करोड़पति रहे रिटायर्ड आईएफएस का बाहुबलियों ने हड़प लिया सबकुछ

14 विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर व अपनी पेंशन मुम्बई के वृद्धाश्रम को आजीवन दान करने वाला शख्स वक्त के सितम से हार गया। नतीजतन झालावाड़ में रैन बसेरा म

By: Hari Singh gujar

Published: 04 Jan 2018, 09:50 PM IST

झालावाड़. तीन विषयों में डॉक्टरेट, भारतीय विदेश सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी, देश-विदेश के १४ विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर व अपनी पेंशन मुम्बई के वृद्धाश्रम को आजीवन दान करने वाला शख्स वक्त के सितम से हार गया। नतीजतन झालावाड़ में रैन बसेरा में जिंदगी काटने को मजबूर है। ये शख्स हैं बुलंद शहर उत्तप्रदेश के निवासी डॉ.गोपाल कृष्ण शर्मा।


हुआ यू कि बुलंद शहर के बाहुबली ने शर्मा की सारी जायदाद हड़प कर उन्हें दर-दर की ठोकर खाने पर मजबूर कर दिया। कुछ सितम हर्षद मेहता की क?पनी में जमापूंजी की रकम डूब जाने से भी हुआ। शर्मा कई शहरों की खाक छानते हुए वर्तमान में झालावाड़ में नगर परिषद की ओर से संचालित गरीबों के लिए बने रैन बसेरा में जिंदगी के आखिरी दिन गिन रहे हैं। शर्मा को भीख मांग कर खाना पसंद नहीं, इसलिए वह कुछ काम करके जिंदगी के बाकी दिन काटना चाह रहे हैं लेकिन इसमें बूढ़ी काया उनके बुलंद हौसले में रोड़ा बन रही है।

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कई भाषाओं का ज्ञान-
भारतीय विदेश सेवा १९६० बैच के टॉपर रहे शर्मा की पहली पोस्टिंग फ्रांस में हुई। इसके बाद वह नीदरलेंड में भारत सरकार के राजनीतिक सलाहकार रहे। १९७७ में उन्होंने विदेश सेवा से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह साढ़े सात साल तक वह ह्यूमन इकॉलोजी कॉङ्क्षसल जेनेवा के चेयरमैन रहे। बाद में उन्हें बीस हजार डॉलर मासिक पेंशन मिलना शुरू हो गई। अपना कॅरियर इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर के तौर पर शुरू किया। उन्हें मराठी, गुजराती, पंजाबी, हिंदी, उर्दू व अंग्रेजी भाषा का पूरा ज्ञान है।

 

 

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पत्नी भी डॉक्टर थी-
डॉ.गोपाल कृष्ण शर्मा ने बताया कि उनका विवाह अलीगढ़ निवासी एमबीबीएस डॉ. मिथलेश से हुआ था। दोनों उच्च पद पर रह कर जीवन यापन कर रहे थे लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर था। सन् १९६५ में कैंसर से पत्नी की मौत हो गई। उनके कोई संतान नहीं हो सकी। अकेले होने से शर्मा को खर्च के लिए ज्यादा रकम की जरूरत नही पड़ती थी इसलिए उन्होंने मुंबई के विले पार्ले में संचालित वृद्धाश्रम 'विद्याÓ को आजीवन के लिए अपनी पेंशन लिखित में दान कर दी और कभी भी वृद्धाश्रम से किसी भी प्रकार का फायदा नही उठाने का प्रण ले लिया।

 


बाहुबलियों ने ढाया सितम-
नोएड़ा में रह रहे डॉ. शर्मा से वहां के राजनीतिक रसूखात वाले बाहुबली ने अपने स्वार्थ के काम करवाने चाहे लेकिन सादा जीवन जी रहे शर्मा को उनका समझौता पसंद नहीं आया। फिर क्या था बाहुबली से उनकी दुश्मनी हो गई और अपने लोगों के दम पर शर्मा की सारी जायदाद पर कब्जा कर लिया। इसी बीच उनके पास कुछ जमापूंजी के नाम पर बीस लाख रुपए थे लेकिन यह रकम उन्होंने एक दोस्त के कहने पर हर्षद मेहता की कंपनी में लगा दी और सारी पूंजी डूब गई। मुफलिसी के दौर में व बाहुबली के कोप से वह जान बचा कर वहां से निकल गए।

 

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भाई भाभी का भी हो गया अपहरण-
डॉ. शर्मा ने बताया कि वे नोएड़ा छोड़ कर मेरठ में रह रहे थे, उस समय मां के श्राद्ध के लिए छोटा भाई गोविंद कृष्ण व उसकी पत्नी प्रमिला मेरठ आ रहे थे। इससे पहले वह नोएड़ा में उनके मकान में रात को रुक गए। उन्होंने अगले दिन आने को कहा लेकिन आज तक नहीं मिल सके। उन्होंने वहां जाकर देखा तो बाहुबलियों का ताला लगा था व उन्हें बताया कि अब इस मकान पर दूसरों का कब्जा है। उन्होंने पुलिस की मदद लेने की पूरी कोशिश की लेकिन वहां बाहुबली के आगे कोई नहीं आया और उन्हें वहां से भी भागना पड़ा।

 


ऐसे पहुंचे झालावाड़

उस समय डॉ.शर्मा मेरठ विश्वविद्यालय में व्याख्याता थे लेकिन वहां भी बाहुबली के लोगों को पता चल गया तो वह मेरठ विश्वविद्यालय में कार्यरत कोटा के प्रदीप लोहमी नामक सहकर्मी के साथ कोटा आ गए और एक विद्यालय के हॉस्टल वार्डन के रूप में काम किया। लेकिन वृद्धावस्था के कारण वह इस पद पर ज्यादा काम नही कर सकें।

इस पर एक अधिकारी के कहने पर झालावाड़ आ गए और एक निजी विद्यालय में शिक्षक की नौकरी की लेकिन शर्मा का कहना है कि स्कूल संचालक केवल उन्हें खाना व रहना ही दे रहा था। अन्य खर्च नहीं मिलने पर उन्हें इस स्कूल से भी हटना पड़ा। वर्तमान में राजकीय अस्पताल में स्थित रैन बसेरा में आसरा मिला। यहां सर्वोदय जन विकास संस्थान के सचिव आमीर खान ने उन्हें संभाल रखा है। उनकी केेंटीन पर चाय नाश्ता, खाना खाने आदि सुविधा मिल जाती है। अस्पताल में रैन बसेरा दूसरी मंजिल पर होने से शर्मा को सीढिय़ां चढऩे में तकलीफ हो रही थी। इस पर आमिर खान की मदद से उन्हें शहर के पुराना मोटर गैराज पर संचालित नि:शुल्क रैन बसेरा में ठौर मिली है। शर्मा ने कलक्टर डॉ. जितेंद्र सोनी से भी गुहार लगाई इस पर कलक्टर ने उन्हें आश्वासन दिया कि शीघ्र ही जिला मु?यालय पर संचालित होने वाले सरकारी वृद्धाश्रम में उन्हें काम दिया जाएगा।

रिपोर्ट-जितेंद्र जैकी

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