टमाटर-प्याज का किसानों को नहीं मिल रहा भाव

 

- लागत भी नहीं निकल पा रही किसानों की

By: harisingh gurjar

Published: 18 Apr 2020, 08:33 PM IST

झालावाड़.कोरोना लॉकडाउन में जिले के किसान खासे परेशान नजर आ रहे हैं। किसान इन दिनों मंडियों में टमाटर-प्याज नहीं ला पा रहे हंै। वहीं जो ला रहे है उनके टमाटर नहीं बिक पा रहे हैं। ऐसे में किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। किसानों ने बताया कि लॉकडाउन के चलते बाहर की मंडियों में प्याज-टमाटर नहीं ले जा पा रहे हैं। वहीं गर्मी बढऩे से टमाटर पकने लग गए है, ऐसे में जल्दी खराब होने शुरू हो गए है। सरकार किसानों को अन्य फसलों की तरह समर्थन मूल्य पर प्याज की खरीद करें तो किसानों को भी फायदा होगा वहीं जिन लोगों को प्याज नहीं मिल पा रहे हैं उन्हें भी प्याज आसानी से मिल सकेंगे।

इसलिए आ रही परेशानी-
मंडियों में सामान्य दिनों की अपेक्षा अभी खरीददार नहीं आ रहे हैं। लोग कोरोना के डर के मारे सब्जीमंडियों में नहीं जा रहे हैं। ऐसे में इन दिनों सब्जी की ब्रिकी कम होने से फुटकर सब्जी वाले, ठेले वाले भी सब्जी बहुत कम ले रहे हैं। ऐसे में कई किसान सब्जी लाते है लेकिन नहीं बिकने के चलते वह वापस सब्जी ले जाते हैं।

7 रुपए किलो बिक रहे प्याज-
प्रगतिशील किसान बालमुकुंद दांगी ने बताया कि सब्जी मंडी में प्याज ले जाने में इन दिनों परेशानी आ रही है। टमाटर व प्याज बाहर की मंडियों में ले जाने में बहुत खर्चा आ रहा है। पहले जो गाड़ी जयपुर 6-7 हजार में जाती थी, वह अब 9 हजार में जा रही है। लॉकडाउन के चलते कोई भी गाड़ी वाला माल ले जाने को तैयार नहीं होता है। टमाटर तो गर्मी बढऩे से 60 फीसदी खराब हो रहे हैं। मंडी में 2 रुपए किलो बिक रहे हैं, ऐसे में भाड़ा भी नहीं निकल पाता है। सरकार से मांग है कि प्याज को समर्थन मूल्य पर खरीद कर जरूरतमंद लोगों को राशन के साथ दे ताकि उन्हें भी प्याज मिल जाएंगे किसानों को भी अच्छा भाव मिल जाएगा। अभी प्याज को रोकेंगे तो भी गर्मी में रखने की जगह नहीं है। इससे भी नुकसान होगा। मैंने एक बीघा का टमाटर व चार बीघा का प्याज बोया था, लेकिन अभी टमाटर में तो बहुत नुकसान हो रहा है।


संकट में किसान ही दे रहे साथ-
धतुरिया निवासी किसान देवीलाल ने बताया कि इस संकट के समय में सभी उद्योग बंद है। लेकिन किसान ही इस संकट के समय में सच्चे साथी है। वह लोगों को सस्ती दर पर गेहूं, सब्जी उपलब्ध करा रहे हैं,तो किसान ही गांवों से शहरों मे दूध पहुंचा रहे हैं। ऐसे में किसानों को हुए नुकसान के चलते सरकार को कुछ राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। ताकि लॉकडाउन व ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई हो सके।

जैसे भेजे थे कैरेट वैसे ही वापस आ गए-
धुबलिया निवासी किसान बालचन्द गुर्जर ने बताया कि दो दिन पहले सब्जी की गाड़ी से मंडी में 5 कैरेट टमाटर भेजे थे। लेकिन जैसे भेजे गाड़ी वाला वैसे ही ले आया। बिके ही नहीं ऐसे में टमाटर को भंैंसे को डाल दिए। इन दिनों टमाटर का भाव नहीं मिल रहा है। दो रुपए किलो में बिक रहे हैं, ऐसे में मंडी भेजने का किराया भी नहीं निकल पा रहा है।


फैक्ट फाइल-
लॉकडाउन से पहले टमाटर की आवक- 500 कैरेट
लॉकडाउन के बाद टमाटर की आवक- 150-200 कैरेट
- लॉक डाउन के पहले प्याज की आवक-500 कट्टी
- लॉक डाउन के बाद प्याज की आवक-100-150 कट्टी

2 रुपए किलो बिक रहा टमाटर-
अभी टमाटर ज्यादा आ रहा है। बिक्री कम हो रही है ऐसे में टमाटर 2 रुपए किलो ही बिक रहा है। इससे किसानों को परेशानी तो होती है। अभी लॉकडाउन में 15 फीसदी ही माल आ रहा है। कोरोना में परेशानी सब्जी को हो रही है। लेकिन हम किसानों को समझा रहे हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग में मास्क लगाकर रहे, कुछ दिनों की बात है जब सब कुछ सही हो जाएगा तो फिर से गाड़ी पटरी पर आ जाएगी। किसानों को टमाटर में इन दिनों ज्यादा नुकसान हो रहा है।
अनीस चौधरी,आड़तिया, सब्जीमंडी, झालावाड़।

harisingh gurjar Reporting
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