बेतवा नदी उफनाने से झांसी के कई गांव टापू बने, सेना के हेलीकाप्टर से निकाले आठ मछुआरे

बेतवा नदी उफनाने से झांसी के कई गांव टापू बने, सेना के हेलीकाप्टर से निकाले आठ मछुआरे

Brij Kishore Gupta | Publish: Sep, 03 2018 08:29:07 AM (IST) Jhansi, Uttar Pradesh, India

बेतवा नदी उफनाने से झांसी के कई गांव टापू बने, सेना के हेलीकाप्टर से निकाले आठ मछुआरे

झांसी। लगातार हो रही बारिश के कारण बेतवा नदी उफान पर आने से झांसी जिले के कई गांव टापू जैसे बनकर रह गए। इन गांवों का दूसरे स्थानों से संपर्क कट गया है। बेतवा नदी की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। इसके साथ ही ग्रामीणों को नदी किनारे न जाने की सलाह दी है। उधर, एरच क्षेत्र में बेतवा नदी में मछली का शिकार करने के गए आठ मछुआरे अचानक नदी में पानी बढ़ जाने के कारण टापू पर फंस गए। इन्हें सेना के हेलीकाप्टर से सुरक्षित निकाला गया।
ये है चिरगांव के महेबा खेरा गांव की स्थिति
लगातार बारिश के कारण बांधों के फाटक खोलकर पानी निकाले जाने के कारण बेतवा नदी का पानी उफान मार रहा है। इस कारण चिरगांव क्षेत्र के महेबा खेरा गांव के चारों ओर पानी ही पानी नजर आ रहा है। इससे ग्रामीणों का सड़क मार्ग से संपर्क टूट गया है। इसके अलावा नदी किनारे बसे रामनगर, बिरहटा, देदर, देवल, घुसगवां, ध्वानी, मुराटा जैसे गांवों के लोगों को भी अलर्ट कर दिया गया है। नदी का पानी इन गांवों के आसपास भी बह रहा है।
ये है मोंठ के परैछा गांव की स्थिति
बेतवा नदी पर बने खिरियाघाट रिपटे से अगर अंदाजा लगाया जाए तो पानी करीब पचास फीट ऊपर चल रहा है। ग्रामीणों को नदी के आसपास न जाने की सलाह दी गई है। परैछा का संपर्क आसपास के क्षेत्र से कट गया है। इस क्षेत्र में पानी ज्यादा होने के कारण पनारी नाले समेत आसपास के चेलरा, मनकपुरा, सौजना, खिरियाघाट, नंदपुरा, बघौनिया, भ्यौराघाट, गोपालपुरा, सारन, इमिलिया में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रशासनिक अफसर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, प्रधानों व लेखपालों को नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए कहा गया है।
ये हैं टोड़ीफतेहपुर के हालात
उधर, पथराई बांध के पांच फाटक एक साथ खुलने से नदी उफान पर है। आसपास के कई इलाके जलमग्न हो गए। यहां पर भी लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। इसके अलावा झांसी में भी पहूज नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण वहां निचले स्थानों पर कराए गए निर्माण कार्य जलमग्न हो गए हैं।

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