगी होश में हो तो उसे ठण्डे पेय पदार्थ दे।

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