बुंदेलखंड के औषधीय पौधों पर यूनिवर्सिटी में होगी रिसर्च, खेती को देंगे बढ़ावा

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी व आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्विज्ञान परिषद के बीच हुआ करार, बुंदेलखंड के औषधीय पौधों के उत्पादन, दवा निर्माण, प्रभाव और उत्पादकता बढ़ाने की होगी कोशिश.

By: Abhishek Gupta

Published: 08 Jun 2016, 10:29 PM IST

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय एवं आयुष मंत्रालय के केंद्रीय आयुर्विज्ञान परिषद (सीसीआरएएस) के बीच एक मैमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पर बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी की ओर से कुलपति प्रो.सुरेंद्र दुबे व कुलसचिव वीएन सिंह ने हस्ताक्षर किए, जबकि सीसीआरएएस की ओर से महानिदेशक डा.केएस धीमान व राष्ट्रीय आयुर्वेदिक शोध संस्थान झांसी के निदेशक डा.समाशंकर सिंह ने हस्ताक्षर किए।
  
रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर रहेगा जोर
इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य संयुक्त रूप से शोध एवं विकास कार्यों को बढ़ावा देकर बुंदेलखंड क्षेत्र के औषधीय पौधों का उत्पादन, दवा निर्माण तथा उनकी प्रभावोत्पादकता में वृद्धि करना है। इस एमओयू के अनुसार विश्वविद्यालय को परियोजना कार्य हेतु विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षकों तथा अध्ययनरत विद्यार्थियों को शोध कार्य हेतु वित्तीय सहयोग भी प्रदान किया जायेगा।

औषधीय पौधों की नई प्रजातियों को देंगे प्रोत्साहन
इसके अंतर्गत बुंदेलखंड क्षेत्र में किसानों को औषधीय पौधों की नई प्रजातियों को लगाने हेतु प्रोत्साहित किया जायेगा, जिससे इस क्षेत्र की आर्थिकी पर भी प्रभाव पड़ेगा तथा आयुष विज्ञान से सम्बन्धित उद्योगों को भी बढावा दिया जा सकेगा।

ये लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर राष्ट्रीय आयुर्वेदिक शोध संस्थान, झांसी  के शोध अधिकारी डा0 राजेश मुड़िया, यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डा. ऋषि कुमार सक्सेना आदि उपस्थित रहे।
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