महिलाओं के लिए बेहद खास हैं ये स्वास्थ्य सेवाएं, एकदम मुफ्त मिलती हैं सब

हर स्तर के लिए लागू की गई हैं सरकारी योजनाएं, नहीं लगता एक भी पैसा

By: BK Gupta

Published: 08 Mar 2018, 09:13 AM IST

झांसी। आमतौर पर महिलाएं सरकारी स्तर पर मुफ्त में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और सलाह के बारे में जानकारी नहीं होने पर वह इसका लाभ नहीं उठा पाती हैं। अगर देखा जाए तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर स्तर पर महिलाओं की सेहत का ख्याल रखने संबंधी योजनाएं लागू की गई हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर यहां दिया जा रहा है कुछ इसी तरह की योजनाओं का ब्योरा, जो उनकी जिंदगी को बचाने में मददगार साबित हो सकता है।
इन बीमारियों से होती हैं ज्यादा मौतें
आमतौर पर ये माना जाता है कि दिल की बीमारी सबसे ज्यादा पुरुषों में होती हैं, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार महिलाएं इस बीमारी से सबसे ज्यादा म्रत्यु को प्राप्त हो जाती हैं। इसी के साथ कैंसर की वजह से भी सबसे ज्यादा महिलाएं मरती हैं, क्यूंकि 20-59 वर्ष की महिलाओं में स्तन कैंसर की संभावना ज्यादा होती हैं।
ये हैं खतरे
यूं तो महिलाओं पर मौत का साया सिर्फ दिल की बीमारी से नहीं बल्कि उनके जीवन में हर एक कदम पर होता हैं। और ये मौत का साया उनके गर्भ में आने से ही शुरू हो जाता हैं। सबसे पहले बहुत सी लड़कियों को गर्भ में ही मार दिया जाता हैं, फिर यदि लड़की जन्म ले लेती हैं तो उसका बचपन समाज की कुछ रूढ़िवादिता में फंस जाता हैं। इससे उसका विशेष खानपान न होने की वजह से ज़्यादातर बच्चियां कुपोषण व खून की कमी से जूझती रहती हैं। वहीं कम उम्र में शादी की वजह से भी उन पर ये मौत का साया मंडराता रहता हैं क्योंकि अपरिपक्व शरीर में गर्भ धारण करने की वजह से भी महिलाओं की मौत हो जाती है। इसके बावजूद जैसे तैसे यदि कोई महिला इन सब परिस्थितियों से निकल आती हैं, तो उसमें गर्भशाय कैंसर, स्तन कैंसर, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियाँ घेर लेती हैं। महिला को हर एक क्षण हर एक क़दम पर एक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और सलाह की जरूरत है। और ये उन्हें हर जगह आसानी से बिना किसी भुगतान के मिल सकती हैं। शुरुआत करते हैं जन्म से।
- समय से पूर्व या कमजोर कन्या में ठंडा बुखार या हाईपोथर्मिया की शिकायत सबसे ज्यादा होती है। इसके लिए माताओं को चाहिए कि वह घर पर ही बच्चे को कंगारू मदर केयर यानि अपनी त्वचा से बच्चे की त्वचा को मिलाकर गर्माहट देना। इसको कैसे करना है इसकी सलाह डॉक्टर या अपने क्षेत्र की आशा से ले सकते है। काफी जिला अस्पतालों में कंगारू मदर केयर सेंटर भी बनाए गए हैं।
- इसी के साथ शिशु के तापमान, उनका वजन और देखभाल के लिए आशाओं द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में घर पर ही गृह आधारित नवजात देखभाल दी जाती है।
- यदि बच्चा बहुत ज्यादा बीमार है तो बीमार नवजात इकाइयों (एसएनसीयू) पर दिखा सकते हैं। ये इकाइयां जिले के प्रमुख अस्पतालों में उपलब्ध हैं।
- यदि कोई बालिका कुपोषण का शिकार है तो उसके लिए पोषण पुनर्वास केंद्र भी बनाए गए हैं। लोग अपने क्षेत्र की आशा या एएनएम से इसकी जानकारी ले सकते हैं।
- चाहे लड़का हो या लड़की सभी का टीकाकरण बहुत जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताह का हर बुधवार और शनिवार टीकाकरण के लिए सुनिश्चित किया गया है। जहां बच्चों की मुफ्त जांच और मुफ्त टीकाकरण कराया जाता है।
