रिसर्च टीम ने सूखे बुंदेलखंड में गुजारे तीन दिन, देखा लोगों का दुख-दर्द

रिसर्च टीम ने सूखे बुंदेलखंड में गुजारे तीन दिन, देखा लोगों का दुख-दर्द
Jhansi

Hariom Dwivedi | Updated: 11 Jun 2016, 11:24:00 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

शोध दल ने पाया है कि बुंदेलखंड में सूखे के कारण लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। 

झांसी. इलाहाबाद के गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान की रिसर्च टीम ने तीन दिवसीय दौरे के तहत सूखे बुंदेलखंड के लोगों के दुखदर्द को देखा। इस दौरान गांवों के हालात के ऊपर एक रिपोर्ट तैयार की।

बुरी तरह प्रभावित हुई जिंदगी
शोध दल ने पाया है कि बुंदेलखंड में सूखे के कारण लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। 
- बारिश नहीं होने से जल स्तर के अत्यंत नीचे चला गया है। ट्यूबवेल ने भी साथ छो़ड़ दिया है। इससे किसानों की रबी की फसल पूरी तरह से विफल हो गयी है।
- खेती नहीं होने से किसानों का जीवन भी संकट में पड़ गया है। किसानों के पास एकमात्र विकल्प किसान क्रेडिट कार्ड बचा है। इसमें से उन्होंने अधिकतम राशि निकाल ली है। दूसरी तरफ भूमिहीन लोग गांव छोड़कर पंजाब, हरियाणा में ईंट-भट्ठों पर जाने के लिए विवश हो गए हैं। जो लोग गांव में बचे हैं, उनके लिए मनरेगा ही एकमात्र विकल्प बचा है। इसका भी उचित कार्यान्वयन नहीं हो पा रहा है।
- पशुओं के लिए पीने का पानी और चारा का संकट गहराता गया है। इससे पशुधन कमजोर होता गया है। इससे किसानों सहित अन्य गरीब तबकों का आर्थिक आधार कमजोर पड़ता गया है। भूसे का दाम आसमान छू रहा है और पानी की तरह भूसा भी आसानी से उपलब्ध नहीं है।
- बुंदेलखंड में सूखे ने शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। जुलाई आने वाली है और ग्रामीणों के पास अपने बच्चों को कक्षा नौ से बारह में प्रवेश दिलाने के लिए किताबों और फीस की चिंता सता रही है।

ये रहे रिसर्च टीम में शामिल
इस टीम ने बांदा जिले के बड़ोखर, खहरा, मवई, चैकिन पुरवा, कबोली, नरैनी तहसील में हरिपुर, मटखना, बरशहर, शंकरपुरवा, कटरा और कालिंजर में लोगों से मिलकर बातचीत की और आंकड़े इकट्ठे किए। इस शोध दल में संस्थान के डा. अर्चना सिंह, डा. कुणाल केसरी, रमाशंकर, विकास, अमित, विनीत, जितेंद्र, नंदकिशोर, नेहा, संजू, तिलक और किशन शामिल रहे।
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