डेंगू दिवस पर विशेष: अगर दिखाई दें ये लक्षण, तो तुरंत दिखाएं डाक्टर को

डेंगू दिवस पर विशेष: अगर दिखाई दें ये लक्षण, तो तुरंत दिखाएं डाक्टर को

By: BK Gupta

Published: 16 May 2018, 12:11 PM IST

झांसी। डेंगू के मरीज को अचानक से तेज बुखार, घबराहट होना, आंखों के पीछे दर्द होना शुरू हो जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे मरीज की प्लेटलेट्स कम होने लगती है। इससे उसके नाक व मुंह से खून आना चालू हो जाता है और साथ ही पीठ व भुजाओं पर लाल दाने निकलने लगते हैं। इसके बाद की स्थिति में पल्सरेट बढ़ने लगती है और शरीर में कमजोरी आने के साथ ही अचानक से बेहोशी आने लगती है। इसलिए इस तरह के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। तुरंत ही चिकित्सक की परामर्श से उपचार शुरू कराएं।
ये दिए गए नारे
इस बार राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर 16 मई को स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुछ स्लोगन दिए गए हैं। इनमें 'जन जन का यही हो नारा, डेंगू मुक्त हो शहर हमारा', 'दूर होगी डेंगू की बीमारी, जब होगी हम सबकी भागीदारी' जैसे स्लोगन प्रमुख हैं। यह दिवस प्रदेश सरकार द्वारा “डेंगू के विरुद्ध संयुक्त प्रयास” के विषय पर मनाया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अलावा शिक्षा विभाग, सिंचाई विभाग, जल संस्थान व मनोरंजन विभाग की भी सहभागिता रखी गई है।
ये है डेंगू से निपटने की तैयारी
गर्मी आते ही मच्छरों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ने लगती है, जिससे बीमारियों की संभावनाएं भी होने लगती हैं। इस परेशानी से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से तैयार है। शासन के निर्देशानुसार जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड की स्थापना की गयी है। इसमें 10 बेड की व्यवस्था है। इसके अलावा ब्लॉक स्तर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 5 बेड की व्यवस्था सुनिशिचित की गयी है, जिससे ब्लॉक स्तर पर ही बीमारी से निपटा जा सके।
ये है जांच की व्यवस्थाएं
आरके गुप्ता, जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि छह टीमों द्वारा लार्वीसाईट छिड़काव कर मच्छरों के प्रजनन स्थानों को खाली करवाया जाएगा। मलेरिया अधिकारी का कहना है कि मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला में निःशुल्क एलाईजा की जांच होती है जिससे व्यक्ति में डेंगू के होने का पता चलता है। उन्होंने बताया कि 2014 में 2 डेंगू के रोगी पाये गए। इसके अलावा 2015 में 58, 2016 में 106, 2017 में 8 एवं 2018 में अभी तक एक भी रोगी नहीं पाया गया। लेकिन इन सभी रोगियों में किसी की भी मृत्यु नहीं है। उन्होंने बताया कि डेंगू वाइरस के द्वारा होने वाली बीमारी है और यह एडीज़ मादा मच्छर के काटने से फैलता है। मच्छर की पीठ एवं पैर पर सफ़ेद धारियों होती है इसीलिए इसको ‘टाइगर मच्छर’ भी कहा जाता है। यह मच्छर घर के अंदर ही रहता है और दिन में ही इसका सबसे अधिक प्रकोप रहता है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के मच्छरों का संक्रमण काल अगस्त से नवंबर होता है।
साफ पानी में पनपता है ये मच्छर
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत डेंगू की रोकथाम एवं प्रचार प्रसार हेतु संदेश दिये जाते है। इसके तहत बताया जाता है कि डेंगू का मच्छर साफ एवं ठहरे पानी में पनपता है। यह मच्छर, घर के कूलर, गमले एवं गमले के नीचे रखी प्लेट, पशु पक्षियों के पीने के पात्र, छत पर कबाड़, पुराने टायर आदि चीजों के ठहरे पानी में जन्म लेता है। इसलिए इन सभी पात्रों का पानी प्रत्येक सप्ताह निकालकर अच्छे से साफ करने का संदेश दिया जाता है। इसके अलावा बच्चों को “हर रविवार मच्छरों पर वार” अभियान से जोड़ा जाता है जिसमें ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इन सरल उपायों के बारे में बताया जाता है। वहीं बच्चे इन उपायों को अपने घर व पड़ोसियों को बताते हैं एवं डेंगू रोग को जड़ से भगाने में मदद भी करते हैं। वहीं दिन में फुल आस्तीन के कपड़े एवं मोजे का उपयोग तथा रात्रि में मच्छरदानी का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा बुखार आने पर पैरासिटामॉल दवा का उपयोग एवं जांच कराने के बाद उसके उपचार की सलाह दी जाती है।

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BK Gupta Desk/Reporting
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