- इसी के साथ ही यदि दिमागी बुखार या पेट में कीड़े की समस्या हो तो इसके लिए भी संबन्धित स्वास्थ्य केन्द्रों में दवाइयों की मुफ्त सुविधा है।
किशोरावस्था की तकलीफें
ये वह अवस्था है जब किसी को स्वास्थ्य का खास ख्याल नहीं रहता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 15-19 वर्ष की आयु में गर्भावस्था और प्रसव संबंधी जटिलताएं विश्व स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। इन मौतों को रोका जा सकता है। उत्तर प्रदेश की 50 प्रतिशत युवा महिलाओं में एनीमिया की समस्या है। लगभग 21 प्रतिशत युवा महिलाओं की शादी कानूनी आयु (18 वर्ष) से पहले हो चुकती है।
इससे ये साफ जाहिर हैं कि हर एक बालिका को अपनी किशोरावस्था में बेहतर ध्यान देने की आवश्यकता हैं। इसके लिए वो अपने क्षेत्र की आशा, एएनएम या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से बात कर सकती हैं। इसी के साथ किशोर स्वास्थ्य क्लीनिक चिन्हित सीएचसी एवं जनपद स्तर पर स्थापित किए गए है। इन क्लीनिकों पर एनीमिया की रोकथाम के लिए साप्ताहिक आयरन एण्ड फोलिक एसिड और एल्बेन्डाजोल, सेनेटरी नेपकिन, गर्भ निरोधकों को और अन्य संक्रामक बीमारियों के निदान के लिये स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से उपचार प्रदान किया जाता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए तो बहुत सी योजनाएं और सुविधाएं दी जा रही हैं। जैसे कि दूर दराज क्षेत्रों में 102 और 108 एंबुलेंस सुविधा है। गर्भवती महिला को प्रसव के पूर्व चार जांच कराना बहुत जरूरी हैं। इसके लिए हर महीने की 9 तारीख को सुरक्षित मातृत्व दिवस सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में मनाया जाता हैं। जहां गर्भवती महिला की समस्त जांचें मुफ्त में की जाती है, साथ ही यदि कोई जटिल समस्या निकली तो उसका निस्तारण भी किया जाता है। इसी के साथ स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए मां नाम का अभियान भी चलाया जा रहा है। 6 माह तक प्रत्येक बच्चे को मां का दूध ही पिलाना चाहिए। इससे मां और बच्चा दोनों का स्वस्थ रहते हैं। 2017 में ही गर्भवती महिलाओं के गर्भावस्था के दौरान बेहतर खान-पान के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना शुरू की गई। इसमें पहली बार गर्भवती हुई महिला को 3 किश्तों में कुल 5000 रूपये दिये जाते हैं। इसके लिए हर गर्भवती महिला को गर्भावस्था की शुरुआत में ही स्वास्थ्य केंद्र या आगनवाड़ी केन्द्रों पर पंजीकरण कराना बहुत जरूरी है।
तीस साल की आयु के बाद की तकलीफें
जब महिला अपनी उम्र के तीसवें पड़ाव पर पहुंचती हैं तो उसे और भी कई बीमारियां घेर लेती है, जैसे कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गर्भाशय कैंसर, स्तन कैंसर आदि। ऐसे में इनका पूर्व में अनुमान होना ज्यादा सुरक्षित हैं। प्रदेश में हर जिला अस्पताल में एक एनसीडी (गैर संचारी रोग) क्लिनिक है। जहां महिलाएं पहले से ही अपनी पूर्ण जांच मुफ्त में करवा सकती हैं। इसके साथ ही महिलाओं की जरूरत को देखते हुये कुछ चिन्हित अस्पतालों में संपूर्णा क्लीनिक भी बनाया गया है। जहां 13-14 उम्र की किशोरियों को इन बीमारियों से बचने के लिए टीका लगाया जाता है। वहीं महिलाओं में इन बीमारियों की पहचान के लिए जांच की जाती हैं।

BK Gupta Desk/Reporting
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