चुनाव से पहले मोदी सरकार की बुंदेलखंड के लिए एक बड़ी सौगात

चुनाव से पहले मोदी सरकार की बुंदेलखंड के लिए एक बड़ी सौगात
Jhansi Committee

Abhishek Gupta | Updated: 22 Dec 2016, 11:54:00 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने चुनाव से पहले बुंदेलखंड के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार की है। इस परियोजना के जरिए बुंदेलखंड को सूखे जैसे संकट से निजात दिलाने की कोशिश की जाएगी.

झांसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने चुनाव से पहले बुंदेलखंड के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार की है। इस परियोजना के जरिए बुंदेलखंड को सूखे जैसे संकट से निजात दिलाने की कोशिश की जाएगी। इसके तहत बुंदेलखंड में आने वाले उत्तर प्रदेश के ललितपुर व झांसी के साथ ही मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों को शामिल किया गया है। जल संसाधन मंत्रालय द्वारा प्रायोजित परियोजना में जल संरक्षण और जल सुरक्षा का प्लान तैयार किया जा रहा है। इसी काम को आगे बढ़ाने और डेवलेपमेंट प्लान जल्द तैयार के लिए एक कार्यशाला का आयोजन यहां मुख्य विकास अधिकारी नवनीत सिंह चहल की अध्यक्षता में विकास भवन के सभागार में आयोजित की गई। 

झांसी जिले में पथरई और लखेरी का चयन
इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी नवनीत सिंह चहल ने कहा कि वाटर शेड डेवलपमेंट के लिए चयनित चार जिलों में से झांसी का एक तिहाई भाग शामिल है। क्षेत्र में पथरई व लखेरी नदी का चयन किया गया है। इस योजना से लखेरी नदी को वास्तविक स्वरूप में जल्द लाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना में जल, जमीन व फसल के प्रबंधन को ऐसे किया जाए, जो ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि झांसी के लिए प्लान राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की, उत्तर प्रदेश रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर लखनऊ और मध्यप्रदेश काउंसिल आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी भोपाल के साथ स्थानीय एनजीओ की सहमति से प्रस्तुत किया गया। इस प्लान के इंप्लीमेंट के लिए शीघ्र भ्रमण किया जाएगा। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों से सुझाव भी लिए जाएंगे।

मई-2016 से चल रहा है काम
इस मौके पर भारत सरकार के जल संसाधन मंत्रालय द्वारा प्रायोजित परियोजना में जल संरक्षण और जल सुरक्षा के आईडब्ल्यूआरएम प्लान पर काम मई-2016 से शुरू कर दिया गया है। डा.सुधाकर शुक्ला ने बताया कि क्षेत्र में पथराई व लखेरी के विकास के लिए सेटेलाइट के सहयोग से कार्य आसान हो जाएगा। उपग्रह के माध्यम से क्षेत्र में जल उपलब्धता व भूगर्भ जल उपलब्धता सटीक जानकारी मिल जाती है। उन्होंने बताया कि लगभग आठ गांवों में वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाने के लिए चुना गया है। इसमें गुरसरांय के चार गांवों के साथ ही उल्दन, मगरवारा, मऊरानीपुर और धमना पायक गांव शामिल हैं। 

इन लोगों ने दी तकनीकी जानकारी
इस मौके पर एमपी सीएसटी भोपाल ने परियोजना में वैज्ञानिक ढंग से जल प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। इसके अलावा उपकृषि निदेशक डा.यूपी सिंह, डा.वी सी गोयल, टी.थामस, डा.संदीप गोल, डा.ज्योति पाटिल, डा.रवि प्रकाश आदि ने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर पीडी डीआरडीए जीपी गौतम, डीडीओ रंजीत सिंह, डीसी मनरेगा आर के लोधी सहित अनेक विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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