scriptAlert Changing Weather Puts Farmers on Alert for Summer Challenges | मौसम विशेषज्ञों का अलर्ट: सर्दी घट रही, गर्मी से चुनौतियों की तैयारी करें किसान! | Patrika News

मौसम विशेषज्ञों का अलर्ट: सर्दी घट रही, गर्मी से चुनौतियों की तैयारी करें किसान!

locationझांसीPublished: Dec 09, 2023 09:13:50 am

Submitted by:

Ramnaresh Yadav

इस बार की सर्दी कम, गर्मी में जोर! मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से बदल रहा है मौसम का चक्र। किसानों के लिए नए चुनौतीपूर्ण समय की तैयारी!

Preparing for winter: advice and tips from meteorologists
बुआई और प्रक्रिया: सही तकनीक से करें खेती की शुरुआत।
उत्तर प्रदेश के झांसी जनपद में दिसम्बर का पहला सप्ताह बीत चुका है, लेकिन तापमान नीचे आने का नाम नहीं ले रहा। इस बार वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का चक्र तेजी से बदल रहा है। इससे सर्दी कम और गर्मी अधिक होने के आसार हैं। इस समय अधिकतम तापमान 26 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 16 डिग्री के आसपास चल रहा है, जबकि कुछ साल पहले तक दिसंबर में अधिकतम तापमान 22 डिग्री और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री के आसपास पहुंच जाता था। जनवरी में तो न्यूनतम तापमान 4 डिग्री तक भी पहुंचा है। इस बार ऐसे आसार बनते नहीं दिख रहे।
फसलों की हालत: कमजोरी के आसार
मौसम एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस सिंह के अनुसार, पारा कम न होने से फसलों को नमी नहीं मिल पाएगी, जिससे दाना कमजोर होगा। जलवायु परिवर्तन को बदला नहीं जा सकता है और फसल पकने में 45 से 90 दिन लगते हैं। ऐसे में खेतों में नमी रहना आवश्यक है, अन्यथा फसल ग्रोथ नहीं कर पाएगी।
तापमान का पूर्वानुमान: सर्दी का जोर कम
क्षेत्रीय मौसम इकाई के डॉ. मुकेश चन्द्र के अनुसार, देशभर में सर्दी ने जोर नहीं पकड़ा है और इस सप्ताह भी तापमान नीचे आना मुश्किल है। मैदानी क्षेत्रों में तापमान इसी तरह रहने के आसार हैं, और आसमान साफ रहेगा, कोहरा और बारिश की संभावना नहीं है।
हर 10 साल में एक बार: सर्दी की विशेषता
रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक, प्रसार शिक्षा एवं मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस सिंह के मुताबिक, हर 10 साल में एक बार सर्दी कम पड़ती है। इस बार का जोर कम रहने के पीछे जलवायु में बदलाव का सीधा असर है और गर्मी लम्बे समय तक रहेगी। इसका सीधा असर फसलों पर पड़ेगा और किसानों को अपनी फसलों के लिए नए रणनीतियों का अनुसरण करना होगा।
विस्तार से समझाएं: जलवायु परिवर्तन का असर
डॉ. एसएस सिंह ने कहा, "जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्र भी बदल गया है। किसानों को परिवर्तन चक्र के अनुसार ढलना पड़ेगा। उन्हें ऐसी फसलों का चुनाव करना होगा, जो कम पानी और कम समय में पककर तैयार होती हो। इस पर शोध भी किया जा रहा है।"
निष्कर्ष: अब किसानों की बारी
इस समय, जब सर्दी कम और गर्मी अधिक होने के आसार हैं, किसानों को अपनी रोपणी के लिए तैयारी करनी होगी। वे नई तकनीकों का अनुसरण करेंगे, जिससे वे अपनी फसलों को अधिक सुरक्षित रख सकते हैं। इसके अलावा, सर्दी के कमजोर के कारण, फसलों को न्यूनतम नमी देने के लिए वे नए उपाय अपनाएंगे, ताकि उनकी पैदावार में कमी न हो।

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