-मरम्मत के बाद चार माह में ही जवाब दे गई आधुनिक तकनीक से बनी

Hari Singh Gujar

Publish: Apr, 10 2019 02:36:39 PM (IST)

Jhalawar, Jhalawar, Rajasthan, India




झालावाड़.जिले का कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट चायना की आधुनिक तकनीक पर बना पावर प्लांट राजस्थान का प्रथम पावर प्लांट है। लेकिन थर्मल की पहली व दूसरी यूनिट एक साल में ही दो बार खराब हो गई है। थर्मल की दूसरी यूनिट प्रथम बार 7 अप्रेल 2018 को खराब हुई थी, इसे सही करवाकर दिसम्बर माह में फिर से चालू किया था, लेकिन चलने के चार माह बाद ही थर्मल की दूसरी यूनिट 4 अप्रेल 2019 को फिर से खराब हो गई है। अब थर्मल के उच्चाधिकारी यूनिट को सही करवाने के लिए भेल से संपर्क कर रहे हैं। लेकिन दूसरी यूनिट के उत्पादन शुरू होने के 3 साल में ही खराब होना। करोड़ों रूपए की लागत से अतिआधुनिक तकनीक से बने होने पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

दूसरी यूनिट को सही करने पर इतना आया था खर्चा-
दूसरी यूनिट को शुरू हुए 2 वर्ष 8 माह ही हुए थे। कि 7 अप्रेल 2018 को जनरेटर में बड़ी तकनीकी खामी आ गई थी, इससे वह बंद हो गई थी, इसके लिए भेल व डोंग-फोंग आदि कंपनियों के एक्सपर्ट को भी बुलाया गया था। बाद में भेल के इंजीनियरों से यूनिट का जनरेटर व रोटर सही करवाया गया था, सही होने में करीब 26 करोड़ रूपए का खर्चा आया था। इसे दिसम्बर 2018 में सही कर उत्पादन लेना शुरू किया था, कि अचानक से 4 अप्रेल को जनरेटर में तकनीकी खामी आने से दूसरी यूनिट फिर से बंद हो गई है। अभी तक यूनिट से चार माह में करीब 16 हजार यूनिट का ही उत्पादन शुरू हुआ था, कि 4 अप्रेल से यूनिट फिर से बंद हो गई। ऐसे में थर्मल अधिकारियों की एक बार फिर चिंता बढ़ गईहै, कि जो स्थिति पूर्व में आई थी फिर से वैसी ही स्थिति आ गई है। इस वक्त दोनों यूनिट बंद होने से जिले 1200 मेघवाट की सप्लाई बंद हो गई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी दूसरी यूनिट गारंटी पीरियड में होने से ज्यादा खर्चा नहीं होगा।

ऐसे हुई थी शुरूआत-
कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट का शिलान्यास 3.9.2008 को पूर्व सीएम वसुन्धरा राजे ने किया था। इसका टैंडर हुआ 9.7.2008 को मैसर्स बीजीआर एनर्जी सिस्टम चैन्नई के हुआ। इस कपंनी ने पूरा सिस्टम लगाकर चालू करके दिया था। लेकिन बार-बार यूनिट के खराब होने से एक बार फिर सही होने में लंबा समय लगेगा।

जाने कितनी भूमि व बजट लगा-
-प्रथम यूनिट से वाणिज्यिक उत्पादन 7.5.2014 को शुरू
-दूसरी यूनिट से 25.7.2015 को शुरू हुआ।
-जमीन 842 बीघा सरकारी,1388 बीघा निजी भूमि।
-1400 बीघा जमीन में कन्ट्रक्शन।
-600-600मेगावाट की दो यूनिट।
-12 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है थर्मल,पांच गांवों की सीमा में।
-एशिया का सबसे बड़ा कूलिंग टावर,ऊंचाई 202 मीटर।
-कुल प्रोजेक्ट कोस्ट 9479.51 करोड़

चायनीज तकनीक पर आधारित-
600 मेगावाट का पहला थर्मल पावर प्लांट है जो आधुनिकतम चायनीज तकनीक पर बना हुआ है। इसमें बीजीआर द्वारा डोंग-फोंग कपंनी का जनरेटर, टरबनाईन,बायलर सहित कई उपकरण लगाए गए है।

देशी होती तो समय व धन की होती बचत-
जानकारों का कहना है कि यदि विदेशी कंपनी की बजाए देश में मौजूद भेल जैसी नामी कंपनियों से बनवाया गया होता तो, किसी भी तकनीकी खामी आने पर इनता खर्चा नहीं होता। तथा समय की भी बचत होती। वहीं यूनिट को सही करने में लगने वाला अतिरिक्त खर्चा व समय की बचत होती।
इतना हो रहा प्रतिदिन नुकसान-
दूसरी यूनिट के बंद होने से करीब साढ़े तीन करोड़ प्रतिदिन का नुकसान थर्मल पावर प्लांट को रहा है। इसके चलते पावर प्लांट का नुकसान बढऩे की संभावना है ऐसे में इस यूनिट को शीघ्र चालू करवाना जरुरी है।
-हां
हां प्रथम यूनिट 6 को व दूसरी 4 अप्रेल को बंद हो गई है। प्रथम यूनिट को सोमवार रात तक सही कर दिया जाएगा, वहीं दूसरी यूनिट अभी गारंटी में है भेलइंजीनियरों से संपर्क किया जा रहा है। वहां से टीम आने के बाद ही सही हो पाएगी।
एमएल शर्मा, चीफ इंजीनियर, थर्मल पावर प्लांट, झालावाड़

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